क्या 10 मार्च को देश 2 मई 2021 जैसा परिणाम देखेगा, यानी यूपी पश्चिम बंगाल की याद दिलाएगा ?

क्या 10 मार्च को देश 2 मई 2021 जैसा परिणाम देखेगा, यानी यूपी पश्चिम बंगाल की याद दिलाएगा ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों की मतगणना 10 मार्च को है। यह राज्य यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर हैं। इनमें से तीन राज्यों में मतदान हो चुका है। इनमें सबसे ख़ास यूपी यानी उत्तर प्रदेश है। जहाँ सत्ताधारी भाजपा और प्रमुख विपक्षी पार्टी सपा के गठबंधन का आमना सामना है। हालांकि मैदान में बसपा, कांग्रेस, एमआईएम जैसी कुछ पार्टियां भी हैं। लेकिन धरातल से जुड़े हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव भाजपा और सपा गठबंधन के बीच केन्द्रित हो चुका है।


2 मई 2021 को भी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की गिनती हुई थी। यह थे पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पांडिचेरी। इनमें तमिलनाडु में भाजपा को सिर्फ 4 सीटें मिली थी और केरल में खाता ही नहीं खुला था, यहाँ तक कि केरल में भाजपा के मुख्यमंत्री उम्मीदवार मेट्रोमैन ई श्रीधर भी चुनावी मैदान में रन आउट हो गए थे। असम में जरूर भाजपा रिपीट हो गई थी। इन पांच राज्यों में ख़ास था पश्चिम बंगाल। जहाँ भाजपा 200 पार के दावे कर रही थी और 77 पर ही सिमट गई। इनमें से भी कुछ विधायक चुनाव बाद भाजपा छोड़ चुके हैं और ममता बनर्जी के साथ आ गए हैं। ममता बनर्जी की टीएमसी को मतगणना के दिन 213 सीटों का ऐतिहासिक बहुमत मिला था। यहाँ कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टियों और एमआईएम का पूरी तरह से सफाया हो गया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 10 मार्च को देश 2 मई 2021 जैसे परिणाम देखेगा। यानी पश्चिम बंगाल की तरह यूपी में भी भाजपा बहुत बुरी तरह से पराजित होगी और भाजपा नेताओं के तमाम दावे बंगाल की तरह यूपी में भी हवा हवाई साबित होंगे। इनके पीछे राजनीतिक विश्लेषकों की दलील है कि ममता बनर्जी की तरह सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनके सहयोगी नेताओं ने चुनाव को मुद्दों पर केन्द्रित रखा है तथा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की भाजपाई चाल में चुनाव को नहीं फंसने दिया है। दूसरी दलील यह है कि जिस तरह से बंगाल में चुनाव मोदी समर्थन और मोदी विरोध पर केन्द्रित हुआ था, यानी वोटर दो धड़ों में बंट गए थे, मोदी विरोधी अधिकतर वोटर ममता बनर्जी के समर्थन में लामबन्द हो गए थे, उसी तरह यूपी में चुनाव योगी समर्थन और योगी विरोध पर केन्द्रित हो गया है और योगी विरोधी अधिकतर वोटर अखिलेश गठबंधन के समर्थन में लामबन्द हो गए हैं।

किसानों की नाराजगी, बढती बेरोजगारी, युवाओं में आक्रोश, कमर तोड़ महंगाई, चौपट होती शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं पर भाजपा नेता चुनाव भाषण देने की बजाए साम्प्रदायिक मुद्दों पर भाषण दे रहे हैं, ताकि वोटों का ध्रुवीकरण हो, लेकिन भाजपा नेताओं की इस भाषण शैली से किसान, मजदूर और शिक्षित प्रशिक्षित युवक युवतियां अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, जिन्होंने अच्छे दिन के वादे पर भाजपा को वोट दिया था और आज यह अपनी बदहाली पर मातम मना रहे हैं। इन वोटरों की भावना को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 10 मार्च को देश 2 मई 2021 जैसे परिणाम देखेगा।
(23-02-2022
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