मुसलमानों को करने योग्य जरूरी काम ?

मुसलमानों को करने योग्य जरूरी काम ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। मुल्क के हालात तेजी से बदल रहे हैं, साम्प्रदायिक ताकतें अपने नफ़रती एजेन्डे को तेजी से फैला रही हैं। बेरोजगारी, डूबते काम-धन्धे व कारोबार और आवारा सांड की तरह ताण्डव कर रही महंगाई के कारण 140 करोड़ भारतीयों में से अधिकतर यानी 95 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। सत्ता के कर्णधारों को जनता की इस पीड़ा से कोई लेना-देना नहीं है, उन्हें तो सिर्फ सत्ता चाहिए, जो नफ़रत को हवा देकर व हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण से आसानी से मिल रही है, इस एजेन्डे पर वे अब पूरी ताक़त से और आगे बढ रहे हैं।


"भारत" जिसे हम हमारा वतन कहते हैं, मादरे वतन कहते हैं, वतने अजीज कहते हैं, जिसको आज़ाद करवाने, यहाँ लोकतांत्रिक व संवैधानिक व्यवस्था स्थापित करने और ज़ुल्म व नाइन्साफी से सिसकती इन्सानियत के आंसू पौंछने में हमारे पुरखों का अहम योगदान रहा है। हमारे पुरखों की कुर्बानियां, उनकी कोशिश, उनके त्याग व तपस्या का इतिहास गवाह है। इस मिट्टी का कण कण हमारे पुरखों ख्वाज़ा मुईनुद्दीन चिश्ती ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत बाबा फरीद रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शेख़ जमालुद्दीन हांसवी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत निजामुद्दीन औलिया रहमतुल्लाह अलैह, पीर पगारा शहीद सय्यद सिब्गतुल्लाह शाह सूरेह बादशाह रहमतुल्लाह अलैह, बहादुर शाह जफर साहब, शहीद सिराजुद्दौला साहब, हैदर अली साहब, शहीद टीपू सुलतान साहब, शहीद नवाब क़ायम ख़ान साहब, शहीद नवाब अलिफ़ (अलफ) ख़ान साहब, नवाब अमीरूद्दौला ख़ान साहब, शहीद हकीम ख़ान सूरी साहब, शहीद अशफाकुल्लाह ख़ान साहब, शहीद मौलाना फजले हक खैराबादी साहब, शहीद शेर अली आफरीदी साहब, मौलाना मुहम्मद अली जौहर साहब, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद साहब, मौलाना हसरत मौहानी साहब, मौलाना हुसैन अहमद मदनी साहब वगैरह की कुर्बानियों का गवाह है।

इसलिए न मायूस होने की जरूरत है और ना ही खौफज़दा होने की जरूरत है। बस सिर्फ खुद को सम्भालने की जरूरत है, किसी को दोष देने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि बड़ी हद तक इन हालात के लिए हम खुद भी जिम्मेदार हैं। अब हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, बस उसी पर फोकस रखना चाहिए। हमारे कुछ सुझाव हैं, जिनको आप पढ़िए, गौर से पढ़िए और दूसरों को पढ़कर सुनाइए, अगर बात अच्छी लगे तो अमल करने की कोशिश कीजिए, यकीनन कुछ बरसों में इन्शाअल्लाह हालात बदल जाएंगे।

1 पूरी तवज्जोह व ताक़त रोटी रोजगार हासिल करने, अपने काम धन्धे व कारोबार को बढ़ावा देने और बच्चे बच्चियों को बेहतर से बेहतर तालीम देने पर लगा दीजिए।

2 अगर बच्चे बच्चियों को अच्छी प्राइवेट स्कूल में नहीं पढा सकें, तो सरकारी स्कूल में पढ़ाएं और स्कूल की व्यवस्था व वहां पढा रहे टीचरों का सहयोग करें, स्कूल टाइम पर खुले और सभी टीचर समय पर आएं और बच्चों को पूरी लगन से पढ़ाएं इस पर खास ध्यान दीजिए।

3 बच्चे बच्चियों को पढ़ाई की बेहतर से बेहतर सुविधा देने की कोशिश कीजिए, लेकिन सोशल मीडिया से उन्हें जितना हो सके दूर रखने की कोशिश कीजिए, खासकर 15 से 25 साल तक के बच्चे बच्चियों को।

4 शहरों में ही नहीं गांवों में भी नशाखोरी बढ रही है, अपने बच्चों को हर किस्म के नशे पत्ते, से दूर रखने की कोशिश कीजिए, जो लोग नशे को फरोग दे रहे हैं, उन पर वाॅच रखिए और उनको अपनी गली मोहल्ले में नहीं आने की चेतावनी दीजिए।

5 अपने घर में हिन्दी, इंग्लिश व उर्दू तीनों भाषाओं के अखबार, पत्रिकाएं आदि मंगवाएं, रोजाना के नहीं मिलें तो साप्ताहिक, पाक्षिक व मासिक ही मंगवाएं, लेकिन तीनों भाषाओं के अखबार व पत्रिकाएं जरूर मंगवाएं। जिन इलाकों में स्थानीय भाषा चलती है, वहां उसका भी अखबार, पत्रिका जरूर मंगवाएं।

6 बच्चों को अपने पुरखों का जबानी इतिहास बताएं और उन्हें उनसे जुड़ी किताबें पढने के लिए प्रेरित करें।

7 छोटे बच्चों को स्मार्ट फोन देकर वीडियो गेम, कार्टून आदि दिखाने व खेलने के नाम पर बरबाद नहीं करें। यह शौक भावी पीढ़ी को पूरी तरह से बरबाद कर देगा, जिसे हम फलता फूलता देखना चाहते हैं।

8 गाली गुफ्तार, बदतमीजी और बेहयाई के माहौल से बच्चे बच्चियों को बचाने की कोशिश कीजिए।

9 बच्चों को कड़ी मेहनत कर सरकारी नौकरी हासिल करने और सरकारी नहीं मिलने पर प्राइवेट नौकरी या कोई छोटा मोटा कारोबार पूरी ईमानदारी व लगन से करने के लिए प्रेरित कीजिए।

10 बच्चे बच्चियों को हर किस्म के गैर क़ानूनी, अलोकतान्त्रिक, कट्टरपंथी व भड़काऊ संगठनों से दूर रखिए।

11 शादी ब्याह में हो रही फिजूल खर्ची को रोकने की कोशिश कीजिए तथा सामूहिक विवाह सम्मेलन और अच्छे रिश्तों के लिए परिचय सम्मेलन आयोजित कीजिए।

12 अपने घर परिवार, पड़ौसी, रिश्तेदारों और जान पहचान वालों का विशेष ध्यान रखिए, किसी किस्म का कोई भी विवाद हो तो उसे छोटे बाप का बनकर निपटा लीजिए, कोर्ट कचहरी व थाने के चक्कर में मत पड़िए।

13 अगर जेब में गुंजाइश है तो कम से कम एक जरूरतमंद बच्चे बच्ची की फीस जमा करवाइए।

14 स्कूल, काॅलेज, हाॅस्टल, कोचिंग संस्थान आदि खोलने की कोशिश कीजिए।

15 को-ऑपरेटिव सोसायटी बनाकर एक दूसरे की मदद कीजिए।

16 अपने गली मोहल्ले में सीसी टीवी कैमरे जरूर लगवाइए।

17 हर जरूरतमंद की इन्सान समझकर मदद करने की कोशिश कीजिए, चाहे उसकी जाति-पंथ और इलाका कोई भी हो।

18 जकात व इमदाद की रकम को स्थानीय स्तर पर जमा कीजिए और इसका पूरी तरह से सदुपयोग कीजिए।

19 हमारे पुरखों की तारीख़ (इतिहास) और मुबारक ज़िन्दगी ज्यादातर फारसी व उर्दू ज़बान में लिखी हुई है, जिसे हिन्दी व अन्य स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करवाकर प्रकाशित कीजिए।

20 हर किस्म के मजहबी व मस्लकी इख्तिलाफ और गैर जरूरी बहसबाजी से दूर रहिए।

21 सियासी पार्टियों से पूरी तरह से दूरी बना लीजिए, न किसी के पक्ष में खुलकर लामबन्द हों और ना ही किसी के विरोध में उतरें। वोट उम्मीदवार देखकर दीजिए, जो आधी रात को आपके काम आ सके, चाहे वो किसी भी पार्टी व जाति का हो।

22 हर किस्म के भड़काऊ मुद्दों और भड़काऊ मुद्दों पर आयोजित धरने प्रदर्शनों से दूर रहिए।

23 सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठाएं।

24 अपने गली मोहल्ले और रास्तों में अतिक्रमण नहीं करें। एक दूसरे का ख्याल रखें और सहयोग करें।

25 सरकारी क़ानून कायदों का पूरी तरह से पालन करें।

अल्लाह से दुआ है कि वो अपने तमाम नबियों, वलियों और महबूब बन्दों के सदके व तुफैल में हम सबकी, हमारे मुल्क की और पूरी दुनिया की हिफाज़त करे, अमन व भाईचारे को मजबूत करे और हमें सीधे रास्ते पर चलाए, आमीन।
(23 मई 2022)

-@-एम फ़ारूक़ ख़ान सम्पादक इक़रा पत्रिका।
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