अल्पसंख्यक फ़्री कोचिंग के नाम पर 16 साल में किसका हुआ "विशेष लाभ" ?

अल्पसंख्यक फ़्री कोचिंग के नाम पर 16 साल में किसका हुआ "विशेष लाभ" ?
----------------------------------------------------
भारत सरकार अल्पसंख्यक वर्गों से सम्बन्धित अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए फ़्री कोचिंग करवाती है। सरकार फ़्री कोचिंग एण्ड अलाइड स्कीम के तहत कोचिंग चलाने के लिए सिलेक्टेड एनजीओ को फंडिंग करती है। यह फंडिंग वित्त वर्ष 2006-07 से लगातार केन्द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मन्त्रालय के जरिए पूरे देश में हो रही है। जिसका 16 साल में किसको "विशेष लाभ" हुआ है ? यह एक गम्भीर सवाल है। अधिकारियों को, कोचिंग चलाने वाली संस्थाओं को या फिर अभ्यर्थियों को ?
***********************************

जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। यूपीए प्रथम सरकार के कार्यकाल में देश के प्रथम अल्पसंख्यक वर्ग के प्रधानमंत्री डाॅक्टर मनमोहन सिंह जी ने केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलात विभाग का गठन किया। इसके तहत अल्पसंख्यकों को अलग से बजट आवंटित किया गया। अल्पसंख्यकों के विकास के लिए केन्द्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की, जो आज भी चल रही हैं। इन्हीं योजनाओं में फ्री कोचिंग एण्ड अलाइड स्कीम भी शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसके तहत देशभर में सिलेक्टेड एनजीओज (गैर सरकारी संगठनों) को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग चलाने के लिए फंडिंग की जाती है। पिछले 16 साल में यानी 31 मार्च 2022 तक इस योजना के तहत देशभर में 368 करोड़ 82 लाख रूपए की फंडिंग की गई है।



क्या है फ्री कोचिंग योजना ?
----------------------------------
इस योजना का नाम फ्री कोचिंग एण्ड अलाइड स्कीम है। जिसके तहत देशभर में सिलेक्टेड एनजीओ को कोचिंग चलाने के लिए फण्ड उपलब्ध करवाया जाता है। यह कोचिंग अल्पसंख्यक वर्गों के छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने के लिए चलाई जाती हैं। यह स्कीम वित्त वर्ष 2006-07 में शुरू हुई थी, जो लगातार चल रही है। एनजीओ का सिलेक्शन अल्पसंख्यक कार्य विभाग अपने नियमानुसार करता है।


इस योजना में किसको मिलता है विशेष लाभ और कैसे होती है हेराफेरी ?
--------------------------------------------------
इस योजना से पिछले 16 साल में किसको विशेष लाभ मिलना चाहिए था ? जाहिर सी बात है अभ्यर्थियों को मिलना चाहिए था। यह भी सच है कि इस योजना से अभ्यर्थियों को लाभ मिला भी है। लेकिन अभ्यर्थियों को जो लाभ मिला है, यानी इन कोचिंग संस्थानों में पढ़कर जिनका प्रतियोगी परीक्षाओं में सिलेक्शन हुआ है, उससे ज्यादा लाभ कोचिंग चलाने वाली संस्थाओं और सम्बन्धित अधिकारियों को भी मिला है।

एनजीओ को कल्याणकारी कार्यों के लिए जो फंडिंग दी जाती है, वो कागजी खानापूर्ति में तो पूरी तरह सही होती है, लेकिन धरातल पर इन कल्याणकारी कार्यों की हकीकत बहुत कड़वी होती है। फंडिंग लेने वाली बहुत सी एनजीओ सम्बन्धित अफसरों से घालमेल करके कागजों में ही बहुत सा कल्याण कर देती हैं। ऐसा ही कल्याण अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए चलने वाली बहुत सी फ़्री कोचिंग संस्थाओं ने भी किया है और बदस्तूर कर भी रही हैं। यह भी सच है कि इस योजना के तहत कई संस्थाएं ईमानदारी से अच्छा काम भी कर रही हैं और परिणाम भी दे रही हैं, लेकिन इनकी संख्या बहुत ही कम है।

अल्पसंख्यक अभ्यर्थियों के नाम पर इन कोचिंग संस्थानों को चला रही एनजीओ में जो एनजीओ हेराफेरी करती हैं, वे सम्बन्धित अधिकारियों के साथ मिलकर या अपने राजनीतिक रसूख से ऐसा करती हैं तथा गरीब अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के हक़ पर डाका डालकर खुद का कल्याण कर लेती हैं।

सरकार को क्या करना चाहिए ?
--------------------------------------
सरकार को हर साल इन कोचिंग संस्थानों से पढ़कर सिलेक्ट हुए अभ्यर्थियों की सूची राज्य वाइज़ सार्वजनिक करनी चाहिए तथा उसमें यह भी उल्लेख करना चाहिए कि किस कोचिंग ने किस प्रतियोगी परीक्षा की क्लास लगाई और कुल कितने अभ्यर्थियों ने एडमिशन लिया और उनमें से कितने सिलेक्ट हुए ?

देशभर में अभी तक कुल कितनी फंडिंग अल्पसंख्यक फ़्री कोचिंग के नाम पर हुई है ?
-----------------------------------------------------
2006-07 से लेकर 2021-22 तक, यानी पिछले 16 वित्त वर्षों में कुल 368 करोड़ 82 लाख रुपए इन फ्री कोचिंग संस्थान चलाने वाली एनजीओज को देशभर में दिए गए हैं। अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में भी इस योजना के तहत पिछले 16 बरसों में करोड़ों रूपए की फंडिंग विभिन्न कोचिंग संस्थानों को हुई है। इसका विस्तृत विवरण इक़रा पत्रिका के आगामी अंकों में प्रकाशित किया जाएगा।

वित्त वर्ष वाइज़ देशभर में हुई कुल फंडिंग ?
------------------------------------------------
➡️वित्त वर्ष 2006-07 में 41 लाख रूपए 

‌➡️वित्त वर्ष 2007-08 में 5 करोड़ 74 लाख रुपए

‌➡️वित्त वर्ष 2008-09 में 7 करोड़ 30 लाख रुपए

‌➡️वित्त वर्ष 2009-10 में 11 करोड़ 22 लाख रुपए

‌➡️वित्त वर्ष 2010-11 में 14 करोड़ 37 लाख रुपए

‌➡️वित्त वर्ष 2011-12 में 15 करोड़ 98 लाख रुपए

‌➡️वित्त वर्ष 2012-13 में 14 करोड़ रुपए

➡️वित्त वर्ष 2013-14 में 23 करोड़ 68 लाख रुपए

➡️वित्त वर्ष 2014-15 में 31 करोड़ 49 लाख रुपए

➡️वित्त वर्ष 2015-16 में 44 करोड़ 87 लाख रुपए

➡️वित्त वर्ष 2016-17 में 40 करोड़ रुपए

➡️वित्त वर्ष 2017-18 में 45 करोड़ 59 लाख रुपए

➡️वित्त वर्ष 2018-19 में 44 करोड़ 61 लाख रुपए

➡️वित्त वर्ष 2019-20 में 13 करोड़ 97 लाख रुपए

➡️वित्त वर्ष 2020-21 में 18 करोड़ 44 लाख रुपए

➡️वित्त वर्ष 2021-22 में 37 करोड़ 15 लाख रुपए

(23-07-2022)
------------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए। 
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
A/c no. 613900 55000 00252 
IKRA PATRIKA 
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR. 
-----------------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
------------------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
------------------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522

©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.

Comments

Popular posts from this blog

झुंझुनूं में रीटा चौधरी को कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाने पर जबरदस्त रोष

चित्तौड़गढ़ अन्जुमन स्कूल में किया मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान

कुरैशी समाज की नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर मुहिम के तहत सादगी से हुई शादी