सत्ता के लिए बाड़ेबन्दी या विधायकों का सौदा ?
सत्ता के लिए बाड़ेबन्दी या विधायकों का सौदा ?
ताजा उदाहरण राजस्थान के राज्यसभा चुनाव का है, जहाँ चुनाव जीतने के लिए भाजपा व कांग्रेस दोनों ने ही बाड़ेबन्दी की। इससे पहले सरकार बचाने व पिछले राज्यसभा चुनाव में भी राजस्थान में विधायकों की बाड़ेबन्दी की गई थी। कर्नाटक व मध्यप्रदेश में धन-बल व सत्ता के दुरूपयोग से भाजपा ने तख्तापलट कर सरकार बनाई, इसके लिए दोनों जगह बाड़ेबन्दी की गई। अब वही खेल महाराष्ट्र में शुरू किया गया है। सत्ता प्राप्ति के लिए इतना बड़ा घिनौना खेल खेलना क्या हमारी संस्कृति है ? हमारी संस्कृति नैतिक एवं उच्च मूल्यों वाले जीवन, त्याग, तपस्या व समर्पण वाली है। लेकिन अधिकतर राजनेता दुहाई तो लोकतंत्र की देते हैं, लेकिन सत्ता प्राप्ति के लिए काम सारे लोकतंत्र का गला घोंटने वाले करते हैं।
*******************************
जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। हमारे देश में पिछले कुछ बरसों से बाड़ेबन्दी का चलन हुआ है। बाड़ेबन्दी कमोबेश सभी पार्टियां अपने जन प्रतिनिधियों की कर रही हैं। चाहे विधानसभा का चुनाव हो या नगर निकाय व पंचायती राज का। चाहे राज्यसभा का चुनाव हो या सरकार बनाने व तख्तापलट करने का खेल हो। बाड़ेबन्दी आम हो गई है। सवाल यह है कि क्या जन प्रतिनिधि बिकाऊ हैं ? क्या हम जिन्हें चुनते हैं, वे अपना सौदा कर सकते हैं ? इस बाड़ेबन्दी की कथा को सुनकर व समझकर तो यही लगता है कि सत्ता बनाने व बिगाड़ने के लिए बाड़ेबन्दी बहुत जरूरी है, अगर ऐसा नहीं किया गया, तो जन प्रतिनिधि कहीं के कहीं जा सकते हैं। जितते किसी और पार्टी से हैं और समर्थन किसी और को दे देते हैं।
ताजा उदाहरण राजस्थान के राज्यसभा चुनाव का है, जहाँ चुनाव जीतने के लिए भाजपा व कांग्रेस दोनों ने ही बाड़ेबन्दी की। इससे पहले सरकार बचाने व पिछले राज्यसभा चुनाव में भी राजस्थान में विधायकों की बाड़ेबन्दी की गई थी। कर्नाटक व मध्यप्रदेश में धन-बल व सत्ता के दुरूपयोग से भाजपा ने तख्तापलट कर सरकार बनाई, इसके लिए दोनों जगह बाड़ेबन्दी की गई। अब वही खेल महाराष्ट्र में शुरू किया गया है। सत्ता प्राप्ति के लिए इतना बड़ा घिनौना खेल खेलना क्या हमारी संस्कृति है ? हमारी संस्कृति नैतिक एवं उच्च मूल्यों वाले जीवन, त्याग, तपस्या व समर्पण वाली है। लेकिन अधिकतर राजनेता दुहाई तो लोकतंत्र की देते हैं, लेकिन सत्ता प्राप्ति के लिए काम सारे लोकतंत्र का गला घोंटने वाले करते हैं।
महाराष्ट्र में तख्तापलट कर सरकार बनाने के लिए भाजपा ने शिवसेना के 34 विधायकों को अलग करवा दिया, ताकि उद्धव ठाकरे की सरकार गिराकर भाजपा की सरकार बना ली जाए। ऐसा ही भाजपा ने कर्नाटक व मध्यप्रदेश में किया था। शिवसेना के बागी विधायक पहले गुजरात के सूरत में आए, जहाँ भाजपा का राज है, फिर यहाँ से गुवाहाटी चले गए, वहाँ भी भाजपा का राज है। यानी शिवसेना के यह विधायक भाजपा की इच्छा व तिकड़म से वहां पहुंचे हैं। अगर भाजपा ने ऐसा नहीं करवाया है, तो भाजपा नेतृत्व को यह एलान करना चाहिए कि भाजपा शिवसेना के बागी विधायकों का साथ लेकर सरकार नहीं बनाएगी और ना ही अगले चुनाव में इनको भाजपा में शामिल कर टिकट देगी। लेकिन वो ऐसा नहीं कहेगी, क्योंकि यह पूरा खेल ही भाजपा का है, जो केन्द्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग व धन बल से विधायकों को तोड़ती है और तख्तापलट करती है।
शिवसेना के बागी विधायकों की एक तरह से गुवाहाटी में बाड़ेबन्दी हो चुकी है, देखना यह लोग तभी मुम्बई आएंगे जब ठाकरे सरकार गिर जाएगी और भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनेगी। खतरा वहां एनसीसी व कांग्रेस के टूटने का भी बढ गया, विशेषकर कांग्रेस का, क्योंकि पूर्व में भाजपा ने जो तख्तापलट का खेल कर्नाटक व मध्यप्रदेश में खेला था, उसमें विशेष सहयोगी कांग्रेस के विधायक ही थे। तख्तापलट कर सत्ता बनाना, बाड़ेबन्दी करना और विधायकों की खरीद फरोख्त करना हमारे लोकतंत्र के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इसके लिए हम खुद भी जिम्मेदार हैं कि हम कैसे लोगों को चुनते हैं, जो सत्ता के लिए खुद का सौदा भी कर लेते हैं।
(23-06-2022)
-------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
A/c no. 613900 55000 00252
IKRA PATRIKA
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
-----------------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
------------------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
------------------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522
©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.
.jpeg)
Comments
Post a Comment