राजस्थान कायमखानी महासभा की सदस्यता सूची को दुरूस्त करवाने और कायमखानी क़ौम की पहचान को बचाने के लिए जयपुर में आयोजित हुई इमरजेन्सी मीटिंग
राजस्थान कायमखानी महासभा की सदस्यता सूची को दुरूस्त करवाने और कायमखानी क़ौम की पहचान को बचाने के लिए जयपुर में आयोजित हुई इमरजेन्सी मीटिंग
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सर्व सम्मति से कैप्टन फजरू खां नूरखानी को बनाया सदस्यता सूची शुद्धिकरण कमेटी का अध्यक्ष और इक़रा पत्रिका के सम्पादक एम फ़ारूक़ ख़ान को बनाया सहायक
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। शौर्य, साहस और वतन परस्त कायमखानी क़ौम जिसके दो सौ से अधिक वीर सैनिक देश की रक्षा करते हुए विभिन्न युद्धों एवं सैन्य ऑपरेशनों में शहीद हुए हैं। भारत सरकार ने जिसके छह वीर सैनिकों को वीर चक्र व दो को शौर्य चक्र और कई कायमखानी सैनिकों को विभिन्न सैन्य अवार्ड से नवाजा है तथा आज सैकड़ों कायमखानी वीर जवान भारतीय सेना, अर्द्ध सैनिक बलों और पुलिस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। लेकिन अपने कुछ करमफरमाओं के राजनीतिक हथकण्डों, लापरवाही व खुदगर्जी के कारण आज कायमखानी क़ौम अपनी विरासत व पहचान को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। जिसकी वजह है राजस्थान कायमखानी महासभा के सदस्यता अभियान में फर्जीवाड़े से काफी संख्या में गैर कायमखानियों को सदस्य बनाना तथा सरकारी उदासीनता व भ्रष्टाचार से काफी संख्या में फर्जी ओबीसी प्रमाण पत्र बनना।
उल्लेखनीय है कि "राजस्थान कायमखानी महासभा" कायमखानी क़ौम की एकछत्र रजिस्टर्ड कदीमी तन्जीम (पुराना संगठन) है, जो करीब चार दशक पहले बनी थी। वर्ष 2021 के अन्तिम मरहले में राजस्थान कायमखानी महासभा के चुनाव कराने के लिए 21 सदस्यों की एक चुनाव कमेटी गठित की गई, जिसने महासभा के संयोजक कर्नल शौकत ख़ान के नेतृत्व में तीन महीने का एक सदस्यता अभियान संचालित किया। लेकिन इस सदस्यता अभियान में बार बार क़ौम के जागरूक व फिकरमन्द सरदारों के कहने के बावजूद कोई पारदर्शिता और व्यवस्थित व्यवस्था स्थापित नहीं की। और तो और सदस्यता अभियान में बड़ी संख्या गैर कायमखानियों को सदस्य भी बना दिया। इस बात पर लोग शुरू से ही ऑब्जेक्शन करते रहे तथा चुनाव कमेटी के सदस्य व संयोजक सबको आश्वासन देते रहे कि सदस्यता सूची तभी जारी की जाएगी, जब इसमें पूरी तरह से शुद्धिकरण हो जाएगा, यानी एक भी गैर कायमखानी सदस्य नहीं रहेगा। लेकिन अफसोसनाक बात यह रही कि गत दिनों जिले वाइज़ सूचियां जारी करनी शुरू कर दी, जिसमें किसी के हस्ताक्षर भी नहीं हैं और इन सूचियों में बड़ी संख्या में गैर कायमखानी सदस्य मौजूद हैं। इन सूचियों को देखते ही पूरी कायमखानी क़ौम में चुनाव कमेटी और संयोजक महोदय के खिलाफ़ रोष व्यक्त हुआ। लोगों ने अपने अपने लेवल पर क़ौम जिम्मेदार सरदारों से इधर-उधर बातें करनी शुरू की, चुनाव कमेटी और संयोजक महोदय को इस नाराज़गी और फर्जीवाड़े से आगाह किया।
इसी क्रम में 02 अप्रैल को क़ौम के कुछ जिम्मेदार सरदारों ने एक इमरजेन्सी मीटिंग काॅल की। यह मीटिंग जयपुर के झोटवाड़ा स्थित दरबार पब्लिक स्कूल में आयोजित की गई। जिसमें राजस्थान कायमखानी महासभा के सात आजीवन सदस्य और क़ौम के कुछ फिकरमन्द सरदार शरीक हुए। मीटिंग की अध्यक्षता रिटायर्ड कैप्टन रज्जाक खान पीरमोहम्मदखानी ने की। मीटिंग के बारे में महासभा के आजीवन सदस्य कैप्टन लियाकत खान धनूरी और आजीवन सदस्य इक़रा पत्रिका के सम्पादक एम फ़ारूक़ ख़ान ने विस्तार से अभी तक के सारे घटनाक्रम और महासभा का संक्षिप्त इतिहास बताया। मीटिंग को अध्यक्ष के अलावा खुर्शीद खान दिलावरखानी रतनगढ़, सूबेदार भंवरू खां इस्माईलखानी जाबासर, छोटू खां मुजाहिदखानी भादरा, इलियास खान एदलखानी रतनगढ़, राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी, मुजफ्फर ख़ान कायमसर आदि ने भी सम्बोधित किया। मीटिंग में सूबेदार एजाज खां हथियारखानी चैनपुरा, सूबेदार सत्तार ख़ान गौराण सरदारपुरा, अली हसन खान फतेहखानी, रिसालदार मोहम्मद सदीक खान नूआं, रिसालदार मेजर मोहम्मद अब्बास खान हमीदखानी झांझौत, कैप्टन फजरू खां नूरखानी हुकमपुरा, दफादार अय्यूब खान जयपुर आदि शरीक हुए।
मीटिंग में वक्ताओं ने चुनाव कमेटी की मनमानी व असंवैधानिक नियुक्ति, संयोजक की नियुक्ति और सदस्यता अभियान संचालित करने के अव्यवहारिक तरीके की जमकर आलोचना की तथा सदस्यता अभियान में फर्जीवाड़ा कर गैर कायमखानियों को महासभा का सदस्य बनाने की कड़ी निन्दा की और कहा कि चुनाव कमेटी व संयोजक महोदय सभी गलत सूचियों को वापस लेकर शीघ्रता से इन्हें पूरी तरह से दुरूस्त करें, इनमें दर्ज तमाम गैर कायमखानी सदस्यों को हटाएं। वक्ताओं ने कहा कि सदस्यता अभियान में जो फर्जीवाड़ा किया गया है, उससे प्रतीत हो रहा है कि यह एक सोची समझी साजिश के तहत किया गया है, ताकि महासभा के चुनाव एक बार फिर अटक जाएं और मामला कोर्ट-कचहरी में पहुंच जाए। अफसोस तो इस बात का है कि इतना कुछ होने के बावजूद चुनाव कमेटी और संयोजक महोदय खामोश हैं। विचित्र बात तो यह है कि चुनाव कमेटी के कुछ सदस्य सवाल उठाने वालों को ही कटघरे में खड़ा करने की घिनौनी बयानबाज़ी कर रहे हैं। यह सब दृश्य चुनाव कमेटी के कुछ सदस्यों की हठधर्मिता साबित करता है।
वक्ताओं ने कहा कि यह संयोजक महोदय और चुनाव कमेटी को अच्छी तरह से मालूम है कि कायमखानी तीन भाइयों की औलाद को कहा जाता है। कायमखानी क़ौम की उत्पत्ति हिसार-हांसी के तत्कालीन शासक एवं ददरेवा शासक मोटे राव जी चौहान के पुत्र नवाब कायम ख़ान साहब (कुंवर करमचन्द उर्फ कुंवर करम सिंह) के नाम पर हुई थी। जिन्होंने इस्लाम क़ुबूल किया था। इनके बाद इनके दो भाइयों नवाब जैनुद्दीन ख़ान साहब और नवाब जबरूद्दीन ख़ान साहब ने भी इस्लाम क़ुबूल किया था। इन्हीं तीन भाइयों की औलाद को कायमखानी कहा जाता है, जो एक ऐतिहासिक तथ्य है। वक्ताओं ने कहा कि सदस्यता अभियान के इस फर्जीवाड़े से हमारी क़ौम की पहचान, वकार व वजूद को खत्म करने का षडयंत्र हुआ है, जिसे हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। वक्ताओं ने यह भी कहा कि कायमखानी एक "वंश" है "पंथ" नहीं। और वंश में जो औलाद होती है वही वंश कहलाती है हर कोई नहीं। यह भी कहा कि इस्लामिक नुक़्ते नज़र (विचारधारा) से दूसरे कबिले/खानदान में खुद को शामिल करना यानी जाति बदलना गलत है तथा भारतीय क़ानून भी इसकी इजाज़त नहीं देता है।
मीटिंग में सर्व सम्मति से निर्णय लेकर महासभा की सदस्यता सूची को दुरूस्त करवाने की जिम्मेदारी के लिए कैप्टन फजरू खां नूरखानी (हुकुमपुरा) की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई और उनकी सहायता के लिए इक़रा पत्रिका के सम्पादक और महासभा के आजीवन सदस्य एम फ़ारूक़ ख़ान को नियुक्त किया। मीटिंग में यह तय किया गया कि चुनाव कमेटी व संयोजक महोदय को आज की इस मीटिंग के निर्णय से अवगत करवाया जाएगा कि सदस्यता सूची से समस्त गैर कायमखानी सदस्यों को शीघ्रता से हटाया जाए और कायमखानी क़ौम की पहचान व विरासत को बचाया जाए। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि बिना हस्ताक्षर की जिले वाइज़ जो भी सदस्यता सूचियां जारी की गई हैं, उन्हें फ़ौरन वापस लिया जाए तथा पूरी तरह से सूचियों का शुद्धिकरण करने के पश्चात समस्त जिलों की एक साथ संयोजक व चुनाव कमेटी सदस्यों के हस्ताक्षर की गई सूची जारी की जाए। मीटिंग में यह भी निर्णय लिया गया कि अगर चुनाव कमेटी अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ेगी और सदस्यता सूची से गैर कायमखानियों के नाम नहीं हटाएगी, तो मजबूरन हमें न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी, जिसके लिए पूरी तरह से चुनाव कमेटी व संयोजक महोदय जिम्मेदार होंगे। (03-04-2022)
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-@-एम फ़ारूक़ ख़ान सम्पादक
इक़रा पत्रिका, जयपुर।

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