शहीद भगत सिंह के नाम पर आम आदमी पार्टी के घड़ियाली आंसू , क्योंकि वे इस पार्टी की नीतियों के कट्टर विरोधी थे !
शहीद भगत सिंह के नाम पर आम आदमी पार्टी के घड़ियाली आंसू , क्योंकि वे इस पार्टी की नीतियों के कट्टर विरोधी थे !
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@अर्जुन देथा
23 मार्च शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु का शहादत दिवस देश के विभिन्न हिस्सों में उनके विचार समर्थकों एवं विचार शत्रुओं दोनों के द्वारा मनाया गया। विचार शत्रुओं ने यह दिवस ज्यादा तड़क-भड़क और पाखंड पूर्ण तरीके से मनाया उन्होंने यह सिद्ध करने का पूरा प्रयास किया कि वही भगत सिंह के सच्चे वारिस हैं, जबकि हकीकत यह है कि वे भगत सिंह के क्रांतिकारी व समाजवादी विचारों के वास्तविक शत्रु हैं। यह जगजाहिर है कि भगत सिंह सांप्रदायिकता के घोर विरोधी थे, वे समाजवाद के पक्षधर थे, सभी प्रकार के शोषण से मुक्त समानता पर आधारित, भाईचारे पर आधारित और सद्भाव पर आधारित समाज के निर्माण के पक्षधर थे।
हमारे देश में ब्राह्मणवादी धर्म सत्ता और पूंजीवादी, काॅरपोरेटवादी धन सत्ता की रक्षक एक जहरीली विचारधारा की जमात पहले से सक्रिय है। उसके कई अंग हैं, जिसमें से एक राजनीतिक अंग (भाजपा) आज केंद्र की सत्ता में सत्तासीन है, पहले भी रहा है। उसका काम देश में जहर फैलाना संप्रदायवाद को बढ़ावा देना, अल्पसंख्यकों पर हमले करना, उनके सभी प्रकार के योगदान को झुठलाना और उन्हें कदम कदम पर हर क्षण बदनाम करना प्रमुख एजेंडा है। यह देश के तमाम शोषितों, पीड़ितों, दलितों, आदिवासियों, किसानों, मजदूरों की शत्रु शक्ति है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह शोषक वर्ग की ए टीम है।
शोषक वर्ग की पक्षधर बी टीम कांग्रेस पार्टी पहले से है जिसने इस देश में पूंजीवादी, काॅरपोरेटवादी, उदारवादी, बाजारवादी अर्थनीति को लागू किया। बाद में इसे आज की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने तेज गति से आगे बढ़ाया है। यहां यह याद करना बेहद जरूरी है कि जब कांग्रेस पार्टी ने 1991 में नई आर्थिक नीतियों को अपनाया तो उस समय विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि हम मुक्त बाजार और मुक्त व्यापार, मुक्त उद्योग के हमेशा से पक्षधर रहे हैं और चूंकि कांग्रेस पार्टी हमारी अर्थ नीति को लागू कर रही है तो हम इसका विरोध कैसे कर सकते हैं ? उस समय भाजपा कांग्रेस पार्टी की अर्थनीति के पूरे पक्ष में खड़ी हो गई थी। सत्ता में आकर भाजपा ने इस अर्थनीति को तीव्र गति से देश पर थोपा, रोजगार समाप्त किए, महंगाई को बढ़ाया, पूंजीपतियों को बेतहाशा लूट का खुला रास्ता प्रदान किया। लेकिन अब पूंजीवाद, बाजारवाद और लूटतंत्र की एक और शक्ति मैदान में खड़ी है जिसका नाम आम आदमी पार्टी है।
इस पार्टी का नेता अरविंद केजरीवाल इंडियन रिवेन्यू सर्विसेज का अधिकारी रह चुका है। इस सेवा का अधिकारी रहते हुए अरविंद केजरीवाल आरएसएस परस्त अखिल भारतीय सेवाओं के संगठन विवेकानंद फाउंडेशन का सदस्य था। यह वही अरविंद केजरीवाल है जिसने अभिनव भारत नाम के संगठन के बैनर तले सन 2008 में एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण के विरुद्ध आंदोलन चलाया था। उपरोक्त विवेकानंद फाउंडेशन ने ही अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का खाका तैयार किया था, उसका प्रचार तंत्र तैयार किया था और उसे संसाधन उपलब्ध कराए थे। इसी अन्ना आंदोलन का एक सिपहसालार अरविंद केजरीवाल था और उसने इस आंदोलन की सारी मलाई को समझते हुए आम आदमी पार्टी नाम के राजनीतिक दल का गठन कर उसका आका बन बैठा, जो कि उसकी पूर्व घोषणा को खारिज कर किया गया काम था।
यही केजरीवाल राम भक्ति के मामले में भाजपा से प्रतिस्पर्धा करता है, इसने कश्मीर के भारत में विलय की भावना के अनुरूप निर्मित संविधान के अनुच्छेद 370 की समाप्ति के लिए भाजपा का सहयोग किया, जनविरोधी यूएपीए कानून बनाने में भाजपा का सहयोगी बना। कदम कदम पर यह शख्स भाजपा का बगल बच्चा साबित होता रहा, आज भी हो रहा है। राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के बाद सबसे पहले सरकारी खर्चे पर दिल्ली से रेलगाड़ियां भरकर दर्शनार्थियों का जमावड़ा कर दिया। यह वही केजरीवाल है जिसने देश के पूंजीपतियों के संगठन एसोचैम की मीटिंग में खुलेआम कहा था कि "मैं भाजपा और कांग्रेस से ज्यादा पूंजीवादी अर्थ नीति का पक्षधर हूं और आप की बेहतरी का काम ज्यादा अच्छे ढंग से कर सकता हूं, आप सभी मेरा साथ दीजिए। मैं आपको कांग्रेस और भाजपा से अधिक लाभ पहुंचाऊंगा।" यह वही अरविंद केजरीवाल है जिसकी कैबिनेट की मंत्री राखी बिड़लान ने खुलेआम घोषणा की थी कि सभी प्रकार का आरक्षण समाप्त होना चाहिए।
मशहूर कहावत है कि भेड़िया जब भी शिकार के लिए निकलता है तो भेड़ की खाल पहन कर निकलता है। भगत सिंह के विचार साथियों को नए भेड़िए को पहचानने में न देर करनी चाहिए और ना ही गफलत करनी चाहिए। पंजाब के विधानसभा चुनावों में अनपेक्षित सफलता पाकर यह कुछ ऊंची छलांग लगाने को आतुर है। पंजाब किसान राजनीति और ग्रामीण पक्षधर राजनीति का अगुवा राज्य रहा है। बलिदानी किसान आंदोलन जिसने देश के कमेरे वर्ग को जगाने और एकता बद्द करने का काम किया वह तथा पूर्ववर्ती तमाम किसान भक्तों को धूल धूसरित कर पंजाब की जनता ने इस पूंजीवादी पार्टी को क्यों मौका दिया ? इस पर अभी टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन सवाल अपनी जगह पर है कि पूरे चुनाव अभियान में जिस पार्टी ने किसान आंदोलन के सबसे बड़े मुद्दे न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र तक नहीं किया वह किसानों सहित सबके वोट लूट ले गई।
क्या अब इस देश में बेतहाशा रुपया बहाकर प्रचार का हल्का और भोंडा अभियान चलाकर ज्वलंत मुद्दों को धराशायी किया जा सकता है ? बाबा साहेब आंबेडकर, कार्ल मार्क्स, भगत सिंह और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के रास्ते पर चलने वालों के लिए रुक कर सोचने का वक्त है और सही रास्ता अपनाने का और सही रणनीति की दिशा में आगे बढ़ने का वक्त है।
पूंजीवाद की पक्षधर ए, बी, सी तीनों टीमों से मुकाबले का रास्ता तय करना जरूरी है। कुछ सख्त शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ा है इसलिए लेखनी की शालीनता के पक्षधर मित्रों से क्षमा प्रार्थना है।
(लेखक वरिष्ठ समाजवादी नेता, लोहिया के शिष्य और जनता दल सेक्यूलर के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष एवं राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चे के संयोजक हैं)
(24-03-2022)
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हमारे देश में ब्राह्मणवादी धर्म सत्ता और पूंजीवादी, काॅरपोरेटवादी धन सत्ता की रक्षक एक जहरीली विचारधारा की जमात पहले से सक्रिय है। उसके कई अंग हैं, जिसमें से एक राजनीतिक अंग (भाजपा) आज केंद्र की सत्ता में सत्तासीन है, पहले भी रहा है। उसका काम देश में जहर फैलाना संप्रदायवाद को बढ़ावा देना, अल्पसंख्यकों पर हमले करना, उनके सभी प्रकार के योगदान को झुठलाना और उन्हें कदम कदम पर हर क्षण बदनाम करना प्रमुख एजेंडा है। यह देश के तमाम शोषितों, पीड़ितों, दलितों, आदिवासियों, किसानों, मजदूरों की शत्रु शक्ति है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह शोषक वर्ग की ए टीम है।
शोषक वर्ग की पक्षधर बी टीम कांग्रेस पार्टी पहले से है जिसने इस देश में पूंजीवादी, काॅरपोरेटवादी, उदारवादी, बाजारवादी अर्थनीति को लागू किया। बाद में इसे आज की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने तेज गति से आगे बढ़ाया है। यहां यह याद करना बेहद जरूरी है कि जब कांग्रेस पार्टी ने 1991 में नई आर्थिक नीतियों को अपनाया तो उस समय विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि हम मुक्त बाजार और मुक्त व्यापार, मुक्त उद्योग के हमेशा से पक्षधर रहे हैं और चूंकि कांग्रेस पार्टी हमारी अर्थ नीति को लागू कर रही है तो हम इसका विरोध कैसे कर सकते हैं ? उस समय भाजपा कांग्रेस पार्टी की अर्थनीति के पूरे पक्ष में खड़ी हो गई थी। सत्ता में आकर भाजपा ने इस अर्थनीति को तीव्र गति से देश पर थोपा, रोजगार समाप्त किए, महंगाई को बढ़ाया, पूंजीपतियों को बेतहाशा लूट का खुला रास्ता प्रदान किया। लेकिन अब पूंजीवाद, बाजारवाद और लूटतंत्र की एक और शक्ति मैदान में खड़ी है जिसका नाम आम आदमी पार्टी है।
इस पार्टी का नेता अरविंद केजरीवाल इंडियन रिवेन्यू सर्विसेज का अधिकारी रह चुका है। इस सेवा का अधिकारी रहते हुए अरविंद केजरीवाल आरएसएस परस्त अखिल भारतीय सेवाओं के संगठन विवेकानंद फाउंडेशन का सदस्य था। यह वही अरविंद केजरीवाल है जिसने अभिनव भारत नाम के संगठन के बैनर तले सन 2008 में एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण के विरुद्ध आंदोलन चलाया था। उपरोक्त विवेकानंद फाउंडेशन ने ही अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का खाका तैयार किया था, उसका प्रचार तंत्र तैयार किया था और उसे संसाधन उपलब्ध कराए थे। इसी अन्ना आंदोलन का एक सिपहसालार अरविंद केजरीवाल था और उसने इस आंदोलन की सारी मलाई को समझते हुए आम आदमी पार्टी नाम के राजनीतिक दल का गठन कर उसका आका बन बैठा, जो कि उसकी पूर्व घोषणा को खारिज कर किया गया काम था।
यही केजरीवाल राम भक्ति के मामले में भाजपा से प्रतिस्पर्धा करता है, इसने कश्मीर के भारत में विलय की भावना के अनुरूप निर्मित संविधान के अनुच्छेद 370 की समाप्ति के लिए भाजपा का सहयोग किया, जनविरोधी यूएपीए कानून बनाने में भाजपा का सहयोगी बना। कदम कदम पर यह शख्स भाजपा का बगल बच्चा साबित होता रहा, आज भी हो रहा है। राम मंदिर निर्माण के शिलान्यास के बाद सबसे पहले सरकारी खर्चे पर दिल्ली से रेलगाड़ियां भरकर दर्शनार्थियों का जमावड़ा कर दिया। यह वही केजरीवाल है जिसने देश के पूंजीपतियों के संगठन एसोचैम की मीटिंग में खुलेआम कहा था कि "मैं भाजपा और कांग्रेस से ज्यादा पूंजीवादी अर्थ नीति का पक्षधर हूं और आप की बेहतरी का काम ज्यादा अच्छे ढंग से कर सकता हूं, आप सभी मेरा साथ दीजिए। मैं आपको कांग्रेस और भाजपा से अधिक लाभ पहुंचाऊंगा।" यह वही अरविंद केजरीवाल है जिसकी कैबिनेट की मंत्री राखी बिड़लान ने खुलेआम घोषणा की थी कि सभी प्रकार का आरक्षण समाप्त होना चाहिए।
मशहूर कहावत है कि भेड़िया जब भी शिकार के लिए निकलता है तो भेड़ की खाल पहन कर निकलता है। भगत सिंह के विचार साथियों को नए भेड़िए को पहचानने में न देर करनी चाहिए और ना ही गफलत करनी चाहिए। पंजाब के विधानसभा चुनावों में अनपेक्षित सफलता पाकर यह कुछ ऊंची छलांग लगाने को आतुर है। पंजाब किसान राजनीति और ग्रामीण पक्षधर राजनीति का अगुवा राज्य रहा है। बलिदानी किसान आंदोलन जिसने देश के कमेरे वर्ग को जगाने और एकता बद्द करने का काम किया वह तथा पूर्ववर्ती तमाम किसान भक्तों को धूल धूसरित कर पंजाब की जनता ने इस पूंजीवादी पार्टी को क्यों मौका दिया ? इस पर अभी टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन सवाल अपनी जगह पर है कि पूरे चुनाव अभियान में जिस पार्टी ने किसान आंदोलन के सबसे बड़े मुद्दे न्यूनतम समर्थन मूल्य का जिक्र तक नहीं किया वह किसानों सहित सबके वोट लूट ले गई।
क्या अब इस देश में बेतहाशा रुपया बहाकर प्रचार का हल्का और भोंडा अभियान चलाकर ज्वलंत मुद्दों को धराशायी किया जा सकता है ? बाबा साहेब आंबेडकर, कार्ल मार्क्स, भगत सिंह और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के रास्ते पर चलने वालों के लिए रुक कर सोचने का वक्त है और सही रास्ता अपनाने का और सही रणनीति की दिशा में आगे बढ़ने का वक्त है।
पूंजीवाद की पक्षधर ए, बी, सी तीनों टीमों से मुकाबले का रास्ता तय करना जरूरी है। कुछ सख्त शब्दों का इस्तेमाल करना पड़ा है इसलिए लेखनी की शालीनता के पक्षधर मित्रों से क्षमा प्रार्थना है।
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