हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत कब तक ?

हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर नफ़रत कब तक ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। कहने को भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और विश्व की सबसे ज्यादा युवा शक्ति भारत में है। प्राकृतिक संसाधनों की भी कोई कमी नहीं है, भू भाग भी काफी विशाल है। इन सबसे बड़ी और ताकतवर चीज़ कोई भारत में है, तो वो गंगा जमुनी तहजीब है, यानी मिलीजुली संस्कृति। लेकिन अब यह सबसे बड़ी ताक़त तेजी से कमजोर हो रही है। हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की दरार को एक सोची समझी साजिश के तहत पूरी ताक़त से चौड़ा किया जा है। देश की नई पीढ़ी को अच्छी शिक्षा और रोजगार की जरूरत है, उसे धार्मिक कट्टरता की अफीम पिलाई जा रही है। नई पीढ़ी सोशल मीडिया के जरिए पिलाई इस अफीम से अपाहिज होती जा रही है, उसकी सोचने समझने की शक्ति पर पर्दा डालकर गुमराह किया जा रहा है।


कहने को हम यह भी कहते हैं कि हमारे देश के सबसे बड़े दुश्मन चीन और पाकिस्तान हैं। यह बात पूरी तरह से से सही भी है। लेकिन हमारा मानना है कि हमारे देश के चीन और पाकिस्तान से बड़े दुश्मन हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करने वाले लोग हैं, चाहे वे कोई भी हों। जब तक इनकी ताकत बढती रहेगी, तब तक चीन व पाकिस्तान को दुश्मनी निभाने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी। हमारा तो यहाँ तक मानना है कि हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की बात करने वाले और इस मुद्दे पर नफ़रत परोसने वाले किसी अन्तर्राष्ट्रीय साजिश का शिकार हैं। वे भारत के दुश्मन देशों के एजेंडे को देश में रहकर आगे बढा रहे हैं। वे भारत को एक षडयंत्र के तहत कमजोर कर रहे हैं।

गंगा जमुनी तहजीब हमारी बहुत बड़ी ताकत है, जिसके बल पर हमारी छवि पूरे विश्व में अलग है, इस छवि से हमें दुनिया में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। लेकिन अब यह तहजीब कमजोर होने या नफ़रती तत्त्वों का बोलबाला होने से हमें वे तानाशाही देश भी ज्ञान बांट रहे हैं, जहाँ लोगों को खुलकर बोलने व लिखने की आजादी भी नहीं है। नफ़रती माहौल और हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण करीब सौ साल पहले शुरू हुआ। अंग्रेजों ने एक साजिश के तहत इसे शुरू करवाया, स्वतंत्रता आन्दोलन और गंगा जमुनी तहजीब को कमजोर करने के लिए। जिसका दर्दनाक परिणाम यह रहा कि 1947 में आजादी के साथ देश तीन टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया। विभाजन का बड़ा फसाद हुआ, जिसमें असंख्य बेगुनाह लोग मारे गए और असंख्य अपने ही देश में शरणार्थी बना दिए गए। जिसका खामियाजा आज तक पूरा भारतीय उप महाद्वीप भुगत रहा है।

अब सौ साल बाद हम दुनिया को देखें तो वो साइंस व टेक्नोलॉज़ी से पैदा हुई ग्लोबलाईजेशन क्रांति से एक परिवार बन गया है। हजारों किलोमीटर की दूरी और देशों की सीमाएं अब तरक्की व आवागमन में कोई रोड़ा नहीं हैं। इसके बावजूद हम वापस सौ साल पीछे जाने पर तुले हुए हैं। पिछले आठ दस साल में हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण तेजी से बढा है, या यह कहें कि आरएसएस के संरक्षण में चल रही भाजपा की केन्द्र व राज्य सरकारों ने इसे एक योजनाबद्ध तरीके से आगे बढाया है, तो गलत नहीं होगा।

आज देश के किसी भी गांव कस्बे में जाओ या बड़े शहर में, सड़कें टूटी हुई हैं, गंदगी व अतिक्रमण से लोग बेहाल हैं। महंगाई ने जनता की कमर तोड़ने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी है। बेरोजगारी आवारा सांड की तरह उछल उछल कर लोगों को कुचलना चाहती है। ऐसी स्थिति में जरूरत है, लोगों को अच्छी शिक्षा और रोजगार देने की। लेकिन दिया जा रहा है हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का अफीम, के बेटा पिओ और बरबाद हो जाओ। इसलिए गंगा जमुनी तहजीब में भरोसा रखने वाले लोगों को एकजुट होकर इन देशद्रोही तत्वों को लोकतांत्रिक व शान्तिपूर्वक तरीके से जवाब देना चाहिए, जो हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के नाम पर नफ़रत को बढावा दे रहे हैं, वरना यह देशद्रोही तत्व देश को पूरी तरह से बरबाद कर देंगे।
(09-06-2022)
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