भीलवाड़ा के कायमखानी पूरी कौम के लिए आइडियल हैं, लेकिन•••
भीलवाड़ा के कायमखानी पूरी कौम के लिए आइडियल हैं, लेकिन•••
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शौर्य, साहस, वतन परस्त व वफादार कायमखानी कौम के लिए भीलवाड़ा इलाके के कायमखानी आइडियल हैं। जिसकी वजह यह है कि जो काम इस इलाके में कायमखानी कौम ने किए हैं, वैसे काम दूसरे इलाके में नहीं हुए हैं। भीलवाड़ा इलाके में कायमखानी कौम बहुत ही कम तादाद में है, करीब 22 सौ परिवार ही पूरे भीलवाड़ा जिले में हैं। लेकिन इतनी कम तादाद होने के बावजूद भी इन्होंने कुछ ऐसे काम किए हैं, जो पूरी कायमखानी कौम के लिए फख्र की बात है।
इस इलाके में कायमखानी कौम ने जो काम किए हैं उनमें चार काम बहुत महत्वपूर्ण हैं तथा वैसे काम कायमखानी बाहुल्य सीकर, झुंझनूं, चूरू और नागौर सहित अन्य कायमखानी इलाकों में आज तक नहीं हुए हैं। जिनमें पहला सामूहिक विवाह सम्मेलन, दूसरा ओएमआर शीट पर प्रतियोगिता करवाना, तीसरा इस इलाके यानी भीलवाड़ा हाईवे से कोई भी कायमखानी अधिकारी, राजनेता और समाज सेवक गुजरता है तो उसका वहां की कौम हाईवे पर इस्तकबाल करती है और चौथा जब भी इस इलाके का कोई कायमखानी कर्मचारी-अधिकारी रिटायर्ड होता है, तो उसके घर जाकर कौम के जिम्मेदार सरदार उसका सम्मान करते हैं। ऐसे चार प्रोग्राम किसी भी कायमखानी इलाके में नहीं होते हैं।
यह चारों प्रोग्राम कायमखानी कौम के लिए फख्र की बात हैं। इन प्रोग्रामों के अलावा भी भीलवाड़ा इलाके के कायमखानी वक्त-वक्त पर प्रतिभा सम्मान समारोह, नवाब कायम खान डे पर गौशालाओं एवं अस्पतालों में कार्यक्रम, ब्लड डोनेशन कैंप आदि भी आयोजित करते रहते हैं। यह सब आयोजन इसलिए हो पाते हैं कि यहां के कायमखानी सरदार जागरूक हैं, उनमें कौमी हमदर्दी है, वे किसी भी प्रोग्राम को तय करते हैं तो उसे सफल बनाने के लिए अपना तन, मन, धन सब कुछ झोंक देते हैं। यहां के कायमखानी सरदारों की इसी सोच की वजह से दूसरी कौमों में भी कायमखानी कौम की बहुत इज्जत है। दूसरी कौमों के लोग भी अपने आयोजनों में यहाँ के कायमखानी सरदारों को आमंत्रित करते हैं।
आपको यह जानकर बहुत खुशी होगी कि भीलवाड़ा का इलाका कायमखानी कौम में ऐसा है, जहां कुछ गांवों में ऐसे कायमखानी सरपंच रहे हैं या आज भी हैं, जहां कायमखानी वोट न के बराबर हैं। यानी एक ही कायमखानी परिवार होते हुए भी वो अपनी ग्राम पंचायत का बरसों बरस सरपंच रहा है। ऐसा वाकिया आपको अन्य कायमखानी बाहुल्य इलाकों में कहीं नहीं मिलेगा। यहां के कायमखानी सरदारों का यह भरोसा पूरी कौम के लिए फख्र की बात है, लेकिन पिछले कुछ अर्से से यहां भी छोटे-मोटे इख्तिलाफ और सियासी खींचतान से बहुत नुकसान हुआ है और हो रहा है तथा आज कौम एक दोराहे की तरफ बढ़ रही है, जो शुभ संकेत नहीं है।
भीलवाड़ा इलाके में कायमखानी सामूहिक विवाह सम्मेलन की शुरुआत मरहूम इस्लाम खां प्रधान जी और उनकी टीम ने पूरी कौम के सहयोग से की थी। प्रधान जी ने अपने नेतृत्व और टीम वर्क से 7 सामूहिक विवाह सम्मेलनों का सफल आयोजन किया। जो 2 साल के अंतराल पर आयोजित होते थे तथा इन सम्मेलनों के जरिए बड़ी संख्या में कौम की बच्चियों की शादियां हुई। वर्ष 2017 में 7वां सम्मेलन तो ऐतिहासिक रहा, जो शाहपुरा (भीलवाड़ा) के मनिहार कॉटेज रिसॉर्ट में आयोजित हुआ। जिसका आयोजन और भव्यता लाजवाब थी। जो लोग उस सम्मेलन में गए हैं, उनके दिमाग में उसकी यादें आज भी ताजा हैं।
वर्ष 2019 में यहां कुछ इख्तिलाफ शुरू हुआ और एक ही साल में दो सामूहिक सम्मेलन आयोजित हुए। जिससे कौम में विभाजन की लकीर साफ नजर आई और जाहिर सी बात है दो सम्मेलनों से खर्च भी बढ़ गया। इस बीच 2020 में कोरोना महामारी शुरू हो गई और साथ ही कौम की बदकिस्मती है कि गत वर्ष 24 सितंबर 2020 को प्रधान जी इस्लाम खां का इंतकाल हो गया। इसलिए सामूहिक विवाह सम्मेलन का काम एक तरह से रुक गया।
पिछले दिनों कौम के होनहार युवा इमरान कायमखानी साहब ने विवाह सम्मेलन करवाने के लिए कौम के फिक्रमंद सरदारों से संपर्क किया और सभी की सहमति से एक टीम बनाई तथा 27 फरवरी 2022 को दसवां कायमखानी सामूहिक विवाह सम्मेलन करने की घोषणा की। जिससे पूरी कौम में खुशी की लहर है। इमरान कायमखानी साहब राजस्थान कायमखानी महासभा की भीलवाड़ा जिला इकाई के करीब 10 वर्ष युवा अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में वे भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के भीलवाड़ा जिलाध्यक्ष भी हैं। इनकी टीम पूरे इलाके में दौरे कर रही है और दिलो जान से इस विवाह सम्मेलन को कामयाब बनाने के लिए जुटी हुई है, जो हमारी कौम के लिए फख्र की बात है।
इस इलाके के फिक्रमंद सरदारों को कौम के बिखराव को रोकने और सामूहिक विवाह सम्मेलन एक ही करने तथा हर किस्म के आयोजन पूर्व की भांति एक साथ एक जाजम पर बैठकर करने चाहिए, ताकि आप जिस तरह से पूरी कायमखानी क़ौम के लिए आइडियल बने हुए हो, वो चीज़ बाकी रहे और पूरी कौम भीलवाड़ा के कायमखानियों पर फख्र महसूस करे। भीलवाड़ा के कायमखानी पूरी क़ौम के लिए एक मिसाल हैं, इसलिए छोटी मोटी बातों को लेकर आप इस मिसाल को नहीं टूटने दें। बड़े दिल, एक दूसरे के आदर सम्मान और एकजुटता से बड़े आयोजन खूबसूरत होते हैं, वरना तो अपनी अपनी ढपली तो कोई भी बजा सकता है !!
(25-12-2021)
-@-एम फ़ारूक़ ख़ान आजीवन सदस्य
राजस्थान कायमखानी महासभा एवं
सम्पादक इक़रा पत्रिका, जयपुर।
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