सीएम गहलोत ने आनन-फानन में आरएएस अधिकारी अकील अहमद ख़ान का ट्रांसफर 550 किलोमीटर दूर क्यों किया ?
सीएम गहलोत ने आनन-फानन में आरएएस अधिकारी अकील अहमद ख़ान का ट्रांसफर 550 किलोमीटर दूर क्यों किया ?
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दिन रात गहलोत और कांग्रेस को पानी पी पीकर खरी खौटी कहने वाले आरएसएस विचारधारा के अधिकारियों को जयपुर के विभिन्न दफ्तरों से हटाने या उन्हें बांसवाड़ा भेजने की हिम्मत क्या मुख्यमंत्री करेंगे, जो मलाईदार पदों पर बरसों से राजधानी में जमे हुए हैं ?
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सीईओ वक्फ बोर्ड से सीधे बांसवाड़ा बर्फ में लगाने वाले पद पर अकील अहमद ख़ान का ट्रांसफर किया, लेकिन अल्पसंख्यक मन्त्री, वक्फ बोर्ड चेयरमैन और मुस्लिम विधायकों व कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं की खामोशी बहुत कुछ साबित करती है। मुस्लिम समुदाय में इस ट्रांसफर को लेकर गहलोत और कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं के प्रति कड़ा रोष है, जो विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है।
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दिन रात गहलोत और कांग्रेस को पानी पी पीकर खरी खौटी कहने वाले आरएसएस विचारधारा के अधिकारियों को जयपुर के विभिन्न दफ्तरों से हटाने या उन्हें बांसवाड़ा भेजने की हिम्मत क्या मुख्यमंत्री करेंगे, जो मलाईदार पदों पर बरसों से राजधानी में जमे हुए हैं ?
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सीईओ वक्फ बोर्ड से सीधे बांसवाड़ा बर्फ में लगाने वाले पद पर अकील अहमद ख़ान का ट्रांसफर किया, लेकिन अल्पसंख्यक मन्त्री, वक्फ बोर्ड चेयरमैन और मुस्लिम विधायकों व कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं की खामोशी बहुत कुछ साबित करती है। मुस्लिम समुदाय में इस ट्रांसफर को लेकर गहलोत और कांग्रेसी मुस्लिम नेताओं के प्रति कड़ा रोष है, जो विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है।
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। तारीख 31 मई 2022, इस दिन राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने आनन-फानन में वक्फ बोर्ड सीईओ अकील अहमद खान का ट्रांसफर जयपुर से बांसवाड़ा कर दिया, वो भी अधिकारियों की भाषा में बर्फ में लगाने वाले पद पर, यानी बिना किसी ख़ास अहमियत वाले पद पर। अब सवाल यह है कि गहलोत सरकार ने आनन-फानन में ऐसा क्यों किया ? आखिर आरएएस अधिकारी अकील अहमद का गुनाह क्या था कि उन्हें जयपुर से 550 किलोमीटर दूर बांसवाड़ा में एक तरह से फेंका गया। हालांकि दिखाने के लिए इस लिस्ट में कुल पांच अधिकारियों के ट्रांसफर किए गए हैं, ताकि लोग यह नहीं समझें कि अकेला अकील अहमद खान को ही टारगेट बनाकर ट्रांसफर किया है।
अब बात करते हैं इस पूरी कहानी की। करीब डेढ़ महीने पहले सोशल मीडिया पर एक कमेन्ट घूमना शुरू हुआ कि "एक मुस्लिम आरएएस अधिकारी असदुद्दीन ओवैसी के सम्पर्क में है और ओवैसी उसे अपनी पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष बनाना चाहते हैं, इसलिए यह अधिकारी वीआरएस ले रहा है।" फिर आई 31 मई 2022 की तारीख। इस दिन पूर्व घोषणा के मुताबिक एमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी को जयपुर आना था और यहाँ पार्टी की यूनिट गठित कर प्रेस काॅन्फ्रेंस करनी थी। वे इस दिन यहाँ होटल क्लार्क आमेर आए और दोपहर बाद उनकी प्रेस काॅन्फ्रेंस हुई। इस प्रेस काॅन्फ्रेंस में ओवैसी ने एक छह सदस्यीय कोर कमेटी राजस्थान के लिए बनाई, जिसका अध्यक्ष आरएएस अकील अहमद खान के भाई जमील खान को बनाया गया।
जब यह प्रेस काॅन्फ्रेंस चल रही थी और जमील खान सहित सभी छह लोग ओवैसी के अगल बगल प्रेस काॅन्फ्रेंस में बैठे थे, तभी राज्य सरकार का तन्त्र एक्टिव हुआ। फिर रात को आनन-फानन में अकील अहमद का ट्रांसफर बांसवाड़ा कर दिया गया। इस खबर का पता चलते ही मुस्लिम समुदाय में रोष व्याप्त हुआ तथा भांति भांति की खबरें और कमेन्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। लोगों ने सवाल किए कि "क्या भाई का एमआईएम ज्वाइन करना और प्रदेशाध्यक्ष बनना इतना बड़ा अपराध है गहलोत की नज़र में कि अकील अहमद को बांसवाड़ा फेंक दिया ?" लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि अगर एमआईएम के मुद्दे पर अकील अहमद को यह सजा दी गई है, तो फिर उन अधिकारियों को बांसवाड़ा कब भेजा जाएगा, जो आरएसएस विचारधारा के हैं और दिन रात गहलोत, कांग्रेस और यहाँ तक कि नेहरू गांधी परिवार के खिलाफ़ भी जहर उगलते रहते हैं ? आरएसएस विचारधारा के ऐसे अधिकारी बरसों से राजधानी के विभिन्न दफ्तरों में मलाईदार पदों पर विराजमान हैं, लेकिन गहलोत उन्हें बांसवाड़ा तो दूर जयपुर से बाहर भेजने की भी साढ़े तीन साल में हिम्मत नहीं कर पाए हैं।
लोगों का गुस्सा पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, अल्पसंख्यक मन्त्री सालेह मोहम्मद, वक्फ बोर्ड चेयरमैन डाॅक्टर खानू ख़ान बुधवाली, अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन विधायक रफीक ख़ान, हज कमेटी के चेयरमैन विधायक अमीन कागजी, वक्फ विकास परिषद के चेयरमैन विधायक हाकम अली ख़ान एवं मुस्लिम विधायकों व मुस्लिम कांग्रेसी नेताओं को लेकर भी है, जो इस मुद्दे पर पूरी तरह से खामोश हैं। इनकी यह खामोशी यह साबित करती है कि इनकी गहलोत के यहाँ कोई सुनवाई नहीं है और यह लोग सीएम गहलोत के सामने मुंह खोलने से भी डरते हैं। या इनकी खामोशी यह साबित करती है कि यह इस ट्रांसफर से खुश हैं, क्योंकि यह लोग भी एमआईएम की जड़ें राजस्थान में जमाने की कोशिश करने वाले परिवार को प्रताड़ित होते देखना चाहते हैं। क्योंकि इन्हें लगता है कि अगर एमआईएम ने पूरी ताक़त व रणनीति से चुनाव लड़ा तथा मुस्लिम बाहुल्य सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे दिए, तो अपन तो मतगणना के दिन 12 बजे ही रन आउट होकर पैवेलियन लौट जाएंगे।
बड़ा खतरा खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सीट सरदारपुरा और पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा की लक्ष्मणगढ़ सीट पर भी है, जो मुस्लिम बाहुल्य मानी जाती हैं तथा राजस्थान में कुल 54 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहाँ मुस्लिम वोट 25 हजार से लेकर एक लाख से ऊपर हैं और यह अधिकतर सीटें इस वक्त कांग्रेस के पास हैं। इनमें से कुछ सीटों पर कांग्रेस के ऐसे नेता विधायक हैं, जो एक तरह से इन सीटों के मालिक बन चुके हैं तथा मुस्लिम वोटों की एकतरफा पोलिंग से वे बड़े नेता बने हैं और सत्ता व संगठन के केन्द्र में रहते हैं। विचित्र बात यह है कि मुसलमानों के मुद्दे पर यह नेता एक तरह से खामोश ही रहते हैं और राज की मलाई (राजनीतिक नियुक्तियां) बांटने की बात आती है, तो यह अपने मुस्लिम कार्यकर्ताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज कर देते हैं और ऐसे लोगों को नियुक्ति दिलाते हैं, जिनके समुदाय के तो दूर परिवार के वोट भी कांग्रेस को नहीं मिलते हैं।
मुसलमानों में इस बात को लेकर भी नाराज़गी है कि अव्वल तो मुस्लिम अधिकारी गिनती के हैं और जो हैं उनमें से कुछ को छोड़कर किसी को भी गहलोत सरकार में अच्छे पद पर नहीं लगाया गया है। भेदभाव की भी एक पराकाष्ठा होती है, जिसे मुख्यमंत्री मुसलमानों के मामले में पूरी तरह से लांघ चुके हैं। एक और मामला देखिए, सीकर जिले से पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा हैं और इसी जिले के बेसवा गांव से आईपीएस अरशद अली हैं। जिन्हें अभी तक जिले में नहीं भेजा है, यानी जिला पुलिस अधीक्षक नहीं लगाया है। शायद राजस्थान के इतिहास में अरशद अली ही एकमात्र ऐसे आईपीएस अधिकारी हैं, जिन्हें जिला एसपी नहीं बनाया गया है और वे बिना एसपी बनाए ही रिटायर्ड कर दिए जाएंगे। राजस्थान के 33 जिलों में आज एक भी मुस्लिम एसपी नहीं है और एसपी लगने वाली श्रेणी में एकमात्र मुस्लिम आईपीएस अरशद अली ही हैं। मुस्लिम अधिकारियों के साथ यह बहुत बड़ा अन्याय व भेदभाव नहीं तो और क्या है ?
(07-06-2022)
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