क्या देश में सिर्फ केजरीवाल ने ही जनहित के काम किए हैं ?

क्या देश में सिर्फ केजरीवाल ने ही जनहित के काम किए हैं ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का सपना देश का प्रधानमंत्री बनने का है। यह सपना कोई गलत भी नहीं है। पंजाब में बड़े बहुमत के साथ सरकार बनाने के बाद उनको यह सपना आसानी से साकार होता लग रहा है। इसके लिए देशभर में यह माहौल बनाया जा रहा है कि जनहित के काम सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही कर सकता है और ईमानदार व भ्रष्टाचार रहित सरकार सिर्फ आम आदमी पार्टी की ही हो सकती है। उनके समर्थक सोशल मीडिया पर मजबूती व दीवानगी से केजरीवाल का पक्ष रखते हैं। साथ ही दिल्ली सरकार व पंजाब सरकार के फुल पेज विज्ञापन देशभर के अखबारों में छप रहे हैं। दिल्ली सरकार ने तो अखबारों व टीवी चैनलों के विज्ञापनों पर पानी की तरह जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा बहाया है। मीडिया संस्थानों के लिए दिल्ली के खजाने का मुंह कई सालों से केजरीवाल ने खोल रखा है।


यह सच है कि केजरीवाल ने जनता के लिए खूब काम किया है, लेकिन यह सच नहीं है कि सिर्फ केजरीवाल ने ही ऐसा किया है। कामरेड ज्योति बसु ने बंगाल में, कामरेड माणिक सरकार ने त्रिपुरा में, नवीन पटनायक ने ओडिशा में, हेमन्त सोरेन ने झारखंड में, कामरेड पी विजयन ने केरल में, लालू प्रसाद यादव ने बिहार में, मुलायम व अखिलेश यादव ने यूपी में, प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब में, करूणानिधि व जय ललिता ने तमिलनाडु में, आदि कई मुख्यमन्त्रियों ने अपने अपने राज्य में खूब जनहित का काम किया है। चुनावी हार जीत अलग सबजेक्ट है। इसलिए यह कहना कि जनहित का काम सिर्फ अरविंद केजरीवाल ने ही किया है और वो ही कर सकता है, पूरी तरह से गलत है।

एक बात और है कि पंजाब में केजरीवाल की जो एकतरफा जीत हुई है, उसमें अकाली दल और कांग्रेस की कमजोरी के साथ साथ भाजपा का पर्दे के पीछे का सहयोग भी मुख्य कारण रहा है। यह बात किसी के गले नहीं उतरेगी, लेकिन यह पर्दे के पीछे की सच्चाई है कि केजरीवाल का पंजाब चुनावों में भाजपा से तालमेल था, उसी तरह से जैसे ओवैसी व मायावती का यूपी चुनाव में भाजपा से तालमेल था। केजरीवाल को भाजपा के सहयोग से पंजाब मिला, जहाँ भाजपा दूर दूर तक सत्ता में नहीं आ रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने कांग्रेस व अकाली दल को सत्ता से दूर रखने के लिए आम आदमी पार्टी की पंजाब में मदद की, ताकि पूरे देश में यह सन्देश दिया जाए कि अब मोदी का मुख्य प्रतिद्वंद्वी केजरीवाल ही है।

आम आदमी पार्टी ने गोवा, उत्तराखंड व यूपी में भी चुनाव लड़ा था, लेकिन वहाँ उतनी मजबूती से चुनाव नहीं लड़ा, जितनी मजबूती से पंजाब में लड़ा, क्यों ? क्योंकि यहाँ भाजपा मुख्य पार्टी थी और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तीनों राज्यों में अप्रत्यक्ष रूप से केजरीवाल ने भाजपा की मदद की है। अब केजरीवाल ने गुजरात व कर्नाटक में भी चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, जहाँ कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। इन दोनों राज्यों में भी खेल बहुत बड़ा खेला जाएगा, क्योंकि केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के पास भाजपा से टूट कर वोट नहीं आ रहा है, बल्कि भाजपा विरोधी दलों का वोट टूट कर आ रहा है। यानी केजरीवाल की वजह से गुजरात व कर्नाटक आसानी से भाजपा जीत जाएगी।

एक और बात, केजरीवाल की राजनीति भी पूरी तरह से साम्प्रदायिक व भेदभाव वाली है। केजरीवाल को दिल्ली की सत्ता की वजह से आज यह पहचान मिली है तथा दिल्ली में केजरीवाल को सत्ता दिलवाने में मुख्य रोल भाजपा विरोधी वोटरों और खासकर मुस्लिम वोटरों का रहा है। लेकिन सत्ता में आने के बाद केजरीवाल ने भी भाजपा की तरह मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक मानना शुरू कर दिया, यानी उसने भी मुसलमानों के साथ खुला भेदभाव करना शुरू कर दिया। बस फर्क यह है कि भाजपा सरकार दबंगी से मुसलमानों के साथ भेदभाव करती है और केजरीवाल की सरकार शालीनता से।

अगर हम पिछले सालभर का ही जायजा लें, तो केजरीवाल सरकार ने गुरू नानक जयन्ती, गुरू गोबिन्द सिंह जयन्ती, गणेश चतुर्थी, दीपावली, क्रिसमस डे, भगत सिंह जयन्ती आदि पर फुल पेज विज्ञापन छपवाकर बधाई दी है, लेकिन उसने ईद, ईद मीलादुन्नबी आदि मुस्लिम त्यौहारों पर कभी भी विज्ञापन छपवाकर बधाई नहीं दी है। यहां तक कि देश के हीरो जिनका ताल्लुक मुस्लिम समुदाय से है, बहादुरशाह जफर, शहीद टीपू सुल्तान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर, शहीद मौलाना फजले हक खैराबादी, शहीद शेर अली आफरीदी, शहीद अशफाकुल्लाह ख़ान, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद आदि को याद करने के लिए भी एक बार भी केजरीवाल ने कोई विज्ञापन नहीं छपवाया, जिन्होंने अपनी आखरी सांस तक देश के लिए जद्दोजहद की थी। अब आप देख सकते हैं कि जनहित के इस तथाकथित नायक का दूसरा चेहरा कैसा है ?
(10-05-2022)
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