तालिबान की नहीं अपने देश के रोटी-रोजगार की फिक्र करें ?

तालिबान की नहीं अपने देश के रोटी-रोजगार की फिक्र करें ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 15 अगस्त को हमारा देश अपनी आज़ादी की 74 वीं वर्षगांठ मना रहा था, तो इस दिन पड़ौसी देश अफगानिस्तान के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर तालिबान राजधानी काबुल पर काबिज हो गया था। राष्ट्रपति अशरफ़ गनी इसी दिन देश छोड़ कर भाग गए थे। इसमें कोई शक नहीं कि तालिबान ने विश्व महाशक्ति या विश्व के सबसे बड़े गुण्डे देश अमेरिका को बुरी तरह से पछाड़ खिलाई है। लेकिन किसी मुल्क पर हथियारबन्द गिरोह से कब्ज़ा कर लिया जाए, यह सही नहीं है। तालिबान की इस फतह या कब्ज़े पर पूरा विश्व अचम्भित है। हमारे देश में सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है, कोई इसकी खुशी मना रहा है, तो कोई इसका डर दिखाकर अपनी सियासी रोटी सेकने की कोशिश कर रहा है।


हो सकता है कि कुछ लोग हमारी बात से नाइत्तेफाकी करते हुए नाराज़ होंगे, लेकिन जो तरीका तालिबान ने अपनाया था और आज अपना रहा है, वैसा अल्लाह के आखरी पैगम्बर हज़रत मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि व सल्लम और उनके चारों खलीफाओं (उत्तराधिकारियों) के जमाने में नहीं अपनाया गया था। यह ऐतिहासिक सच्चाई है कि तालिबान अमेरिका का पाकिस्तान की मदद से सोवियत संघ के खिलाफ़ खड़ा किया गया एक हिंसक गिरोह है। जो तरीका हिन्दुत्व के नाम पर हमारे देश में कुछ कट्टरपंथी लोग अपनाना चाहते हैं, जैसा कि कुछ दिन पहले जन्तर मन्तर पर नारेबाजी की गई थी, वही तरीका इस्लाम के नाम पर तालिबान ने अपनाया है। तालिबान का यह हिंसक तरीका पैगम्बर ए इस्लाम सल्ललाहु अलैहि व सल्लम की तालीम व सीरत (शख्सियत) के खिलाफ़ है।


एक बड़ा सवाल यह भी है कि दुनिया के करीब 57 मुस्लिम मुल्कों में से तालिबान का समर्थन सिर्फ एक ने यानी पाकिस्तान ने ही क्यों किया है ? इसका मतलब यह है कि वे तालिबान के इस तरीके से सहमत नहीं हैं। हमारे देश में जो लोग तालिबान की इस फतह को लेकर खुश हो रहे हैं, उन्हें ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह अफगानिस्तान का मसला है ना कि भारत और भारतीय मुसलमानों का। आपको पता है कि हमारे देश में कट्टर साम्प्रदायिक तत्वों की कुछ बरसों में बढ़ोतरी हुई है और वे खुलेआम चैलेंज भी करने लग गए हैं।

कल को ऐसे ही कुछ हजार लोकतंत्र व संविधान विरोधी तत्व हथियार उठाकर "भारतीय तालिबान" बनने का प्रयास करेंगे, जिन्हें देश में मुसलमानों, ईसाइयों, कम्यूनिस्टों, समाजवादियों, अम्बेडकरवादियों आदि का वजूद ही पसंद नहीं है। वे तालिबान की तरह ताकत के बल पर देश की लोकतांत्रिक व संवैधानिक व्यवस्था को उखाड़ने का प्रयास करेंगे, तब आप उनकी आलोचना करने का भी अधिकार नहीं रखोगे, क्योंकि आपको जब "अफगानी तालिबान" पसंद है, तो फिर "भारतीय तालिबान" पसंद क्यों नहीं ? इसलिए तालिबान की फतह पर ज्यादा उतावले बनकर नौ-नौ हाथ नहीं उछलें तो अच्छा रहेगा।

साथ ही वे लोग जो तालिबान का डर दिखाकर और यह कहकर कि भारत में ज्यादातर मुसलमान तालिबान के समर्थक हैं, इसलिए फलां पार्टी को मजबूत करें और फलां को ही वोट दें। इस तरीके से आप यूपी चुनाव तो जीत सकते हैं, लेकिन साथ में देश का बचा हुआ बेड़ा गर्क भी कर देंगे। वैसे आपने पिछले 32 साल में और विशेष तौर पर सात साल में देश को बरबाद करने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी है।

आपको पता होना चाहिए कि अफगानिस्तान की आबादी करीब चार करोड़ है और कमोबेश सभी मुसलमान हैं। तालिबान के पास कुछ हजार हथियारबन्द लोग हैं और वे जिन लोगों को मार रहे हैं या उन्होंने जिनको मारकर अफगानिस्तान पर कब्ज़ा किया है, वे भी मुसलमान हैं। इसका मतलब यह हुआ कि अफगानिस्तान के बहुसंख्यक मुसलमान तालिबान के खिलाफ़ हैं और जो तालिबान की इस विचारधारा का विरोध कर रहे हैं, वे भी मुसलमान हैं। यही हाल हमारे देश में है कि कुछ सिरफिरे और नादान मुसलमानों को छोड़कर अधिकतर भारतीय मुसलमान तालिबान की विचारधारा के खिलाफ़ हैं।

तालिबान से हमारे देश को कोई खतरा नहीं है, खतरा सिर्फ चीन, पाकिस्तान और तालिबान के गठजोड़ से है। इसलिए हमें सामाजिक न्याय, समानता और भाईचारे से देश को मजबूत करना चाहिए तथा यही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है। हमें हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करने और साम्प्रदायिकता का माहौल बनाकर चुनाव जीतने का प्रयास करने वालों का डटकर विरोध करना चाहिए, क्योंकि देश के असल दुश्मन यही लोग और इनकी विचारधारा है। हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, यहाँ 140 करोड़ आबादी और 90 करोड़ से अधिक वोटर हैं, 50 लाख के करीब सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा बल हैं। मजबूत हथियार व टेक्नोलॉज़ी है। हमारा मुट्ठी भर हिंसक आतंकी तालिबान क्या उखाड़ लेंगे ? एक और बात हमारे देश के पास एक हथियार है, जो विश्व में किसी भी देश के पास नहीं है। वो है गंगा जमुनी तहजीब (मिलीजुली संस्कृति)। अगर हम पूरी ताक़त से इसे मजबूत करेंगे, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत को हम हरा देंगे।

हम दिन रात गैर जरूरी उलूल जुलूल बातें करते रहते हैं। क्या हमें पता है या याद है कि आज रोटी रोजगार के मामले में हमारे देश की क्या हालत है ? विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बेरोजगारी दर 24 प्रतिशत, बांग्लादेश में 12 प्रतिशत और चीन में 11 प्रतिशत हो गई है। यानी हमारा ही टुकड़ा बांग्लादेश रोजगार के मामले में चीन के बराबर होता जा रहा है और हम से आगे निकल गया है। दूसरी तरफ हम शहरों के नाम बदलने और तालिबान का डर दिखाकर यूपी चुनाव जीतना चाह रहे हैं। कितनी शर्म की बात है यह ? हम को पता होना चाहिए कि विश्व इतिहास का एक आकलन यह भी कहता है कि जिस देश में बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत से अधिक हो जाती है, तो वहां का युवा सत्ता परिवर्तन के लिए संघर्ष करने लग जाता है, लेकिन हमारा युवा 24 प्रतिशत बेरोजगारी दर के बावजूद हिन्दू-मुस्लिम नाम की अफ़ीम पीकर वोट दे रहा है।

आज हमारे देश की शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था चौपट हो गई है। शिक्षा और चिकित्सा के नाम पर लूट मची है। आम आदमी न मोटी फीस देकर बच्चों को पढा सकता है और ना ही अपने बीमार परिजन का इलाज करवा सकता है। दो साल से बिना परीक्षा, बिना पढाई के हम स्कूल काॅलेजों की पूरी फीस जमा करवा रहे हैं, क्यों ? क्या कोरोना काल से पीड़ित जनता के साथ यह लूट और डकैती नहीं है ? लेकिन कोई बड़ा राजनेता इस पर नहीं बोलता है, क्योंकि शिक्षा के नाम पर हो रही इस लूट में सबकी पांचों अंगुलियां घी में डूबी हुई हैं।

कूछ महीनों पहले हमने देखा था कि कोरोना की दूसरी लहर में हमारी चिकित्सा व्यवस्था का क्या हाल था ? ऑक्सीजन, रेमडिशिवर इंजेक्शन आदि के नाम पर कालाबाजारी व लूट हो रही थी। लोग ऑक्सीजन के अभाव में तड़प तड़प कर मर रहे थे, गंगा और यमुना नदी में तैरती लाशों की डरावनी तस्वीरें व वीडियो भी हमने देखी थी। अन्तिम संस्कार सम्मान से करने की हमारे देश की संस्कृति है, लेकिन हमारी व्यवस्था कोरोना की दूसरी लहर में अन्तिम संस्कार भी सम्मान से नहीं कर पाई।

हमें यह भी पता होना चाहिए कि पिछले सात साल में पेट्रोल डीजल पर टैक्स रेट बढ़ाकर मोदी सरकार ने करीब 22 लाख करोड़ रुपये हमसे वसूल किए हैं। नरसिम्हा राव सरकार से अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार और फिर मनमोहन सिंह की सरकार तक, किसी भी सरकार ने सात साल के औसत के हिसाब से इस मद में 9 लाख करोड़ से अधिक का टैक्स नहीं लिया था। कहाँ 22 लाख करोड़ और कहाँ 9 लाख करोड़ ? गैस सिलेंडर पर सब्सिडी बन्द कर दी गई और रेट पिछले एक साल में करीब 190 रूपये अलग से बढा दी। यह क्या है ? सरकार की यह लूट हिन्दू-मुस्लिम नहीं देख रही है, सबके साथ हो रही है, उनके साथ भी यह लूट हो रही है जो 100 रूपये का फोन रीचार्ज करवाकर दिन रात सोशल मीडिया पर हिन्दू-मुस्लिम करते हैं। इसलिए हमें तालिबान की नहीं अपने देश के रोटी रोजगार की फिक्र करनी चाहिए।
(23-08-2021)
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