वल्लभनगर और धरियावद उप चुनाव
वल्लभनगर और धरियावद उप चुनाव
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कांग्रेस व सीएम गहलोत की नहीं स्थानीय समीकरणों और सियासी खुन्नस की जीत हुई है !
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कांग्रेस व सीएम गहलोत की नहीं स्थानीय समीकरणों और सियासी खुन्नस की जीत हुई है !
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 02 नवम्बर को राजस्थान में दो विधानसभा सीटों पर हुए उप चुनाव का परिणाम आया। दोनों सीटों वल्लभनगर और धरियावद पर कांग्रेस की जीत हुई तथा भाजपा की शर्मनाक हार हुई। वल्लभनगर में भाजपा की जमानत भी ज़ब्त हो गई और वो चौथे नम्बर पर रही। धरियावद में भाजपा तीसरे नम्बर पर रही। इस चुनाव की विशेष बात यह रही कि दोनों सीटों पर तीसरी ताक़त के उम्मीदवार दूसरे नम्बर पर रहे। वल्लभनगर में आरएलपी उम्मीदवार उदयलाल डांगी दूसरे नम्बर पर रहे और धरियावद में बीटीपी के बागी व आदिवासी परिवार समर्थित थावरचन्द दूसरे नम्बर पर रहे।
इस चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के गहलोत खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। गहलोत समर्थकों ने दोनों सीटों पर जीत का श्रेय मुख्यमंत्री गहलोत को दिया और उनकी बड़ी छवि निर्मित करने की कोशिश की कि गहलोत का जादू चल गया और भाजपा को चारों खाने चित्त करते हुए उन्होंने उसकी ज़मानत भी एक सीट पर ज़ब्त करवा दी। लेकिन हकीकत यह नहीं है। दिखने में यह जरूर कांग्रेस पार्टी व मुख्यमंत्री गहलोत की जीत है। परन्तु धरातल की सच्चाई यह है कि इन दोनों सीटों पर स्थानीय समीकरणों और सियासी खुन्नस की जीत हुई है।
यह सच है कि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी से जनता भाजपा के खिलाफ़ हो रही है, अब साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का मुद्दा भी कमजोर पड़ता जा रहा है, जो भाजपा को जीताने में सहायक होता है। परन्तु भाजपा की इतनी शर्मनाक हार इन मुद्दों से नहीं हुई है। भाजपा की शर्मनाक हार के पीछे प्रमुख कारण भाजपा ही भाजपा को इन दोनों सीटों पर हरवा रही थी, रहा है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इन दोनों सीटों पर तीसरी ताक़त के उम्मीदवार चुनाव जीतने के नजदीक पहुंच चुके थे, जब कांग्रेस व भाजपा के चुनावी पण्डितों को इसकी भनक लगी, तो तीसरी ताकतों को रोकने के लिए एनवक्त पर वोटों का समीकरण कांग्रेस की तरफ मोड़ दिया, ताकि मेवाड़ क्षेत्र में तीसरी ताक़त मजबूत नहीं हो। खबर यह भी है कि यहाँ भाजपा की इतनी बुरी गत करवाने के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खेमे का भी हाथ है, उन्होंने अन्दरखाने हाथ से हाथ मिला लिया और कांग्रेस को चुनाव जीता दिया।
(10-11-2021)
-@-एम फ़ारूक़ ख़ान सम्पादक इक़रा पत्रिका।
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