कौन बनेगा राजस्थान वक्फ बोर्ड का चेयरमैन ?
कौन बनेगा राजस्थान वक्फ बोर्ड का चेयरमैन ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। अगस्त के आखिर में राजस्थान वक्फ बोर्ड को नया चेयरमैन मिल जाएगा। बोर्ड में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, निर्वाचित सदस्यों का चुनाव 17 अगस्त को होगा। इसके बाद चेयरमैन का चुनाव होगा। बोर्ड में कुल 9 मेंबर होंगे, जिनमें 5 निर्वाचित और 4 मनोनीत। यही 9 मेंबर चेयरमैन का चुनाव करेंगे। हालांकि यह तय है कि बोर्ड में चेयरमैन निर्विरोध बनाया जाएगा और चेयरमैन उसे बनाया जाएगा जिसे राज्य सरकार बनाना चाहेगी।
वक्फ बोर्ड चेयरमैन के लिए जो लोग दावेदार बने हुए हैं, उनमें निवर्तमान चेयरमैन डॉक्टर खानू खान बुधवाली, पूर्व सांसद अश्क अली टाक, आदर्श नगर विधायक रफीक खान। हालांकि खुले तौर पर इनमें से किसी ने भी अपनी दावेदारी नहीं कर रखी है। लेकिन अंदरखाने की चर्चा यही है कि चेयरमैन इन तीनों में से कोई एक बनेगा। साथ ही चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने क्षेत्र के मुसलमानों को खुश करने के लिए हो सकता है कि इस बार चेयरमैन जोधपुर से बना दें।
यह लेख लिखे जाने तक विधायक कोटे से किसी भी विधायक ने बोर्ड मेंबर बनने के लिए फार्म नहीं भरा। गत बोर्ड में जिसका कार्यकाल 8 मार्च को खत्म हुआ, उसमें विधायक कोटे से आदर्श नगर विधायक रफीक खान मेंबर थे। चर्चा यही है के इस बार भी रफीक खान को विधायक कोटे से मेंबर बनाया जाएगा। इस चर्चा के साथ यह भी चर्चा है कि रफीक खान इस बार सिर्फ बोर्ड मेंबर बनने के लिए मेंबर नहीं बनेंगे, वे मेंबर तभी बनेंगे जब उनको बोर्ड का चेयरमैन बनाया जाएगा और राज्यमंत्री का दर्जा दिया जाएगा। यह इसलिए कि मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं अभी टल चुकी हैं और पहली बार विधायक बने किसी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल न करने की मुख्यमंत्री गहलोत ने पॉलिसी बना रखी है।
इसलिए रफीक खान को लग रहा है कि मंत्रिमंडल में नंबर नहीं आएगा, इसलिए बेहतर है कि वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बना जाए और राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त कर लिया जाए। रफीक खान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट दोनों गुटों से अच्छे संबंध हैं तथा दिल्ली में भी उनकी अच्छी पकड़ है। साथ ही वे कांग्रेस के हर कार्यक्रम में पेश-पेश रहते हैं तथा एक सुलझी हुई अच्छी सोच के राजनेता हैं। इसलिए चर्चा यही है कि अगर रफीक खान वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बनना चाहेंगे तो वह आसानी से चेयरमैन बन जाएंगे।
अगर रफीक खान को चेयरमैन नहीं बनाया जाएगा तो फिर वे मेंबर भी नहीं बनेंगे और फिर विधायक कोटे से मेंबर पूर्व मंत्री अमीन खान को बनाए जाने की चर्चा है। खबर यह भी है कि मुख्यमंत्री पर विधायकों का जबरदस्त दबाव है मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर, इसलिए मुख्यमंत्री वक्फ बोर्ड चेयरमैन किसी विधायक को भी बना सकते हैं। अगर रफीक खान को मुख्यमंत्री चेयरमैन नहीं बनाएंगे तो फिर रामगढ़ विधायक सफिया खान और बसपा से कांग्रेस में आए नगर विधायक वाजिब अली में से किसी एक को चेयरमैन बना सकते हैं। एक्ट के मुताबिक वक्फ बोर्ड में दो महिला सदस्य होनी भी जरूरी हैं और अगर सफिया खान को वक्फ बोर्ड मेंबर बनाया जाता है, तो उससे महिला एवं विधायक के दो कोटे पूरे हो सकते हैं। साथ ही राजस्थान वक्फ बोर्ड को पहली महिला चेयरमैन भी मिल सकती है।
पूर्व सांसद अश्क अली टाक का नाम भी वक्फ बोर्ड चेयरमैन के तौर पर चर्चा में है। वे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुराने साथी हैं और छात्र जीवन से ही कांग्रेस से जुड़े रहे हैं तथा वे इस कोशिश में हैं कि उन्हें वक्फ बोर्ड का चेयरमैन बना दिया जाए और राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया जाए। जहां तक सवाल राज्यमंत्री के दर्जे का है तो वक्फ बोर्ड में सबसे पहले राज्यमंत्री का दर्जा तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चेयरमैन सलावत खान को दिया था। उनके बाद चेयरमैन बने आईजी लियाकत खान और अबू बकर नकवी को राज्य सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। लेकिन अबू बकर की बर्खास्तगी के बाद हुए उप चुनाव में चेयरमैन बने डॉक्टर खानू ख़ान बुधवाली को गहलोत सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा नहीं दिया।
जहां तक डॉक्टर खानू खान बुधवाली का सवाल है तो सियासी गलियारों में उनको लेकर चर्चा यह है कि उनका चेयरमैन बनना एक तरह से फाइनल है, क्योंकि चेयरमैन बनाना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हाथ में है और खानू खान मुख्यमंत्री गहलोत के नजदीकी लोगों में से हैं और कांग्रेस के जमीन से जुड़े हुए कार्यकर्ता हैं। खानू खान बुधवाली ने छात्र जीवन से ही अपने आप को कांग्रेस से जोड़ लिया था और पार्टी के लिए 20 साल के लंबे संघर्ष के बाद सरकार ने उनको राजनीतिक नियुक्ति दी थी। इस नियुक्ति पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में बड़ी खुशी हुई थी, क्योंकि उनको लगा कि पार्टी ने जमीन से जुड़े हुए कार्यकर्ता को चेयरमैन बनाकर के सम्मानित किया है।
डाॅक्टर खानू खान बुधवाली का कार्यकाल उप चुनाव के कारण करीब 15 महीने का ही था। इसलिए शुरू से ही इस बात की चर्चा है कि खानू खान को अगले 5 साल का कार्यकाल दिया जाएगा। यानी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वक्फ बोर्ड का अगला चेयरमैन खानू खान बुधवाली को ही बनाएंगे। चर्चा है कि डाॅक्टर बुधवाली ने अपने छोटे से कार्यकाल में सराहनीय काम किया है और वक्फ बोर्ड की पटरी से उतरी हुई गाड़ी को पूरी ताकत से वापस पटरी पर चढ़ाया है। वे पूरी तरह से सक्रिय रहे और कोरोना काल की तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने वक्फ बोर्ड का बेहतरीन अंदाज में संचालन किया। साथ ही कोरोना लॉकडाउन में जरूरतमंदों की भरपूर मदद भी की। ज़रूरतमंदों की ऐसी मदद वक्फ बोर्ड के इतिहास में पहले कभी नहीं की गई।
इस बीच चेयरमैन को लेकर के एक मुद्दा यह भी चर्चा में है कि पिछले दिनों मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर के कांग्रेस के चार बड़े नेता जयपुर आए। जिनमें संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रभारी महासचिव अजय माकन प्रमुख हैं। अजय माकन ने एक-एक विधायक से और बड़े नेताओं से मुलाकात की तथा फीडबैक लिया। यह सब इसलिए हुआ, क्योंकि सचिन पायलट को लेकर के कांग्रेस आलाकमान जबरदस्त दबाव में था तथा पायलट गुट को मंत्रिमंडल व राजनीतिक नियुक्तियों में भागीदारी देने के लिए यह सारी कसरत की गई। इससे यह बात सामने आई कि राजनीतिक नियुक्तियों में अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मनमर्जी नहीं चलेगी। अब जो भी राजनीतिक नियुक्ति होगी उसमें आलाकमान की मर्जी चलेगी।
अजय माकन की सियासी कसरत से यह साबित हो रहा है कि वक्फ बोर्ड चेयरमैन की नियुक्ति गहलोत की मर्जी के अलावा भी हो सकती है। यानी यह नियुक्ति आलाकमान की तरफ से भी हो सकती है तथा आलाकमान इस नियुक्ति में गहलोत और पायलट दोनों गुटों की सहमति से या फिर किसी ऐसे व्यक्ति को जो न्यूट्रल है और पार्टी के प्रति समर्पित है, उसे चेयरमैन बना सकता है। बहरहाल यह सब सियासी चर्चाएं हैं। वक्फ बोर्ड चेयरमैन कौन होगा ? यह आने वाला वक्त बताएगा कि चेयरमैन बनाने में मुख्यमंत्री गहलोत की मर्जी चलेगी या पायलट की भी कोई सहमति ली जाएगी या फिर आलाकमान दोनों ही गुटों को दरकिनार कर अपनी मर्जी का चेयरमैन राजस्थान वक्फ बोर्ड में बनाएगा।
(08-08-2021)
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