ओवैसी का जयपुर में खुफिया दौरा : समर्थकों में निराशा तो सियासी हलके में खलबली
ओवैसी का जयपुर में खुफिया दौरा : समर्थकों में निराशा तो सियासी हलके में खलबली
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। एमआईएम चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी के अचानक खुफिया तौर पर जयपुर दौरे को लेकर जहां राजस्थान के सियासी हलके में पूरी तरह से खलबली मच गई है, वहीं उनके समर्थकों में एक निराशा का भाव पैदा हो गया है। हर सियासी मुद्दे पर बेबाकी से अपनी बात रखने वाले और ख़ासकर मुस्लिम मुद्दों पर तथाकथित सेकुलर पार्टियों, मोदी सरकार व आरएएस को आड़े हाथों लेने वाले ओवैसी का यूं अचानक खुफिया तौर पर जयपुर आना तथा फिर बिना मीडिया से बात किए हुए वापस चले जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
खबर है कि 4 सितंबर को ओवैसी कुछ लोगों के साथ जयपुर एयरपोर्ट पर उतरे और फिर एक पांच सितारा होटल में उनकी कुछ लोगों के साथ मीटिंग हुई तथा उनके कुछ साथी सीधे अजमेर चले गए। जयपुर के होटल ललित के रूम नंबर 521 में असदुद्दीन ओवैसी की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में अविनाश कल्ला, श्रीपाल शक्तावत और मोहसिन रशीद आदि से उनकी मुलाकात हुई। इनके अलावा उनकी कुछ और लोगों से भी मुलाकात हुई है, जिनके नाम अभी तक सामने नहीं आए हैं। ओवैसी के जो साथी अजमेर गए वे वहां किससे मिले, वे नाम भी यह खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आए हैं।
4 सितंबर को दोपहर 12 बजे यह खबर वायरल हुई के ओवैसी पूरी तरह गोपनीयता के साथ जयपुर पहुंचे हैं और वे एक होटल में मीटिंग कर रहे हैं। इस खबर से राजस्थान के खुफिया तंत्र और प्रशासनिक तंत्र के जहां हाथ-पांव फूल गए और उन्होंने उनकी लोकेशन मालूम करने के लिए इधर-उधर हाथ-पैर मारने शुरू किए, तो दूसरी तरफ सियासी हलके में पूरी तरह से खलबली मच गई कि वह किसके साथ मीटिंग कर रहे हैं और इतनी गोपनीयता से जयपुर क्यों पहुंचे हैं ?
इस खबर को सुनकर राजस्थान के हजारों की तादाद में ओवैसी के समर्थकों को जहां खुशी हुई और काफी लोग जयपुर आने की या जो जयपुर के थे वे उनसे मिलने की कोशिश करने लग गए। कुछ समर्थकों ने हैदराबाद एमआईएम ऑफिस फोन किया तो वहां से दो खबरें मिली। एक यह कि हमें कोई पता नहीं है कि आज ओवैसी साहब कहां हैं, दौरे पर हैं या हैदराबाद में हैं। दूसरी खबर उनको यह मिली कि वे जयपुर में किसी निजी काम से आए हुए हैं और यह काम किसी हॉस्पिटल या कॉलेज से संबंधित है।
खबर है कि ओवैसी के इस खुफिया दौरे और समर्थकों में से किसी से नहीं मिलने की वजह से उनके बहुत से समर्थकों में निराशा का भाव भी पैदा हुआ कि हम पिछले कई साल से ओवैसी और एमआईएम के नाम की दिन-रात सोशल मीडिया पर सांकळ खाते रहते हैं, यानी पैरवी करते रहते हैं, इसके बावजूद हमारा नेता खुफिया तौर पर जयपुर आता है और किसी को कानों कान खबर भी नहीं देता है और ना ही अपने चाहने वालों से मिलता है। वहीं उनके बहुत से समर्थकों ने सोशल मीडिया पर ऐसी बातों का बचाव भी किया और यह कहा कि यह उनका निजी दौरा था और वे जब सियासी तौर पर आएंगे, तब पूरी तैयारी से आएंगे और वे हमसे मिलें या नहीं मिलें, लेकिन हमारा और उनका दिली रिश्ता है और यह रिश्ता हमेशा कायम रहेगा चाहे वे हमें तवज्जोह दें या नहीं दें।
ओवैसी के जयपुर आने की भनक लगते ही सबसे ज्यादा शामत पत्रकारों की आई। वेउनकी बाइट और उनकी फोटो लेने के लिए इधर-उधर फोन करते रहे तथा होटल व एयरपोर्ट के बाहर धूप में घूमते रहे, लेकिन कोई भी ओवैसी से नहीं मिल सका और ना ही उनकी कोई बाइट ले सका। शाम को जब ओवैसी वापस एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां जमा पत्रकारों ने उनसे सवाल करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और तेजी से एयरपोर्ट के अंदर घुस गए। उनके इस रवैये से पत्रकारों में भी बड़ी मायूसी हुई कि एक राजनेता के लिए हम पिछले 6 घंटे से जयपुर की सड़कों पर भटक रहे हैं और सिर्फ उनसे बात करना चाहते हैं, पूछना चाहते हैं कि वह जयपुर क्यों आए थे और उनका दौरा इतना खुफिया क्यों था ? क्या यह दौरा सियासी था या यह दौरा निजी था ? लेकिन ओवैसी ने इन सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया।
ओवैसी के इस खुफिया दौरे से जयपुर के मुस्लिम रहनुमाओं को भी बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ रहनुमा जो यह सोच रहे हैं कि ओवैसी के राजस्थान के सियासी मैदान में उतरने से हमारी तकदीर बदल जाएगी, उनमें से कुछ गुलदस्ते लिए होटल व एयरपोर्ट के आगे बस इस इन्तजार में खड़े थे कि एक झलक ओवैसी की मिल जाए और वे हम से सलाम दुआ कर गुलदस्ता ले लें, लेकिन ऐसे सभी रहनुमाओं को भी निराशा हाथ लगी।
ओवैसी के बारे में सियासी गलियारों में यह चर्चा बरसों से आम है कि वे कोई भी कदम उठाने से पहले खुफिया मीटिंग करते हैं। लेकिन उनकी खुफिया मीटिंग्स का कभी पता नहीं चल पाता है, यह पहली बार है कि राजस्थान में उनकी खुफिया मीटिंग का सबको पता चल गया। सियासी जानकारों का यह भी मानना है कि ओवैसी किसी "एजेन्डा विशेष" के लिए काम करते हैं और उसके लिए जो भी रणनीति बनाई जाती है, उसे वे खुद बनाते हैं और उसे पूरी तरह से गोपनीय रखते हैं।
ओवैसी का जयपुर दौरा निजी हो या सियासी। यह बात कोई मायने नहीं रखती है। क्योंकि वे एक सियासतदां हैं और सियासतदां के निजी दौरे का भी सियासी मैसेज होता है। इस दौरे के पीछे दो बड़ी बातों का सियासी पण्डित कयास लगा रहे हैं। एक यह है कि जिस तरह कुछ महीनों पहले खबर आई थी कि वे अचानक लखनऊ गए थे मायावती से मिलने के लिए, लेकिन मायावती ने एनवक्त पर उनसे मिलने के लिए मना कर दिया था और वे सिर्फ ओम प्रकाश राजभर से मिलकर वापस चले गए। इसी प्रकार वे राजस्थान में भी किसी बड़े नेता से मिलने आए थे, लेकिन उनसे उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। दूसरी बात यह है कि उनके बारे में जिस एजेन्डा विशेष की बात की जाती है, उसके लिए यह मीटिंग रखी गई थी।
बहरहाल ओवैसी एक राजनेता हैं और उनको खुफिया या खुलेआम दौरे करने का हक है। वे जब चाहें किसी से मिलें और जब चाहें किसी से नहीं मिलें। वे चाहें जिस पार्टी से गठबंधन करें और चाहें जिस पार्टी की खटिया पलटी करें। लेकिन एक बेबाक, सभ्य, स्पष्टवादी और इंटेलेक्चुअल राजनेता का यूं अचानक आना और मीडिया के सामने मुंह भी नहीं खोलना सन्देह पैदा करता है कि आखिर ऐसी क्या बात थी, जिसे उन्होंने पूरी तरह से गोपनीय रखा ? इस सवाल का जवाब ओवैसी या उनके किसी अधिकृत प्रवक्ता को देना चाहिए, ताकि सन्देह के सवाल अधिक विस्तारित नहीं हों।
(05-09-2021)
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