क्या कांग्रेस, बसपा, चन्द्रशेखर और ओवैसी यूपी में योगी आदित्यनाथ को पुनः मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं ?

क्या कांग्रेस, बसपा, चन्द्रशेखर और ओवैसी यूपी में योगी आदित्यनाथ को पुनः मुख्यमंत्री बनवाना चाहते हैं ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश (यूपी) जहाँ विधानसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं। सात चरणों में हो रहे इस चुनाव का पहला चरण 10 फरवरी को है और मतगणना 10 मार्च को। यहाँ सबसे अधिक 80 लोकसभा सीटें और 403 विधानसभा सीटें हैं। सियासी गलियारों में एक जुमला बोला जाता है, "दिल्ली की सत्ता का रास्ता लखनऊ होकर जाता है।" यानी जिसने उत्तर प्रदेश को फतेह कर लिया उसके लिए देश फतेह करना आसान है। यही लड़ाई इस वक्त यूपी में चल रही है। भाजपा यहाँ हर हाल में वापसी करना चाह रही है। वहीं अखिलेश यादव, जयन्त चौधरी और ओम प्रकाश राजभर का गठबंधन भाजपा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन चुका है।


यहाँ की जमीनी सच्चाई यह बयान कर रही है कि मुख्य मुकाबला यहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा गठबंधन के मुखिया अखिलेश यादव के बीच है। यानी जो योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनवाना चाहता है, वो या तो उनके समर्थन में डटकर खड़ा है या फिर वो सीधा योगी आदित्यनाथ का समर्थन करने की बजाए अखिलेश गठबंधन का विरोध कर रहा है। यहाँ के राजनीतिक विश्लेषक दो बातें कह रहे हैं, एक यह है कि मुकाबला योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच है तथा इस मुकाबले में अखिलेश मजबूत नज़र आ रहे हैं। दूसरा यह है कि सपा गठबंधन के अलावा भी कुछ बड़ी पार्टियां मैदान में हैं और योगी आदित्यनाथ विरोधी वोट उनमें बंटना तय है, ऐसे में अगर यह वोट ज्यादा बंटा तो सपा गठबंधन सत्ता से दूर रह जाएगा और योगी आदित्यनाथ पुनः मुख्यमंत्री बन जाएंगे। ऐसी पार्टियों के तौर पर राजनीतिक विश्लेषक जो नाम गिना रहे हैं, वो हैं कांग्रेस, बसपा, चन्द्रशेखर और ओवैसी आदि।

राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि कांग्रेस, बसपा, चन्द्रशेखर और ओवैसी को जो वोट मिलेंगे, वे योगी आदित्यनाथ विरोधी वोट होंगे। जाहिर सी बात है कि इससे सपा गठबंधन को नुकसान होगा। यहाँ अभी तक जो टिकट वितरण हुआ है, वो भी अध्ययन का विषय है, मुस्लिम बाहुल्य कई सीटों पर बसपा, कांग्रेस और ओवैसी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं और इनमें से कुछ सीटों पर सपा-आरएलडी गठबंधन ने भी मुस्लिम उम्मीदवार उतारे हैं। इन सीटों पर कहीं दो पार्टियों के मुस्लिम उम्मीदवार हैं, तो कहीं तीन और चार। यह सीटें हैं, मेरठ शहर, किठौर, सीवालखास, लोनी, गढमुक्तेश्वर, कोल, अलीगढ़, धौलाना, सिकन्दराबाद, सरधना, बेहट, सहारनपुर देहात, चरथावल आदि।

कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यूपी जीतना या हारना कोई बड़ी बात नहीं है, पहले भी अलग अलग पार्टियों ने यूपी जीता भी है और हारा भी है। लेकिन इस बार बात कुछ और है, भाजपा-आरएसएस नेतृत्व चाहता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में हिन्दी पट्टी का कोई बड़ा विपक्षी नेता नहीं हो, जो सभी विपक्षी पार्टियों का नेतृत्व करने की क्षमता रखता हो। अखिलेश यूपी जैसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद वो चेहरा हो सकता है। इसलिए अखिलेश गठबंधन को चुनाव हराने के लिए बहुत बारीकी से योजनाबद्ध तैयारी की जा रही है तथा इस तैयारी में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कई पार्टियां और राजनेता लगे हुए हैं।
(23-01-2022)
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