नवाब क़ायम ख़ान साहब का 603वां शहीद दिवस (नवाब क़ायम ख़ान डे) 14 जून को
नवाब क़ायम ख़ान साहब का 603वां शहीद दिवस (नवाब क़ायम ख़ान डे) 14 जून को
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(दिनांक 04 जून 2022)
@कप्तान फजरू खां नूरखानी,
अध्यक्ष
राजस्थान कायमखानी महासभा
(कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) 09560799572
@एम फारूक़ ख़ान
सहायक
राजस्थान कायमखानी महासभा
(कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) एवं समस्त सदस्य
09602992087, 09414361522
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राजस्थान कायमखानी महासभा (कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) की क़ौम से गुज़ारिश
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"कायमखानी क़ौम" चौहान वंश का एक प्रसिद्ध ख़ानदान है, जिसकी उत्पत्ति नवाब क़ायम ख़ान साहब के नाम पर हुई थी। उनके और उनके दो भाइयों नवाब जैनुद्दीन ख़ान साहब और नवाब जबरूद्दीन ख़ान (जुबैरूद्दीन ख़ान) साहब की औलाद को कायमखानी कहा जाता है, यह एक ऐतिहासिक तथ्य है। बहादुर, जांबाज, वतनपरस्त, वफादार और ईमानदार कायमखानी क़ौम के बानी (प्रथम पुरुष) दादा नवाब क़ायम ख़ान साहब (रहमतुल्लाह अलैह) के 603वें यौम ए शहादत (शहीद दिवस) को मनाने के लिए राजस्थान कायमखानी महासभा (कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) क़ौम से कुछ ख़ास गुज़ारिश कर रही है। जो निम्नलिखित हैं:-
(1) पिछले पांच साल में हम "नवाब क़ायम ख़ान डे" को बड़े कार्यक्रम के तौर पर नहीं मना पाए, क्योंकि तीन साल तो 14 जून रमजान में आया और 2020 व 21 में कोरोना महामारी के बीच आया। फिर भी कोरोना महामारी के बावजूद गाइडलाइन की पालना करते हुए 2020 और 2021 में काफी संख्या में छोटे बड़े प्रोग्राम क़ौम ने आयोजित किए। हम सब की कोशिश और अपने इतिहास व पुरखों को याद करने तड़प ने आज "नवाब क़ायम ख़ान डे" को विश्व प्रसिद्ध बना दिया है। इस दिन को भारत और भारत से बाहर जहाँ-जहाँ कायमखानी आबाद हैं या नौकरी-बिजनेस कर रहे हैं वे सभी मनाते हैं। दुनियाभर में हर साल सैकड़ों जगह नवाब क़ायम ख़ान डे मनाया जाता है, यह हमारे लिए फख्र की बात है। इस बार भी हमें तमाम क़ायदे क़ानून की पूरी तरह से पालना करते हुए यह दिन बड़े पैमाने पर मनाना है।
(2) इस साल 14 जून 2022 मंगलवार को कायमखानी क़ौम दुनियाभर में अपने दादा का 603वां यौम ए शहादत इन्शाअल्लाह मनाएगी। नवाब साहब की जन्म स्थली ददरेवा (जिला चूरू) स्थित नवाब कायम ख़ान मेमोरियल शहीद स्मारक के साथ-साथ जहाँ-जहाँ कायमखानी आबाद हैं, उन गांवों, कस्बों व शहरों में यह दिन इन्शाअल्लाह मनाया जाएगा। इस दिन हमें दादा साहेब नवाब क़ायम ख़ान साहब को खिराजे अक़ीदत पेश कर उनकी मग्फिरत और दर्जे बुलन्द करने की दुआ करनी है। साथ ही उन तमाम बुजुर्गान ए दीन के लिए भी दुआ करनी है, जो इस दुनिया से जा चुके हैं। इसके अलावा देश में, प्रदेश में, पूरी दुनिया में, कौम में, रिश्ते नातों में, घर परिवार में मुहब्बत, अमन-चैन व भाईचारा क़ायम रहे की दुआएं भी हमें खुदा से करनी हैं, जो हर साल हम करते हैं।
(3) हमें हर साल की तरह इस बार भी शहीद कायमखानी वीर सैनिकों के लिए भी दुआ करनी है, जो वीरता के साथ देश की रक्षा करते हुए विभिन्न युद्धों एवं सैन्य ऑपरेशनों में शहीद हुए हैं। यह शहीद सैनिक क़ौम व मुल्क का फख्र हैं।
(4) इस दिन हमें हमारे उन बुजुर्गों को भी खासतौर पर याद करना है, जिन्होंने क़ौम व मुल्क की खिदमत की। साथ ही हमारी विभिन्न कायमखानी रियासतों के नवाबों, जागीरदारों और क़ौम के सरदारों को भी याद करना है, जिनके हम वारिस हैं।
(5) हमें इस बात पर फख्र करना चाहिए कि उस महान योद्धा और वली सिफ़्त इंसान (नवाब क़ायम ख़ान साहब) का खून हमारी रगों में दौड़ रहा है, जिनके देश प्रेम, बहादुरी और वफादारी के किस्से इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हैं। हम उस क़ौम के वंशज हैं, जो अपनी पुरातन परम्पराओं एवं संस्कृति के बल पर साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है। हम उस क़ौम के वारिस हैं, जिसके पुरखों ने हक़ो इन्साफ को क़ायम करने और वतन की हिफाज़त में अपनी जान की कुरबानी दी है। हमें इस दिन अपनी क़ौम के वकार और इक़बाल को बुलन्द करने के लिए हमारे दादा नवाब क़ायम ख़ान साहब की शिक्षाओं व आदर्शों को आत्मसात करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का प्रण लेना चाहिए।
(6) पिछली साल क़ौम ने नवाब क़ायम ख़ान डे पर कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी, ब्लड डोनेशन कैम्प, ज़रूरतमंदों की मदद, गौ शालाओं में चारा वितरण, अस्पतालों में फल वितरण व मेडिकल उपकरण डोनेट करने आदि कार्यकम आयोजित किए थे। यह कार्यक्रम क़ौम के विभिन्न संगठनों और इदारों ने आयोजित किए थे। जिनमें कायमखानी क़ौम के साथ साथ दूसरी क़ौमों ने भी सहयोग किया था। इस बार भी हमें इस दिन आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में भरपूर सहयोग करना है। इन कार्यक्रमों को आयोजित करने वाले तमाम संगठनों, संस्थाओं, ट्रस्ट व सोसाइटीज का हम तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं।
(7) ध्यान देने वाली बात यह भी है कि पिछले तीन चार साल से आर्थिक व्यवस्था बहुत कमजोर हो गई है, बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगारी व महंगाई का शिकार हो रहे हैं, इसलिए इस दिन हमें अपने अपने इलाके में दिल खोलकर ज़रूरतमंदों की आर्थिक मदद भी करनी है।
(8) नवाब क़ायम ख़ान डे के इस मुक़द्दस दिन पर सब गिले शिकवे भूल कर अपने गांव में, कस्बे में, शहर में जैसा भी प्रोग्राम आयोजित करें, लेकिन जरूर करें तथा इसमें दादा नवाब कायम ख़ान साहब की जीवनी, कायमखानी क़ौम की उत्पत्ति, देश की रक्षा में कायमखानी सरदारों के योगदान एवं बलिदान, कायमखानी संस्कृति और परम्पराओं के बारे में बच्चों एवं युवाओं को खासतौर पर बताएं, ताकि हमारी नई नस्ल अपनी तारीख़ व रिवायतों (इतिहास व परम्पराओं) के साये में अपने पुरखों की तरह क़ौम का नाम रोशन कर करे।
(9) यह बात हमें खासतौर पर याद रहनी चाहिए कि यह जो हम नाम के पीछे "कायमखानी" सरनेम (जाति) लिख कर गौरवान्वित होते हैं, हमें वो गौरव देने वाले सिर्फ हमारे दादा नवाब कायम ख़ान साहब (रहमतुल्लाह अलैह) ही हैं। फ़ख्र कीजिए कि हम जिंदा क़ौम कायमखानी से ताल्लुक रखते हैं। जिसका अतीत गौरवशाली है तो वर्तमान भी इतिहास रचने का माद्दा रखता है। खुदा का इसके लिए हमें शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने हमें इस ख़ानदान में पैदा किया है।
(10) आखरी गुजारिश सिर्फ क़ौम की नई पीढ़ी (युवक, युवतियां और बच्चों) से। आपको इस बात पर फ़ख़्र होना चाहिए कि हम भारतीय मुसलमान होने के साथ कायमखानी भी हैं। आपको पता है कि नई नस्ल और नौजवान खून क़ौमों का सरमाया होता है। इसलिए आपको हर किस्म की बुराई तथा बीड़ी, सिगरेट, गुटखे आदि के नशे से खुद को बचाना है। साथ ही पारिवारिक रिश्तों में आ रही दरारों को बढाने की बजाए उन्हें पाटने की कोशिश करनी है। आपको तालीम के मैदान में झण्डे गाड़ने हैं, कॉम्पिटिशन के इस बढते दौर में अपने आपको हर लिहाज़ से मजबूत करना है, ताकि आप अपने पुरखों की तरह इलाके और मुल्क की खिदमत कर क़ौम का सिर फख्र से ऊंचा कर सकें।
(11) नई पीढ़ी को इस बात का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए कि मुल्क के हालात तेजी से बदल रहे हैं, साम्प्रदायिक ताकतें आवारा सांड की ताण्डव कर रही है, नफ़रती माहौल का बोलबाला बढ़ता जा रहा है। ऐसे माहौल में नए नए कट्टरपंथी संगठन आपको वक्त व हालात का हवाला देकर भड़काने व खुद से जोड़ने की कोशिश करेंगे या कर रहे हैं, ऐसे संगठनों से पूरी तरह से दूर रहें, हमारे पुरखों की पहचान सभी कौमों को साथ लेकर चलने, सभी की हिफाज़त करने, किसी के साथ किसी किस्म का भेदभाव नहीं करने और समाज में भाईचारा क़ायम करने की रही है, हमारे पुरखों ने कभी किसी से नफ़रत नहीं की और ना ही कभी नफ़रती तत्वों का साथ दिया, इसलिए हमें हमारे पुरखों के कदमों पर चलना है ना कि जमाने में बहती नफ़रती हवा पर सवार होकर खुद को व दूसरों को बरबाद करना है।
(12) आखरी गुज़ारिश उन युवक युवतियों से जो ग्रेजुएशन कर रहे हैं या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। आप पूरी तरह से अपनी पढ़ाई पर फोकस करें, टारगेट लेकर चलें, दस बारह घण्टे रोज एकाग्रता से पढ़ाई करें। अपनी काॅलेज या कोचिंग में टाइम पर जाएं, छुट्टी होते ही फ़ौरन घर आ जाएं, वहां एक मिनट भी फ़ालतू की बातों में जाया नहीं करें, अपने ख़ानदान व क़ौम की इज्ज़त आबरू का खासतौर पर ख्याल रखें, अपने कमजोर दोस्तों की हर तरह से मदद करें और मदद करवाएं तथा यह तय कर लें कि मुझे हर हाल में प्रतियोगी परीक्षा में सिलेक्ट होना है, फिर दुनिया की कोई ताक़त आपके सिलेक्शन को रोक नहीं पाएगी। हर वक़्त हौसले बुलंद रखें, कैसी भी विपरीत परिस्थिति आए हार नहीं मानें, हताश नहीं हों, कामयाबी इन्शाअल्लाह आपके कदम चूमेगी। अल्लाह हम सबको सीधा रास्ता दिखाए, आमीन।
(दिनांक 04 जून 2022)
@कप्तान फजरू खां नूरखानी,
अध्यक्ष
राजस्थान कायमखानी महासभा
(कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) 09560799572
@एम फारूक़ ख़ान
सहायक
राजस्थान कायमखानी महासभा
(कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति) एवं समस्त सदस्य
09602992087, 09414361522




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