जी खान साहब को यौम ए वफ़ात पर पेश की खिराज ए अकीदत, कई जगह आयोजित हुए कार्यक्रम

जी खान साहब को यौम ए वफ़ात पर पेश की खिराज ए अकीदत, कई जगह आयोजित हुए कार्यक्रम
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व संयोजक जी ख़ान साहब को पहले यौम ए वफ़ात पर उनके चाहने वालों ने याद कर खिराज ए अकीदत पेश की। पिछले साल एक सितम्बर को वे इस दुनिया से रुख़सत हो गए थे। एक सितम्बर बुधवार को पहले यौम ए वफ़ात पर उनको याद करने के लिए कई जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिनमें जयपुर, चूरू, ददरेवा, झुन्झुनूं, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, पिलानी आदि प्रमुख हैं।


जयपुर स्थित कायमखानी गेस्ट हाउस में उनके चाहने वालों ने एक दुआ ए मग्फिरत का कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें फातिहाख्वानी के बाद उनको याद करते हुए खिराज ए अकीदत पेश की गई। इस कार्यक्रम को एडवोकेट यूनुस खान मोयल, इस्लाम खान डीवायएसपी, जाकिर झुन्झुनूवाला, उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी, रोल सहाबसर के पूर्व सरपंच एजाज खान, जी ख़ान साहब के बड़े साहबजादे असलम खान एडिशनल कमिश्नर सेल टैक्स और इक़रा पत्रिका के सम्पादक एम फ़ारूक़ ख़ान ने सम्बोधित कर जी ख़ान साहब को बड़े ही अदबो एहतराम के साथ याद किया।

कार्यक्रम में यासीन ख़ान जालूपुरा, अमजद ख़ान कसनाऊ, याकूब ख़ान हसनपुरा, इस्लाम ख़ान फतेहपुर, खुर्शीद ख़ान रतनगढ़, उप पुलिस अधीक्षक जुल्फिकार अली, प्रोफेसर अनवार ख़ान, एडवोकेट सरवर ख़ान, रिटायर्ड आरएएस फतेह मोहम्मद खान, सलीम ख़ान हसनपुरा, शरीफ़ ख़ान जालूपुरा, सलीम ख़ान, एडवोकेट एजाज नबी ख़ान आदि शरीक हुए।

राजस्थान कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा जिला यूनिट ने जिलाध्यक्ष सांवत ख़ान (पूर्व सरपंच) की सरपरस्ती में बेसकलाई गांव में जी ख़ान साहब को याद कर उनके लिए क़ुरआनख्वानी व दुआ ए मग्फिरत की। महासभा के प्रदेश सेक्रेटरी मोहम्मद खान ने चित्तौड़गढ़ के चन्देरिया स्थित सांवलिया विकलांग समिति में कम्बल व अन्य सामग्री का जी ख़ान साहब की याद में वितरण करवाया। साथ ही उन्होंने कपासन स्थित मशहूर सूफ़ी सन्त दीवाना शाह बाबा के दरबार में जी ख़ान साहब की दुआ ए मग्फिरत के लिए लंगर तकसीम करवाया।

नवाब कायम ख़ान शहीद स्मारक ददरेवा (जिला चूरू) और चूरू शहर में भी जी ख़ान साहब की याद में कार्यक्रम आयोजित कर उनको खिराज ए अकीदत पेश की गई। ददरेवा में सिद्दीक खां मोडावासी और आसपास के लोगों ने कार्यक्रम आयोजित किया। चूरू कार्यक्रम में मुंशी खां जिलाध्यक्ष राजस्थान कायमखानी महासभा चूरू, तहसील अध्य्क्ष सत्तार ख़ान, सलेमुद्दीन खां मास्टर, महमूद खां, आरिफ खां बीनासर, आसिफ खां विज़न, मुफ़्ती अब्बास साहब, हाजी सादुले खां आदि गणमान्य लोग शरीक हुए।

बीकानेर के मदरसे में राजस्थान कायमखानी महासभा बीकानेर ने कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें फातिहाख्वानी कर जी ख़ान साहब को याद किया गया। इसी तरह झुन्झुनूं कायमखानी हाॅस्टल में भी एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें जी ख़ान साहब को खिराज ए अकीदत पेश करते हुए उनकी क़ौमी खिदमत को याद किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान कायमखानी महासभा झुन्झुनूं के जिलाध्यक्ष उम्मेद खान गिडानिया, असगर खान पहाड़ियान, सज्जाद ख़ान मलवाण, मुमताज़ खान मलवाण, इदरीस खान, शाहबाज़ खान और हाॅस्टल के छात्र शरीक हुए। झुन्झुनूं में रहमानिया एकेडमी स्कूल और मदरसा अनवारुल उलूम में भी जी ख़ान साहब की याद में कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इनके अलावा हनुमानगढ, भादरा, सरदारशहर और पिलानी में भी जी ख़ान साहब को खिराज ए अकीदत पेश की गई। हनुमानगढ में राजस्थान कायमखानी महासभा ने मगरिब के वक्त दुआ ए मग्फिरत का कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें महासभा के जिला संयोजक एडवोकेट जाकिर हुसैन, इस्हाक खान दायमखानी, इश्तियाक खान, यूनुस खान, ताज मोहम्मद खान, समीर खान, इमरान खान आदि शरीक हुए। पिलानी में राजस्थान कायमखानी महासभा के संयोजक कर्नल शौकत अली ख़ान ने दुआ ए मग्फिरत का कार्यक्रम आयोजित किया।

जी खान साहब सुजानगढ़ के मूल निवासी थे और उनकी पूरी जिन्दगी एक जद्दोजहद रही है। वे लाजवाब शख्सियत के धनी थे। वे तत्कालीन केन्द्रीय गृहमंत्री सरदार बूटा सिंह के खासमखास थे, क्योंकि बूटा सिंह जी जालोर से सांसद थे और जी ख़ान साहब वहां एडीएम डेवलपमेंट थे। वे राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी रहे हैं। रजिस्ट्रार ऑफिस के इस रिटायर्ड अधिकारी ने रिटायर होने के बाद अपनी पूरी जिन्दगी क़ौमी खिदमत के लिए वक्फ कर दी थी।

राजस्थान कायमखानी महासभा के लिए 2002 से लेकर 2010 तक का युग एक स्वर्णिम युग रहा है। इस दौरान महासभा के संयोजक जी ख़ान साहब के नेतृत्व, टीम वर्क, कठोर परिश्रम और योग्यता के कारण जयपुर में कायमखानी गेस्ट हाउस और क़ौम के प्रथम पुरूष नवाब कायम ख़ान साहब की जन्म स्थली ददरेवा (जिला चूरू) में "नवाब कायम ख़ान मेमोरियल शहीद स्मारक" बना। जी ख़ान साहब की कायमखानी क़ौम को ओबीसी आरक्षण दिलवाने में भी विशेष भूमिका रही है।

वे एक मिलनसार, सबको साथ लेकर चलने वाले, हर कड़वी बात को हंसकर टाल देने वाले, समर्पित भावना से काम करने वाले, हर छोटे बड़े शख्स को सम्मान के साथ याद करने और उसे पूरी तवज्जोह देने वाली बेमिसाल शख्सियत के धनी थे। सच तो यह है कि आज कायमखानी क़ौम में उनका कोई बदल नहीं है, यानी एक साल बाद भी कोई दूसरा जी ख़ान नज़र नहीं आ रहा है।
(01-09-2021)
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-@-एम फ़ारूक़ ख़ान सम्पादक इक़रा पत्रिका।

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