कोरोना की तीसरी लहर बनाम राजनीतिक रैलियां
कोरोना की तीसरी लहर बनाम राजनीतिक रैलियां
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका) कोरोना बहुत खतरनाक महामारी है और इससे पूरी दुनिया में लाखों लोग मर चुके हैं। पिछले दो साल में इसने पूरी दुनिया को बदल दिया है। चिकित्सा व्यवस्था के साथ ही इसने अर्थव्यवस्था व शिक्षा व्यवस्था को भी चौपट कर दिया है। एक्सपर्ट के मुताबिक दो गज की दूरी और मास्क ही इसके बचाव का सबसे बड़ा जरिया है। इसीलिए कोरोना से बचाव के लिए लम्बे समय तक लाॅकडाउन लगाया गया। कुछ देशों में आज भी लाॅकडाउन लगा हुआ है। लेकिन हमारे देश में राजनेताओं व अधिकारियों की लापरवाही से लाॅकडाउन पूरी तरह से फ़ेल हुआ और पहली व दूसरी लहर ने देश में कोरोना का ताण्डव मचा दिया।
2020 की शुरुआत में जब कोरोना ने देश में पांव पसारे तब हमारे यहाँ दिल्ली में चुनाव चल रहे थे और बड़ी संख्या में चुनावी सभाओं का आयोजन हुआ। फिर अप्रैल मई 2021 में दूसरी लहर आई, तो राजस्थान में उप चुनाव, यूपी में पंचायती राज चुनाव और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव चल रहे थे। नेताओं की बड़ी बड़ी सभाओं व रैलियों की वजह से कोरोना का खूब फैलाव हुआ तथा इसका दर्दनाक परिणाम यह रहा कि असंख्य लोग ऑक्सीजन की कमी के चलते दर दर ठोकरें खाते रहे और काफी संख्या में लोग मारे गए। अन्तिम संस्कार के लिए कतारें लग गई और गंगा व यमुना नदियों में काफी संख्या में लाशें तैरती हुई मिली, यानी उनको बिना अन्तिम संस्कार किए नदियों में फेंक दिया गया। इसका कारण जो भी रहा हो।
अब देश में तीसरी लहर का खतरा मण्डरा रहा है। कोरोना वापस फैल रहा है। लेकिन राजनीतिक रैलियां और लापरवाही के आयोजन धड़ल्ले से हो रहे हैं तथा यह सब राजनेताओं व अधिकारियों की लापरवाही एवं लालच से हो रहे हैं। राजनेताओं को वोट चाहिए, सत्ता चाहिए चाहे जनता भाड़ में जाए। अधिकारियों की इतनी हिम्मत नहीं है कि वे कोरोना गाइडलाइन की पालना में नेताओं की रैलियों को रोक दें या आयोजकों के खिलाफ़ कठोर कार्रवाई करें, क्योंकि उन्हें भी ट्रांसफर पोस्टिंग का लालच और नेताओं की चम्मचागिरी पसंद है। यही कारण है कि देश में तीसरी लहर के मण्डराते खतरे के बावजूद बड़ी बड़ी राजनीतिक रैलियां आयोजित हो रही हैं। आबादी के लिहाज से सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में तो रोज बड़ी बड़ी चुनावी सभाएं व रैलियां हो रही हैं, क्योंकि दो महीने बाद वहां विधानसभा चुनाव हैं।
जहाँ तक बात राजस्थान की है, तो यहाँ कोरोना के चलते डूंगरपुर की एक काॅलोनी में गत दिनों सम्पूर्ण लाॅकडाउन (कर्फ्यू) लगाया गया और अगले दिन राजधानी जयपुर में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विशाल रैली (रोड शो) का आयोजन किया। जिसमें हजारों लोगों की भीड़ जमा हुई। दो गज दूरी तो दूर की बात मास्क भी बहुतों ने नहीं लगा रखा था। अब 12 दिसम्बर को जयपुर में कांग्रेस की विशाल रैली आयोजित होने जा रही है। जिनमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के आने की खबर है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उनके मन्त्री व विधायक सब कुछ छोड़ कर इस रैली को सफल बनाने में दिन रात जुटे हुए हैं। ऐसे में खुदा ना करे कोरोना की तीसरी लहर आएगी या हालात खतरनाक होंगे, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है ? जाहिर सी बात है कि इसके लिए जिम्मेदार राजनेता व अधिकारी ही हैं। जिनकी लापरवाही से देश में पहले कोरोना फैला और अब फिर फैल रहा है।
एक बात का आम आदमी को भी ध्यान रखनी चाहिए। चुनावी रैलियों में आप यूज़ क्यों होते हो ? क्यों अपनी व अपने परिजनों की जान को खतरे में डालते हो ? यह राजनेता सिर्फ भीड़ जुटाकर और अपना सियासी उल्लू सीधा करके आपको भूल जाते हैं। खुदा ना करे इन राजनीतिक रैलियों में जाने से आपको कोरोना हो गया, तो आपका व परिवार का कौन धणी होगा ? इसलिए कोरोना के इस खतरे में खुद को व अपने परिजनों को बचाइए। राजनीतिक रैलियों से पूरी तरह से दूर रहिए और मास्क लगाकर घर से बाहर निकलिए तथा अगर वैक्सीन नहीं लगवाई है, तो शीघ्रता से वैक्सीन लगवाइए।
(09-12-2021)
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