जन्म दिन के बहाने वसुंधरा राजे ने किया शक्ति प्रदर्शन, लेकिन पिछली बार की तरह पार्टी नेतृत्व नहीं आएगा दबाव में
जन्म दिन के बहाने वसुंधरा राजे ने किया शक्ति प्रदर्शन, लेकिन पिछली बार की तरह पार्टी नेतृत्व नहीं आएगा दबाव में
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे ने 8 मार्च को अपना जन्म दिन बून्दी जिले के केशवरायपाटन में मनाया। यहाँ उनके समर्थन में काफी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेता जुटे। जन्म दिन के बहाने आयोजित इस शक्ति प्रदर्शन में बताया जा रहा है कि 42 भाजपा के विधायक, 11 सांसद, 3 निर्दलीय विधायक, 109 पूर्व विधायक, एक पूर्व सांसद और एक पूर्व प्रदेशाध्यक्ष शरीक हुए। देखने में यह आंकड़ा बहुत बड़ा है, क्योंकि पार्टी के अधिकतर बड़े नेता इस शक्ति प्रदर्शन में शामिल हुए तथा उन्होंने एक तरह से पार्टी नेतृत्व को सीधा संदेश दे दिया कि वसुंधरा राजे के बिना राजस्थान में पार्टी सत्ता में नहीं आ सकती।
उल्लेखनीय यह है कि वसुंधरा राजे पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं, क्योंकि नेतृत्व उन्हें लगातार नजरअंदाज कर रहा है। खबर यह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और आरएसएस नेतृत्व वसुंधरा राजे को पूरी तरह से साइड में करना चाहते हैं। यानी वसुंधरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान का चुनाव नहीं लड़ना चाहते। लेकिन खबर यह भी है कि वे वसुंधरा राजे को दूर भी नहीं करना चाहते कि वे कोई अलग पार्टी बनाकर राजस्थान से भाजपा का सफाया कर दें। इसलिए आरएसएस और भाजपा नेतृत्व यह चाहता है कि वसुंधरा राजे को साथ रखकर चुनाव लड़ा जाए और चुनाव बाद पार्टी जीत जाए तो अपनी मर्जी का मुख्यमंत्री बना दिया जाए तथा वसुंधरा राजे को दिल्ली भेज दिया जाए। लेकिन वसुंधरा राजे यह चाहती हैं कि राजस्थान का चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाए और चुनाव बाद मुख्यमंत्री भी उन्हें ही बनाया जाए।
2013 के चुनाव से पहले भी वसुंधरा राजे को साइड में कर रखा था, लेकिन वे नेतृत्व के आगे नहीं झुकी और ऐसे ही शक्ति प्रदर्शन करते हुए उन्होंने अपनी पार्टी बनाने की तैयारी शुरू कर दी। तब हार के डर से घबराकर पार्टी नेतृत्व ने चुनाव की कमान उन्हें सौंप दी और भाजपा भारी बहुमत से सत्ता में आ गई। इस बार भी वसुंधरा वही चाहती हैं, लेकिन नेतृत्व के संकेत साफ हैं कि इस बार वो वसुंधरा राजे के सामने सरेंडर नहीं होगा। खबर है कि भाजपा राजस्थान में किसी को भी मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश नहीं करेगी और चुनाव सतीष पूनियां की ही अध्यक्षता में होगा। चाहे परिणाम कुछ भी हो।
वसुंधरा राजे से पार्टी नेतृत्व नाराज़ क्यों है ? इस सवाल का जवाब यह है कि वसुंधरा राजे ने कभी भी पूरी तरह से आरएसएस के इशारों पर सत्ता को नहीं चलने दिया। अपनी मर्ज़ी से सत्ता चलाई। साथ ही उन्होंने कभी भी वोटों का साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं होने दिया तथा सभी समाजों के वोट लेकर वे सत्ता में आई। आरएसएस वसुंधरा की इसी कार्य प्रणाली से नाराज है और आरएसएस की इच्छा के बिना भाजपा में कोई कुछ कर नहीं सकता।
(09-03-2022)
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