कौन कहता है कि असमान में सुराख़ नहीं हो सकता•••

कौन कहता है कि असमान में सुराख़ नहीं हो सकता•••
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शिक्षा मन्त्री डाॅक्टर कल्ला ने निभाया आन्दोलनकारियों से किया अपना वादा : उर्दू की विभिन्न मांगों पर जारी किए निर्देश
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। विभिन्न मुस्लिम तन्जीमों व इदारों की अम्ब्रेला तन्जीम मुस्लिम प्रोग्रेसिव फेडरेशन से मुताल्लिक़ राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ ने 3 मार्च को एक ख़ास अन्दाज़ में विरोध प्रदर्शन किया था। कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार द्वारा उर्दू तालीम के साथ किए जा रहे लगातार सौतेले सुलूक के खिलाफ़ उर्दू तालीम लेने वाले बच्चों को जयपुर कलेक्टरेट पर जमा कर वहीं सड़क पर उनकी क्लास लगाकर विरोध प्रदर्शन किया था।


उल्लेखनीय है कि राजस्थान में हजारों सरकारी स्कूल ऐसी हैं जहाँ उर्दू पढने के इच्छुक विद्यार्थी हैं, लेकिन उन्हें अतिरिक्त विषय, तृतीय भाषा और ऐच्छिक विषय (उर्दू साहित्य) के तौर पर उर्दू पढ़ाने वाले टीचर नहीं हैं, क्योंकि कहीं तो उर्दू का पद नहीं है और कहीं उर्दू का पद होते हुए टीचर नहीं है। विचित्र बात यह भी है कि उर्दू की निशुल्क उपलब्ध करवाई जाने वाली किताबें भी विद्यार्थियों के पास नहीं हैं। शिक्षा विभाग के घोषित नियमों व निर्देशों तथा बजट घोषणा की ईमानदारी से पालना की जाए तो राजस्थान में उर्दू टीचर के पद 20 हज़ार से अधिक बनते हैं, जबकि कार्यरत करीब तीन हज़ार ही उर्दू टीचर हैं। एक अदद उर्दू टीचर के लिए अभिभावक स्थानीय विधायक व अधिकारियों के पास दर दर ठोकरें खाते रहते हैं। उर्दू शिक्षक संघ और उर्दू से मुहब्बत करने वाले लोग इसके लिए लगातार आवाज़ उठा रहे हैं। इसके बावजूद सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही थी, तो राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ ने अपने प्रदेशाध्यक्ष अमीन कायमखानी के नेतृत्व में उक्त लाजवाब व विशेष अन्दाज़ का विरोध प्रदर्शन किया था।


अमीन कायमखानी ने उस दिन कहा था कि सरकार व शिक्षा विभाग को जगाने और उर्दू विद्यार्थियों को एक अदद उर्दू टीचर उपलब्ध कराने के लिए यह विरोध प्रदर्शन वाली क्लास सड़क पर लगाई गई है। उस दिन सड़क पर लगी इस उर्दू क्लास में उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष अमीन कायमखानी, मदरसा जामिया तय्यबा मेमोरियल स्कूल के डायरेक्टर कारी मोहम्मद इस्हाक और राजस्थान मदरसा शिक्षा सहयोगी संघ के अध्यक्ष सय्यद मसूद अख्तर ने बच्चों को ग्रीन बोर्ड पर उर्दू तालीम देते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के कहने पर एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल उसी दिन शिक्षा मन्त्री डाॅक्टर बीडी कल्ला से विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में मिलने गया था। जिसमें अमीन कायमखानी, कारी मोहम्मद इस्हाक, सय्यद मसूद अख्तर, मुस्लिम प्रोग्रेसिव फेडरेशन की कोर कमेटी के सदस्य एम फ़ारूक़ ख़ान, उर्दू शिक्षक संघ के जयपुर जिलाध्यक्ष हनीफ़ खान चाकसू शामिल हुए थे।

शिक्षा मन्त्री डाॅक्टर बीडी कल्ला ने प्रतिनिधिमण्डल से मांग पत्र के हर बिन्दु पर विस्तार से चर्चा की थी और हर बिन्दु पर सहमति व्यक्त करते हुए उसी मांग पत्र पर अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) शिक्षा को निर्देश जारी किया था। उन्होंने प्रतिनिधिमण्डल को कहा था कि जब तक "मैं हूँ तब तक उर्दू के साथ सौतेला सुलूक नहीं होने दूंगा और आप जब चाहें मेरे पास उर्दू से मुताल्लिक़ अपनी समस्या लेकर आ सकते हैं। आपकी समस्या का जितना जल्द हो सकेगा, उतना जल्दी मैं समाधान करूंगा।" उन्होंने अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा को निर्देश टिप्पणी में लिखा था कि "समस्त बिन्दुओं पर तत्काल कार्यवाही कर मुझे अवगत करवाएं।"

शिक्षा मन्त्री ने एसीएस को यह भी निर्देश दिया था कि जिन विद्यालयों में उर्दू शिक्षक नहीं हैं और उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थी हैं, उनमें उर्दू के गेस्ट फैकेल्टी टीचर नई भर्ती होने तक नियुक्त किए जाएं, प्राथमिक स्तर की बजट घोषणा 2021-22 की अक्षरशः पालना की जाए, उर्दू की निशुल्क किताबें स्कूलों में शीघ्र उपलब्ध करवाई जाएं, गैर शैक्षणिक कार्य में लगे हुए समस्त उर्दू शिक्षकों को प्राथमिकता से शिक्षण कार्य हेतु स्कूलों में पढ़ाने के लिए लगाया जाए। स्माइल क्लासेज में प्राथमिक स्तर के उर्दू शिक्षा के कंटेंट शामिल नहीं करने तथा उर्दू शिक्षा की मांग की ऑनलाइन मैपिंग में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए, आदि आदि। इस मीटिंग में प्रतिनिधिमण्डल के साथ मांग पत्र चर्चा पर जो वादे डाॅक्टर कल्ला ने किए थे, उनमें सभी के लिए गत दिनों निर्देश जारी हो चुके हैं, कल्ला द्वारा निभाए गए वादों और उर्दू के प्रति दिखाई गई मुहब्बत और प्रतिनिधिमण्डल से काफी देर कर बड़े ही इत्मीनान से की गई गुफ्तगू से उर्दू शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमण्डल बहुत खुश हुआ था तथा अब जब वादे पूरे होकर परिणाम सामने आ गया तो उर्दू शिक्षक संघ ने डाॅक्टर कल्ला का आभार व्यक्त किया है।

उल्लेखनीय यह भी है कि पांचवीं बोर्ड परीक्षा 2022 में उर्दू विषय को मदरसों तक सीमित कर दिया गया था, जिसे डाॅक्टर कल्ला ने संशोधित करके सरकारी व गैर सरकारी सभी स्कूलों के उर्दू विद्यार्थियों के लिए परीक्षा करवाने का आदेश जारी कर दिया है, जो उर्दू तालीम की तारीख़ (इतिहास) में मील का पत्थर साबित होगा। डाॅक्टर कल्ला की उर्दू के प्रति इस मुहब्बत से उर्दू ज़बान को पसंद करने वाले लोग गदगद हैं तथा वे इस काम के लिए कल्ला को बधाई पेश कर रहे हैं।
(08-04-2022)
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