ढाढी-मिरासी समुदाय को एमबीसी आरक्षण देने का मामला
ढाढी-मिरासी समुदाय को एमबीसी आरक्षण देने का मामला
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राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया दिशा निर्देश
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। गाने बजाने की पारम्परिक कलाकार क़ौम ढाढी-मिरासी जो कि राजस्थान के बहुत से गांव कस्बों में आबाद है तथा यह बहुत ही पिछड़ा समुदाय है। धरातल की सच्चाई यह है कि शिक्षा, रोजगार, खेती और कारोबार की दृष्टि से यह समुदाय प्रदेश का सबसे पिछड़ा समुदाय है, इसके बावजूद इस समुदाय को अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) में शामिल नहीं किया गया है। विचित्र बात यह है कि जिन जातीय वर्गों को एमबीसी में शामिल किया गया है, उनके यहाँ शादी ब्याह के मौके पर इस समुदाय से जुड़े लोग गाना बजाना करते हैं और उनसे कुछ नेग-इनाम पाकर अपना पेट पालते हैं, इसके बावजूद ढाढी-मिरासी समुदाय को राजस्थान सरकार ने एमबीसी में शामिल नहीं किया है, जो इस समुदाय के साथ घौर अन्याय है।
इसी मुद्दे से जुडे़ मामले में राजकुमार मिरासी ने एक पीआईएल राजस्थान हाईकोर्ट में लगाई थी। जिस पर गत दिनों हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता इस संबंध में प्रतिवेदन पेश करता है तो उसका चार महीने में निरस्तारण किया जाए। राजकुमार मिरासी की इस जनहित याचिका पर जस्टिस एमएम श्रीवास्तव और जस्टिस फरजन्द अली की खंडपीट ने यह आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि एमबीसी में जातियों को शामिल करने का काम सरकार का है, कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता है। फिर भी इस मुद्दे को अनंतकाल तक लम्बित नहीं रख सकते, इसलिए राज्य सरकार प्रार्थी के प्रतिवेदन पर विचार कर फैसला करे।
इस मामले की पैरवी एडवोकेट नीलू शर्मा द्वारा की गई थी। वर्तमान में ढाढी-मिरासी समुदाय की सभी जातियों को ओबीसी में आरक्षण का लाभ मिल रहा है। लेकिन यह एमबीसी आरक्षण की मांग कर रहे हैं। ढाढी-मिरासी समुदाय की 10 जातियों में मुस्लिम मिरासी, मांगणियार, ढाढी, लंगा, दमामी, मीर, नगारची, राणा, बायती और बारोट हैं। समुदाय के लोगों के अनुसार दो साल पहले इन जातियों की सामाजिक, शैक्षणिक, व्यवसायिक और आर्थिक वस्तुस्थिति जानने के लिए राज्य पिछडा वर्ग आयोग ने सर्वे की कार्रवाई को शुरू किया था, लेकिन दूसरी जातियों के विरोध के कारण यह सर्वे फाइलों में ही बंद हो गया।
गहलोत सरकार हमें शीघ्रता से एमबीसी में शामिल करे : स्वरूप सिंवल
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ढाढ़ी-मिरासी समाज राजस्थान के युवा प्रदेशाध्यक्ष स्वरूप सिंवल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मांग की है कि वे हमारे समुदाय को शीघ्रता से एमबीसी आरक्षण में शामिल करें, ताकि इस अति पिछड़े वर्ग का कुछ भला हो सके। उन्होंने बताया कि हमारी राजस्थान में 5 लाख से ज्यादा आबादी है। हमारे समाज ने कई बार सरकार से गुहार लगाई है कि हमारी सभी जातियों का सर्वे करवाकर इन्हें एमबीसी आरक्षण दिया जाए, क्योंकि जिन जातियों को एमबीसी आरक्षण दिया गया है, हम उनसे भी ज्यादा पिछड़े हैं। सच्चाई तो यह है कि असल अति पिछड़े तो राजस्थान में हम ही हैं।
(19-11-2021)
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