राजस्व मण्डल सदस्य एवं वरिष्ठ आरएएस अधिकारी सत्तार ख़ान की संघर्ष यात्रा

राजस्व मण्डल सदस्य एवं वरिष्ठ आरएएस अधिकारी सत्तार ख़ान की संघर्ष यात्रा
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) के वरिष्ठ अधिकारी सत्तार ख़ान, जिनके संघर्ष की यात्रा नई पीढ़ी के लिए बहुत ही सबक आमोज है। आरएएस अधिकारी बनने के लिए उन्होंने लगातार छह बार परीक्षा दी, हर बार प्री परीक्षा पास की। प्रथम बार को छोड़कर सभी में इन्टरव्यू तक पहुंचे। चार बार अधीनस्थ सेवा में चयन भी हुआ, लेकिन एक बार भी ज्वाइन नहीं किया और छठी बार आरएएस बनने में सफलता हासिल की। गत दिनों उन्हें राजस्व मण्डल अजमेर में सदस्य नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वे जयपुर नगर निगम हैरिटेज में एडिशनल कमिश्नर पद पर कार्यरत हैं। वे पहले मुस्लिम अधिकारी हैं, जिन्हें जयपुर नगर निगम में एडिशनल कमिश्नर बनाया गया।


31 जुलाई 1963 को नागौर जिले के लाडनूं कस्बे में सादुल खां जी कायमखानी और सुभान बानो के घर पैदा हुए सत्तार ख़ान शुरू से ही पढ़ाई में होशियार थे। कस्बे की सहरिया बास सरकारी स्कूल से आठवीं में स्कूल टाॅप करने के बाद यहीं की जेबी हायर सैकेंडरी स्कूल में दाखला लिया। यहाँ से कक्षा 9, 10 और 11 में बायो साइंस में टाॅप किया, तब 10+2 नहीं होता था और सबजेक्ट 9 वीं कक्षा में ही लेना पड़ता था। साल 1979 में उन्होंने 10 वीं में स्कूल के साथ पूरा लाडनूं कस्बा भी टाॅप किया था। इस सफलता पर उन्हें स्कूल ट्रस्ट ने 1100 रूपए का इनाम देकर हौसला अफजाई की थी। तब 1100 रूपए बहुत बड़ी रकम हुआ करती थी। साल 1983 में उन्होंने एमबी साइंस काॅलेज (सुजला) से बीएससी की डिग्री हासिल की।

1983 में ही उन्होंने एमबीबीएस के लिए डिब्रूगढ़ मेडिकल कॉलेज असम में एडमिशन लिया। एक सेमेस्टर के बाद असम आन्दोलन के कारण काॅलेज बन्द हो गया और फिर उनका एमबीबीएस ड्रॉप हो गया। फिर 1986 में राजस्थान यूनिवर्सिटी काॅलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की। फिर सीडीएस की परीक्षा पास की, लेकिन परिवार की इच्छा सिविल सर्विस थी, तो सीडीएस को ज्वाइन ही नहीं किया। इसके बाद 12 अक्टूबर 1988 को सत्तार ख़ान का चयन जूनियर अकाउंटेन्ट में हुआ और राजस्थान सरकार की इस सेवा को उन्होंने ज्वाइन कर लिया। लेकिन आरएएस अधिकारी बनने के जुनून ने उन्हें लगातार प्रेरित किया और वे नौकरी के दौरान तैयारी में जुटे रहे तथा लगातार परीक्षा भी देते रहे।

1989 से 1997 तक उन्होंने लगातार छह बार आरएएस अधिकारी बनने के लिए परीक्षा दी। जिसमें हर बार वे प्री परीक्षा में पास भी हुए। प्रथम बार को छोड़कर बाकी पांच में मुख्य परीक्षा भी पास की और इन्टरव्यू में भी बैठे। चार बार अधीनस्थ सेवा में चयन भी हुआ, लेकिन आरएएस अधिकारी बनने के जुनून में कभी भी अधीनस्थ सेवा को ज्वाइन नहीं किया। छठी बार 1997 में उनका 35 वीं रैंक के साथ आरएएस में चयन हुआ। वे अपने बैच के सबसे बड़ी उम्र के आरएएस अधिकारी बने।

ओटीएस (ऑफिसर ट्रेनिंग स्कूल) में आरएएस की ट्रेनिंग के दौरान ही उन्होंने पंचायत चुनाव में भरतपुर जिला कलेक्टर को सेवा सौंपी। इसमें सराहनीय कार्य करने के लिए जिला कलेक्टर ने प्रशंसा पत्र ओटीएस को भेजा। ट्रेनिंग के बाद उनकी पहली पोस्टिंग सरदारशहर में एसीएम के पद पर हुई। फिर जेडीए में रहे। इसके अलावा बाली, लक्ष्मणगढ़ (सीकर), लूणकरणसर, सरदारशहर, पिण्डवाड़ा और मसूदा में एसडीएम रहे। फिर चूरू जिले में अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) रहे। इसके अलावा चूरू जिला परिषद सीईओ, डीटीओ अलवर, एडिशनल कमिश्नर ट्रांसपोर्ट, सचिव राजस्थान पाठ्यपुस्तक मण्डल, उप निदेशक अल्पसंख्यक निदेशालय, सीईओ राजस्थान वक्फ बोर्ड और एडिशनल डिवीजन कमिश्नर अजमेर के पद पर भी वे अपनी सेवा दे चुके हैं।

नौकरी के दौरान वे जनता व समाज से बराबर जुड़े रहते हैं। उनके पास कोई व्यक्ति अपनी समस्या लेकर आता है, तो उसका शीघ्रता से समाधान करने का प्रयास करते हैं। कभी भी किसी व्यक्ति को उन्होंने अपने दफ्तर के बाहर पांच मिनट का इन्तजार नहीं करवाया है, पर्ची मिलते ही तुरंत अन्दर बुलाते हैं। कायमखानी ओबीसी आरक्षण का ज्ञापन तैयार करने में उनकी मुख्य भूमिका रही है। ख्वाज़ा ग़रीब नवाज़ (केजीएन) हाॅस्टल (झोटवाड़ा, जयपुर) का निर्माण करने वाली 14 सदस्यों की टीम का वे हिस्सा रहे हैं। वे इस हाॅस्टल सोसायटी के कोषाध्यक्ष भी रहे हैं। चूरू एडीएम रहते हुए उन्होंने चूरू कायमखानी छात्रावास के लिए सरकार से तीन बीघा भूमि आवंटित करवाने के लिए विशेष प्रयास किए।

सत्तार ख़ान जब वक्फ बोर्ड में सीईओ थे, तब उन्होंने किराया पाॅलिसी बनवाकर राज्य सरकार से अनुमोदन करवाकर उसे अधिसूचित करवाई, ऐसा देश में सर्व प्रथम राजस्थान में हुआ और इसे करवाने वाले वरिष्ठ आरएएस अधिकारी सत्तार ख़ान ही थे। कायमखानी वीर चक्र विजेता सैनिकों के नाम पाठ्यपुस्तकों में शामिल करवाने के कार्य में भी उनका विशेष योगदान रहा। इन वीरों के नाम जब पाठ्यपुस्तकों में शामिल हुए, तब वे राजस्थान पाठ्यपुस्तक मण्डल में सचिव थे। नागौर जिले का बासनी कस्बा, जो मुस्लिम बाहुल्य है और कोरोना काल की पहली लहर की चपेट में आ गया था, यहाँ सत्तार ख़ान की सरकार ने विशेष ड्यूटी लगाई गई थी। उन्होंने यहाँ जो विशेष सेवा देकर कोरोना महामारी को रोकने का प्रयास किया, वो तब नागौर माॅडल के नाम से चर्चित हुआ था।

उन्हें सराहनीय कार्य करने के लिए कई बार सरकार व समाज ने सम्मानित किया है। सरदारशहर में एसडीएम पद पर रहते हुए सत्तार ख़ान को तत्कालीन राज्यपाल अंशुमान सिंह ने सम्मानित किया था। अलवर डीटीओ रहते हुए राजस्व अर्जन में राजस्थान में प्रथम स्थान आने पर उन्हें तत्कालीन परिवहन मन्त्री यूनुस खान और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर जगदीश कातिल ने उन्हें सम्मानित किया था। उन्हें 10 वीं कक्षा में स्काउट में तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीवा रेड्डी ने प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया था।
(24-05-2022)
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