स्वयं को गांधी का अनुयायी कहने वाले मुख्यमंत्री गहलोत के राज में गांधीवादियों के साथ हो रहा है घौर अन्याय
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राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं और गहलोत अपने आपको गांधी का अनुयायी कहते हैं। लेकिन विचित्र स्थिति यह है कि राजस्थान में गहलोत सरकार में गांधीवादियों के साथ घौर अन्याय हो रहा है। सत्य तो यह है कि गांधीवादियों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की भी मुख्यमंत्री गहलोत को फुरसत नहीं है।
राजस्थान में आजादी से पहले ही गांधी जी का बड़ा प्रभाव रहा है और गांधी के अनुयायी विभिन्न संगठनों/संस्थाओं के माध्यम से जनहित का काम करते रहे हैं और गांधी के विचारों को जनता के बीच फैलाते रहे हैं। राजस्थान में समग्र सेवा संघ गांधीवादियों का सिरमौर संगठन है। इस संगठन की स्थापना 1953 में हुई थी और इस संगठन ने 15 मार्च 1959 को जयपुर के दुर्गापुरा क्षेत्र के चैनपुरा गांव में पौने दस बीघा भूमि खरीदी थी, जिसका शिलान्यास 1960 में विख्यात गांधीवादी जय प्रकाश नारायण जी (जेपी) ने किया था।
इस भूमि पर विख्यात गांधीवादी विचारक व राजनेता गोकुल भाई भट्ट साहब के सानिध्य में एक भवन परिसर बनाया गया था। लेकिन 20 वर्ष पहले गहलोत के प्रथम कार्यकाल के दौरान गांधीवादियों से यह भवन परिसर सरकार ने छीन लिया था। गहलोत सरकार द्वारा समग्र सेवा संघ से उसकी खरीदी हुई जमीन हड़पने की जो कार्रवाई 2001 में प्रारम्भ हुई उसको वसुंधरा राजे की भाजपा सरकार ने अन्जाम तक पहुंचाते हुए रातों रात सात साल पहले इसे सीज कर अवैध कब्ज़ा कर लिया था।
गोकुल भाई भट्ट न केवल महात्मा गांधी के निकटस्थ समर्पित साथी थे, बल्कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी थे। अशोक गहलोत ने वसुंधरा राजे की सीज कार्रवाई को अवैध बताते हुए उसकी निन्दा की थी तथा समग्र सेवा संघ को भूमि दिलवाने के हर सम्भव प्रयास करने का वादा किया था। पौने तीन साल पहले गहलोत जब तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बन गए तो उनसे मिलने पहुंचे गांधीवादियों से वादा किया था कि मेरी सरकार का पहला काम समग्र सेवा संघ की भूमि लौटाने का ही होगा। लेकिन आज तक यह भूमि नहीं लौटाई गई है।
गहलोत सरकार ने ही इस भूमि को हवाई अड्डा विस्तार योजना के लिए अवाप्त बताकर सरकार की भूमि घोषित कर दिया था, जबकि जिस अवाप्ति नोटिफिकेशन के जरिए हवाई अड्डे के लिए सम्पत्तियां अधिग्रहित करना बताया था उसमें से वास्तव में एक इंच जमीन भी किसी सम्पत्ति स्वामी से अधिग्रहित नहीं की गई। जबकि दुर्गापुरा स्थित समग्र सेवा संघ की यह जमीन हवाई अड्डे से बहुत दूर है तथा इस भूमि व हवाई अड्डे के बीच जो भी सम्पत्तियां हैं, वे अधिग्रहित किए बगैर इस भूमि को लेना जो दर्शाया गया है, वह केवल गहलोत सरकार का दुराग्रहपूर्ण रवैया है। यह सब चन्द प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए षड्यंत्रपूर्वक किया जा रहा है।
समग्र सेवा संघ की इस जमीन के पड़ौस में ही एक कृषि सहकारी समिति ने भी जमीन ले रखी है, जिसने अपनी जमीन के साथ ही समग्र सेवा संघ की जमीन में से भी प्लाॅट काट दिए तथा जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने भी प्रभावशाली लोगों की मदद के लिए गैर कानूनी पट्टे जारी कर दिए। जबकि उक्त कृषि सहकारी समिति न तो गृह निर्माण समिति के रूप में पंजीकृत है और ना ही उसके नाम से पट्टे जारी किए जा सकते हैं। जेडीए ने यह पट्टे जारी करने की गैर कानूनी कार्रवाई भी तथाकथित कृषि सहकारी समिति तथा प्लाॅट प्राप्त करने वाले ताकतवर लोगों की मदद करने के लिए एक षड्यंत्र के रूप में की है।
अशोक गहलोत सरकार ने एक और कमाल किया और वह यह है कि समग्र सेवा संघ द्वारा प्रार्थना पत्र दिए बगैर समग्र सेवा संघ की खरीदी हुई जमीन का समग्र सेवा संघ के नाम से ही आवंटन कर डाला तथा बाद में उस आवंटन को रद्द भी कर दिया। इस प्रकार तथाकथित गांधीवादी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान के असली गांधीवादियों की संस्था समग्र सेवा संघ को अन्याय का शिकार बनाया। समग्र सेवा संघ वह अग्रणी संस्था है, जिसने विनोबा भावे से प्रेरित होकर भूदान व ग्राम दान आन्दोलन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। इसने छह लाख बीघा से अधिक भूमि भू स्वामियों से लेकर इसे भूमिहीनों में वितरित की है। साथ ही 315 ग्रामदानी गांवों का गठन कर गांधी जी की ग्राम स्वराज की अवधारणा की दिशा में सशक्त काम किया है। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने देश में आदर्श ग्राम व्यवस्था बनाने का सपना देखा था, इसके लिए समग्र सेवा संघ ने राजस्थान में संचालित ग्रामदानी गांवों में से एक गांव कबीर बस्ती (जैसलमेर) और सुन्दरा (उदयपुर) का चयन किया। इन्हें देखकर राजीव गांधी ने कहा था पूरे देश में ऐसे ही गांव बनाए जाएं।
राजस्थान समग्र सेवा संघ की शराबबन्दी आन्दोलन, छूआछूत मुक्ति, साम्प्रदायिक सद्भाव, खादी ग्रामोद्योग, गो सेवा, महिला उत्थान तथा दलित, आदिवासी, किसान व अल्पसंख्यकों की समस्याओं के समाधान हेतु लगातार आन्दोलन करने में मुख्य भूमिका रही है। यह सभी आन्दोलन और इन आन्दोलनों के लिए कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर व सम्मेलन उक्त परिसर में ही होते थे। यहीं गोकुल भाई भट्ट की समाधि भी है, जो आज ताले बन्द है।
आजादी के आन्दोलन में जेल जाने वाले और देश व जनता के लिए लगातार लोकतांत्रिक व शान्तिपूर्वक तरीके से जद्दोजहद करने वाले गांधीवादियों के साथ यह उस कांग्रेस के राज में अन्याय हो रहा है, जिसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनके पुत्र-पुत्री अपना सरनेम गांधी लगाते हैं। स्वयं को गांधी का अनुयायी कहने वाले मुख्यमंत्री गहलोत लगातार मांग के बावजूद यह भूमि व भवन परिसर गांधीवादियों को नहीं लौटा रहे हैं।
अब राज्य के गांधीवादी मुख्यमंत्री गहलोत से आर पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प एक सप्ताह पूर्व स्वामी कुमारानन्द भवन में बैठक कर ले चुके हैं। अब इस आन्दोलन में राज्यभर के समाजवादी, वामपंथी, अम्बेडकरवादी संगठनों के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दल, जन संगठन एवं स्वयं सेवी संगठन संघर्ष के मैदान में उतर रहे हैं। आगामी दो अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर सरकारी कार्यक्रमों का पूर्ण बहिष्कार करने का निश्चय भी कर चुके हैं। गांधीवादियों ने किसी भी सरकारी कार्यक्रम से अलग रहने के साथ ही सरकारी कमेटियों से भी असहयोग करने का निर्णय ले लिया है। गांधी जयंती के अवसर पर ही सरकार से आर पार की लड़ाई का आगाज़ हो जाएगा। उक्त बैठक दलित नेता प्यारेलाल सकून की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। जिसमें राज्य के अग्रणी नेताओं ने भाग लिया था।
(05 सितम्बर 2021)
आपका साथी
अर्जून देथा
प्रदेशाध्यक्ष जनता दल सेक्यूलर
एवं संयोजक राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा


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