जनहित के विभिन्न मुद्दों को लेकर वरिष्ठ समाजवादी नेता अर्जुन देथा ने लिखा मुख्यमंत्री गहलोत को खुला पत्र
जनहित के विभिन्न मुद्दों को लेकर वरिष्ठ समाजवादी नेता अर्जुन देथा ने लिखा मुख्यमंत्री गहलोत को खुला पत्र
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माननीय मुख्यमंत्री,
राजस्थान सरकार, जयपुर।
विषय:- राज्य में जाति आधारित जनगणना करवाने, सभी आरक्षित श्रेणियों को आबादी के अनुपात में आरक्षण देने, उच्च को उच्चतम न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने व राजस्थान की जनता से आपके चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वादे पूरे करने के संबंध में।
गत वर्ष बिहार की विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भिजवाया था, जिसमें यह मांग की गई थी कि देश में जाति आधारित जनगणना कराई जाए और आबादी के अनुपात में सब को आरक्षण दिया जाए। मैंने उसी समय आपको एक पत्र लिखा था, जिसमें यह अनुरोध किया था कि बिहार की तर्ज पर राजस्थान की विधानसभा में भी एक प्रस्ताव पारित करें चाहे बहुमत हो या सर्वसम्मति हो, केंद्र को भिजवा कर जाति आधारित जनगणना आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू करवाया जाए। अब जबकि केंद्र सरकार ने संसद में जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर दिया और उसके बाद बिहार में वहां की सरकार ने निर्णय कर वहां जाति आधारित जनगणना करवा रही है। इस संबंध में वहां की कैबिनेट ने भी निर्णय कर लिया है।
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माननीय मुख्यमंत्री,
राजस्थान सरकार, जयपुर।
विषय:- राज्य में जाति आधारित जनगणना करवाने, सभी आरक्षित श्रेणियों को आबादी के अनुपात में आरक्षण देने, उच्च को उच्चतम न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने व राजस्थान की जनता से आपके चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वादे पूरे करने के संबंध में।
गत वर्ष बिहार की विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भिजवाया था, जिसमें यह मांग की गई थी कि देश में जाति आधारित जनगणना कराई जाए और आबादी के अनुपात में सब को आरक्षण दिया जाए। मैंने उसी समय आपको एक पत्र लिखा था, जिसमें यह अनुरोध किया था कि बिहार की तर्ज पर राजस्थान की विधानसभा में भी एक प्रस्ताव पारित करें चाहे बहुमत हो या सर्वसम्मति हो, केंद्र को भिजवा कर जाति आधारित जनगणना आबादी के अनुपात में आरक्षण लागू करवाया जाए। अब जबकि केंद्र सरकार ने संसद में जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर दिया और उसके बाद बिहार में वहां की सरकार ने निर्णय कर वहां जाति आधारित जनगणना करवा रही है। इस संबंध में वहां की कैबिनेट ने भी निर्णय कर लिया है।
इसलिए मैं अपने पूर्व पत्र का स्मरण करवाते हुए आपसे अनुरोध करता हूं कि राजस्थान की विधानसभा में भी वैसा ही निर्णय करके आरक्षित वर्गों के हितों की रक्षा की जाए। भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में लगभग 400 ज्वाइंट सेक्रेट्री स्तर के आईएएस अधिकारी संविधान की अवहेलना करते हुए और यूपीएससी की अवहेलना करते हुए बिना लिखित परीक्षा के नियुक्त कर लिए हैं। आप अपनी सरकार का और पार्टी का मत इस संबंध में जाहिर करें तथा इस अन्याय को रुकवाने की पहल करें। उक्त लेटरल एन्ट्री नाम की नियुक्तियों में आरक्षण की पूर्णतया अवहेलना की गई है, यह आरक्षित वर्गों पर बड़ा कुठाराघात और हमला है। आपको इस दिशा में पहल कर आरक्षित वर्गों की हिमायत करनी चाहिए। साथ ही हम आपसे यह भी मांग करते हैं कि उच्च व उच्चतम न्यायपालिका में आरक्षण लागू करवाया जाए, जजों द्वारा जजों को नियुक्त करने वाली कॉलेजियम प्रणाली समाप्त की जाए, राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों को ओबीसी कोटे के तहत भर्ती कराने का जो आदेश जारी किया था, उसके कारण पिछड़ा वर्ग अभ्यर्थियों का हक पूरे तौर पर मारा जा रहा है, आपकी सरकार भी वसुंधरा सरकार के उक्त आदेश को अब तक लागू किए हुए है। उसे तुरंत रद्द किया जाए।
गत कुछ महीनों में राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा जिसमें हमारी पार्टी जनता दल सेक्यूलर भी शरीक है, द्वारा लगातार एक अभियान चलाया जा रहा है तथा कई तहसीलों वह जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करके आपके नाम ज्ञापन उपखंड अधिकारी, जिला कलेक्टर और उदयपुर के संभागीय आयुक्त के जरिए भेजे गए हैं। उन पर अब तक न तो कोई कार्यवाही की गई है और ना ही लोकतांत्रिक मोर्चा में शरीक दलों को बुला कर कोई बातचीत की गई है। कांग्रेस पार्टी ने गत विधानसभा चुनाव के वक्त जनता से जो वादे किए थे, उसमें किसानों की कर्जा माफी, संविदा कर्मियों को नियमित नौकरी देना, बेरोजगारी भत्ता देना इत्यादि अभी तक लागू नहीं की गई है। किसानों का सहकारी समितियों के द्वारा दिया गया कुछ ऋण माफ किए गए हैं, जो कि लगभग 5000 करोड़ के होंगे, लेकिन किसानों का बड़ा कर्जा शेड्यूल्ड बैंक्स के द्वारा दिया हुआ है जो कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 52000 करोड़ है, वह कर्जा आज तक माफ नहीं किया गया है, अब तो आप इसे कभी बैंकों के माथे और कभी केंद्र के माथे मढ़ कर मुक्त होना चाहते हैं, जो कि पूर्णतया अनुचित है क्योंकि ऋण माफी का वादा आपने किया था केंद्रीय बैंकों ने नहीं। इसलिए आपको किसानों के सम्पूर्ण ऋण माफी के वादे को तुरंत निभाना चाहिए।
आप जानते ही हैं कि राज्य में काफी बड़ी संख्या में लगभग स्वीकृत पदों के एक तिहाई पद ठेका पद्धति और कुछ एजेंसियों के जरिए लगाए गए लोग हैं। ठेका पद्धति पर कई लोग अपनी आधी उम्र लगा चुके हैं लेकिन नियमित नियुक्ति की उम्मीद उनकी अभी तक पूरी नहीं हुई है यह घोर अन्याय है। आपको वादे के मुताबिक इन संविदा कर्मियों के साथ न्याय करना चाहिए। कृषि बीमा किसानों के लिए सुविधा के बजाय एक मकड़जाल और शोषण का जरिया साबित हो रहा है। इस कृषि बीमा के जरिए केवल बीमा कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, किसानों के साथ कोई जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार नहीं किया जा रहा है। सरकार उनके लिए कोई पहल नहीं कर रही है। इस कारण किसान लगातार शोषण के शिकार हैं, कृषि बीमा को जिम्मेदारी पूर्ण, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के उपाय तुरंत करें। किसानों के लिए बिजली का सवाल, अच्छे और सस्ते बीजों का सवाल, फसली लोन का सवाल, बड़े प्रश्न हैं। इनको हल करने के लिए भी अविलंब चाक-चौबंद मैकेनिज्म सक्रिय करने का कष्ट करें। राज्य में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के साथ बेहिसाब भेदभाव पूर्ण व्यवहार, अन्याय व अत्याचार जारी है। महिलाओं के साथ भी प्रतिदिन अत्याचारों व शोषण की वारदातें लगातार हो रही हैं। गृह मंत्रालय का प्रभार भी स्वयं आप ही के पास है, इसलिए इस बाबत तुरंत संरक्षण दिलाने की व मदद करने की कार्रवाई की जाए।
आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में जल, जंगल, जमीन और जंगलात के पट्टे आदिवासियों के जीवन का आधार हैं, कई वर्षों से बल्कि कुछ जगह पर दो तीन पीढ़ी से आदिवासियों के लिए स्पष्ट क़ानून बनने के बावजूद पट्टों से वंचित रखा जा रहा है। इसका भी अविलंब समाधान कराने का कष्ट करें। संविधान की अनुसूची 5 के तहत पीईएसए कानून कड़ाई से लागू किया जाए। साथ ही जंगलात पर आदिवासियों के पुश्तैनी अधिकार और सामूहिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
हमें बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि राज्य में श्रमिकों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है वह भारतीय जनता पार्टी सरकारों व केंद्र सरकार से कतई अलग नहीं है। श्रमिकों को पूरे तौर पर नियोजकों के रहमों करम पर छोड़ दिया गया है। श्रम विभाग पूर्णता शक्तिहीन बना दिया गया है। यह आप की सरकार की नीतियों और निर्देशों के कारण हो रहा है, क्योंकि सरकार और उच्च ब्यूरोक्रेसी श्रमिक विरोधी है। आपसे अनुरोध है कि आप श्रमिक विरोधी रवैये को त्याग कर श्रमिकों के हित में कदम उठाएं। देश के संविधान में सभी नागरिकों को गरिमामय जीवन जीने का अधिकार दिया गया है जो कि राज्य में श्रमिकों को अवश्य दिया जाना चाहिए, ऐसा करने के लिए न्यूनतम मजदूरी 600 रूपए प्रतिदिन बिना विलंब की जानी चाहिए। भारत सरकार द्वारा श्रमिकों के हित के सभी कानूनों को चार कोड में समाहित करके श्रमिकों के साथ बड़ा अन्याय किया गया है। आपसे अनुरोध है कि राज्य में श्रमिक विरोधी संशोधनों को लागू नहीं करने की घोषणा करें तथा केंद्र द्वारा बनाए गए श्रमिक विरोधी कोड राज्य में लागू नहीं करने की भी घोषणा करने का कष्ट करें।
राज्य में लगातार सांप्रदायिक घटनाएं हो रही हैं, करौली, जोधपुर से होकर उदयपुर तक की घटनाओं ने बहुत कुछ उजागर कर दिया है। उदयपुर में आपकी सरकार यह स्वीकार कर चुकी है कि कन्हैया लाल तेली के हत्यारों के तार अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के साथ जुड़े हुए थे, अब एनआईए की जांच में भी इसी तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं। सांप्रदायिक शक्तियों के उभार की जानकारियां जुटाने व उसका आकलन करने में आप की सरकार का खुफिया तंत्र पूरे तौर पर नाकारा साबित हुआ है और गृह मंत्री होने के नाते आप स्वयं इसके लिए जिम्मेदार हैं। छोटे स्तर के कुछ कर्मचारियों अधिकारियों का निलंबन या किसी अफसर को स्थानांतरित करना मामले को बहुत हल्का आंकने का रवैया स्पष्ट होता है। हत्या का शिकार कन्हैया लाल लगातार पंद्रह दिन तक अपनी जान बचाने की गुहार करता रहा, लेकिन एसपी और आईजी ऑफिस के निकटतम थाने में सांप्रदायिक कटुता से जुड़ा मामला गैर जिम्मेदाराना तरीके से डील किया जाता रहा। इसका स्पष्ट कारण यह है कि बड़े अधिकारी बड़ी घूस देकर पोस्टिंग प्राप्त करते हैं तथा पद ग्रहण करने के बाद खुद के द्वारा चुकाई गई घूस वह आगे बड़ी कमाई करने के एक सूत्री धंधे में लग जाते हैं।
श्रीमान नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार का यह रोग विद्यमान है, इसके लिए आप यदि जिम्मेदार नहीं हैं तो फिर कौन जिम्मेदार है ? आप अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए नीचे के लोगों पर लोक दिखावे के लिए हल्की कार्यवाही करके जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, इसका स्वत स्फूर्त परिणाम यह हो रहा है कि राज्य में धर्मांधता वादी ताकते निरंतर मजबूत हो रही हैं, साथ ही सक्रिय भी हो रही हैं, जो कि समाज के लिए और खास तौर पर गरीब तबकों के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। उदयपुर में आपकी सरकार ने कर्फ्यू को भी मजाक बना दिया, जब 10-15 हजार के जुलूस कर्फ्यू के दौरान ही निकाले जा रहे थे कभी तथाकथित संतों की अगुवाही में मौन जुलूस के नाम पर, कभी धार्मिक जुलूस के नाम पर, यह भी एक प्रकार से धर्मांधता के आगे व सांप्रदायिकता के आगे आपकी सरकार ने घुटने टेकने का काम कर दिया है और कर्फ्यू को मजाक बना दिया है। आपने राम की विजय और रावण की विजय वाली मनोवृति अपने शासन में अपना रखी है, जिसकी कीमत राजस्थान की जनता को आज चुकानी पड़ रही है और आने वाली पीढ़ियों को भी चुकानी पड़ेगी।
आपसे निवेदन है की जनता के सभी वर्गों के हितों की रक्षा के कदम उठाएं। बेरोजगार नौजवानों को आपकी पार्टी ने बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था वह भी एक धोखा साबित हुआ, भांति भांति के बहाने लगाकर नौजवानों को उलझा दिया है। परीक्षाएं बार-बार स्थगित की जाती हैं, पारदर्शी परीक्षा सिस्टम आपकी सरकार के पास है नहीं, हर परीक्षा में तिकड़मी संस्थान अपने नकल गिरोहों के जरिए नकल करवाने में कामयाब हो जाते हैं। यह नौजवानों के साथ वह उनकी कड़ी मेहनत के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। इसका आपने अब तक कोई समाधान नहीं निकाला है। परीक्षा फार्म कुछ ही वर्षों में कई गुना महंगे हो गए, जिसके प्रत्यक्ष दर्शन आरपीएससी कार्यालय की तड़क-भड़क में किए जा सकते हैं। जहां की साधारण कार्यालय व्यवस्था आजकल एक कारपोरेट कार्यालय जैसी बना दी गई है। वह भी बेरोजगार नौजवानों से रकम वसूल करके। यह सभी नौजवानों के साथ अन्याय है। हम मांग करते हैं कि किसी भी परीक्षा का फार्म पूरे तौर पर अभ्यर्थियों को निशुल्क दिया जाए, अगर शुल्क ही लेना है तो परीक्षा फार्म की लागत से अधिक हरगिज़ नहीं लिया जाना चाहिए। परीक्षाओं को कंडक्ट करना सरकार की जिम्मेदारी है, यह खर्चा बेरोजगार नौजवानों और उनके अभिभावकों से नहीं वसूला जाना चाहिए।
मैं आशा करता हूं कि जनता की जिंदगी से जुड़े हुए उक्त सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर आप अविलंब कार्रवाई करेंगे। धन्यवाद।
(दिनांक 22 जुलाई 2022)
अर्जुन देथा
प्रदेश अध्यक्ष
जनता दल (सेक्यूलर) राजस्थान।
8696651984, 8290737511
गत कुछ महीनों में राजस्थान लोकतांत्रिक मोर्चा जिसमें हमारी पार्टी जनता दल सेक्यूलर भी शरीक है, द्वारा लगातार एक अभियान चलाया जा रहा है तथा कई तहसीलों वह जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन करके आपके नाम ज्ञापन उपखंड अधिकारी, जिला कलेक्टर और उदयपुर के संभागीय आयुक्त के जरिए भेजे गए हैं। उन पर अब तक न तो कोई कार्यवाही की गई है और ना ही लोकतांत्रिक मोर्चा में शरीक दलों को बुला कर कोई बातचीत की गई है। कांग्रेस पार्टी ने गत विधानसभा चुनाव के वक्त जनता से जो वादे किए थे, उसमें किसानों की कर्जा माफी, संविदा कर्मियों को नियमित नौकरी देना, बेरोजगारी भत्ता देना इत्यादि अभी तक लागू नहीं की गई है। किसानों का सहकारी समितियों के द्वारा दिया गया कुछ ऋण माफ किए गए हैं, जो कि लगभग 5000 करोड़ के होंगे, लेकिन किसानों का बड़ा कर्जा शेड्यूल्ड बैंक्स के द्वारा दिया हुआ है जो कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार करीब 52000 करोड़ है, वह कर्जा आज तक माफ नहीं किया गया है, अब तो आप इसे कभी बैंकों के माथे और कभी केंद्र के माथे मढ़ कर मुक्त होना चाहते हैं, जो कि पूर्णतया अनुचित है क्योंकि ऋण माफी का वादा आपने किया था केंद्रीय बैंकों ने नहीं। इसलिए आपको किसानों के सम्पूर्ण ऋण माफी के वादे को तुरंत निभाना चाहिए।
आप जानते ही हैं कि राज्य में काफी बड़ी संख्या में लगभग स्वीकृत पदों के एक तिहाई पद ठेका पद्धति और कुछ एजेंसियों के जरिए लगाए गए लोग हैं। ठेका पद्धति पर कई लोग अपनी आधी उम्र लगा चुके हैं लेकिन नियमित नियुक्ति की उम्मीद उनकी अभी तक पूरी नहीं हुई है यह घोर अन्याय है। आपको वादे के मुताबिक इन संविदा कर्मियों के साथ न्याय करना चाहिए। कृषि बीमा किसानों के लिए सुविधा के बजाय एक मकड़जाल और शोषण का जरिया साबित हो रहा है। इस कृषि बीमा के जरिए केवल बीमा कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, किसानों के साथ कोई जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार नहीं किया जा रहा है। सरकार उनके लिए कोई पहल नहीं कर रही है। इस कारण किसान लगातार शोषण के शिकार हैं, कृषि बीमा को जिम्मेदारी पूर्ण, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के उपाय तुरंत करें। किसानों के लिए बिजली का सवाल, अच्छे और सस्ते बीजों का सवाल, फसली लोन का सवाल, बड़े प्रश्न हैं। इनको हल करने के लिए भी अविलंब चाक-चौबंद मैकेनिज्म सक्रिय करने का कष्ट करें। राज्य में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों व अल्पसंख्यकों के साथ बेहिसाब भेदभाव पूर्ण व्यवहार, अन्याय व अत्याचार जारी है। महिलाओं के साथ भी प्रतिदिन अत्याचारों व शोषण की वारदातें लगातार हो रही हैं। गृह मंत्रालय का प्रभार भी स्वयं आप ही के पास है, इसलिए इस बाबत तुरंत संरक्षण दिलाने की व मदद करने की कार्रवाई की जाए।
आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में जल, जंगल, जमीन और जंगलात के पट्टे आदिवासियों के जीवन का आधार हैं, कई वर्षों से बल्कि कुछ जगह पर दो तीन पीढ़ी से आदिवासियों के लिए स्पष्ट क़ानून बनने के बावजूद पट्टों से वंचित रखा जा रहा है। इसका भी अविलंब समाधान कराने का कष्ट करें। संविधान की अनुसूची 5 के तहत पीईएसए कानून कड़ाई से लागू किया जाए। साथ ही जंगलात पर आदिवासियों के पुश्तैनी अधिकार और सामूहिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
हमें बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि राज्य में श्रमिकों के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है वह भारतीय जनता पार्टी सरकारों व केंद्र सरकार से कतई अलग नहीं है। श्रमिकों को पूरे तौर पर नियोजकों के रहमों करम पर छोड़ दिया गया है। श्रम विभाग पूर्णता शक्तिहीन बना दिया गया है। यह आप की सरकार की नीतियों और निर्देशों के कारण हो रहा है, क्योंकि सरकार और उच्च ब्यूरोक्रेसी श्रमिक विरोधी है। आपसे अनुरोध है कि आप श्रमिक विरोधी रवैये को त्याग कर श्रमिकों के हित में कदम उठाएं। देश के संविधान में सभी नागरिकों को गरिमामय जीवन जीने का अधिकार दिया गया है जो कि राज्य में श्रमिकों को अवश्य दिया जाना चाहिए, ऐसा करने के लिए न्यूनतम मजदूरी 600 रूपए प्रतिदिन बिना विलंब की जानी चाहिए। भारत सरकार द्वारा श्रमिकों के हित के सभी कानूनों को चार कोड में समाहित करके श्रमिकों के साथ बड़ा अन्याय किया गया है। आपसे अनुरोध है कि राज्य में श्रमिक विरोधी संशोधनों को लागू नहीं करने की घोषणा करें तथा केंद्र द्वारा बनाए गए श्रमिक विरोधी कोड राज्य में लागू नहीं करने की भी घोषणा करने का कष्ट करें।
राज्य में लगातार सांप्रदायिक घटनाएं हो रही हैं, करौली, जोधपुर से होकर उदयपुर तक की घटनाओं ने बहुत कुछ उजागर कर दिया है। उदयपुर में आपकी सरकार यह स्वीकार कर चुकी है कि कन्हैया लाल तेली के हत्यारों के तार अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के साथ जुड़े हुए थे, अब एनआईए की जांच में भी इसी तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं। सांप्रदायिक शक्तियों के उभार की जानकारियां जुटाने व उसका आकलन करने में आप की सरकार का खुफिया तंत्र पूरे तौर पर नाकारा साबित हुआ है और गृह मंत्री होने के नाते आप स्वयं इसके लिए जिम्मेदार हैं। छोटे स्तर के कुछ कर्मचारियों अधिकारियों का निलंबन या किसी अफसर को स्थानांतरित करना मामले को बहुत हल्का आंकने का रवैया स्पष्ट होता है। हत्या का शिकार कन्हैया लाल लगातार पंद्रह दिन तक अपनी जान बचाने की गुहार करता रहा, लेकिन एसपी और आईजी ऑफिस के निकटतम थाने में सांप्रदायिक कटुता से जुड़ा मामला गैर जिम्मेदाराना तरीके से डील किया जाता रहा। इसका स्पष्ट कारण यह है कि बड़े अधिकारी बड़ी घूस देकर पोस्टिंग प्राप्त करते हैं तथा पद ग्रहण करने के बाद खुद के द्वारा चुकाई गई घूस वह आगे बड़ी कमाई करने के एक सूत्री धंधे में लग जाते हैं।
श्रीमान नीचे से लेकर ऊपर तक भ्रष्टाचार का यह रोग विद्यमान है, इसके लिए आप यदि जिम्मेदार नहीं हैं तो फिर कौन जिम्मेदार है ? आप अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए नीचे के लोगों पर लोक दिखावे के लिए हल्की कार्यवाही करके जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, इसका स्वत स्फूर्त परिणाम यह हो रहा है कि राज्य में धर्मांधता वादी ताकते निरंतर मजबूत हो रही हैं, साथ ही सक्रिय भी हो रही हैं, जो कि समाज के लिए और खास तौर पर गरीब तबकों के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। उदयपुर में आपकी सरकार ने कर्फ्यू को भी मजाक बना दिया, जब 10-15 हजार के जुलूस कर्फ्यू के दौरान ही निकाले जा रहे थे कभी तथाकथित संतों की अगुवाही में मौन जुलूस के नाम पर, कभी धार्मिक जुलूस के नाम पर, यह भी एक प्रकार से धर्मांधता के आगे व सांप्रदायिकता के आगे आपकी सरकार ने घुटने टेकने का काम कर दिया है और कर्फ्यू को मजाक बना दिया है। आपने राम की विजय और रावण की विजय वाली मनोवृति अपने शासन में अपना रखी है, जिसकी कीमत राजस्थान की जनता को आज चुकानी पड़ रही है और आने वाली पीढ़ियों को भी चुकानी पड़ेगी।
आपसे निवेदन है की जनता के सभी वर्गों के हितों की रक्षा के कदम उठाएं। बेरोजगार नौजवानों को आपकी पार्टी ने बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था वह भी एक धोखा साबित हुआ, भांति भांति के बहाने लगाकर नौजवानों को उलझा दिया है। परीक्षाएं बार-बार स्थगित की जाती हैं, पारदर्शी परीक्षा सिस्टम आपकी सरकार के पास है नहीं, हर परीक्षा में तिकड़मी संस्थान अपने नकल गिरोहों के जरिए नकल करवाने में कामयाब हो जाते हैं। यह नौजवानों के साथ वह उनकी कड़ी मेहनत के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। इसका आपने अब तक कोई समाधान नहीं निकाला है। परीक्षा फार्म कुछ ही वर्षों में कई गुना महंगे हो गए, जिसके प्रत्यक्ष दर्शन आरपीएससी कार्यालय की तड़क-भड़क में किए जा सकते हैं। जहां की साधारण कार्यालय व्यवस्था आजकल एक कारपोरेट कार्यालय जैसी बना दी गई है। वह भी बेरोजगार नौजवानों से रकम वसूल करके। यह सभी नौजवानों के साथ अन्याय है। हम मांग करते हैं कि किसी भी परीक्षा का फार्म पूरे तौर पर अभ्यर्थियों को निशुल्क दिया जाए, अगर शुल्क ही लेना है तो परीक्षा फार्म की लागत से अधिक हरगिज़ नहीं लिया जाना चाहिए। परीक्षाओं को कंडक्ट करना सरकार की जिम्मेदारी है, यह खर्चा बेरोजगार नौजवानों और उनके अभिभावकों से नहीं वसूला जाना चाहिए।
मैं आशा करता हूं कि जनता की जिंदगी से जुड़े हुए उक्त सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर आप अविलंब कार्रवाई करेंगे। धन्यवाद।
(दिनांक 22 जुलाई 2022)
अर्जुन देथा
प्रदेश अध्यक्ष
जनता दल (सेक्यूलर) राजस्थान।
8696651984, 8290737511

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