सत्ता व सियासत के फेरे में "अधरझूल" हुए जोधपुर के पत्रकार

सत्ता व सियासत के फेरे में "अधरझूल" हुए जोधपुर के पत्रकार 

एम आर मलकानी 


''भाई लोग'' बच्चू भाई के तांगे से उतर गये। अंगुली छुड़ा पल्लू पकड़ा तो खाकी के उपर सफारी अडाये मुछमुंडे मुसंडो ने धक्के मारे, खींचातानी की। कमरे से बाहर का रास्ता पकड़ाया? कोई नहीं! कुछ पाने को बहुत कुछ खोना भी पड़ता है। कहते हैं ना कि मलाई ना सही दौना चाट कर ही काम चल सकता है। 

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से उन्हीं के शहर जोधपुर के कई पत्रकार नाराज हैं। नाराज उपर से हैं। अन्दर से तो डरे सहमे से है। पिछले दिनों सूरसागर थाने में 26 पत्रकारों और कुछ न्यूज चैनल्स के खिलाफ पुलिस ने एक मुकदमा दर्ज कर मारा कि इन्होंने झूठी और फर्जी न्यूज चला दी। भावना भड़का दी। पुलिस की ये भभकी 'कच्ची छाती' के कुछ भाई लोगों पर बहुत भारी पड़ गई। पुलिस ने गिरफ्तारी की तलवार लटका रखी है। डर तो है ही। फिर डर तो डर ही होता है। सबको ही लगता है और सब कोई दैवी अवतार थोड़ा ना है। 


अशोक गहलोत पिछले दिनों तीन दिन के दौरे पर जोधपुर आये थे। उम्मीद को पंख लगे। एयरपोर्ट पर कार में बैठते ही मुख्यमंत्री से कहा ''उस दिन हम से ऐसा कुछ चल गया।'' सीएम ने कहा अच्छा ! मानो वे अनजान हों ? (जान गैलो) और ड्राईवर को इशारा दिया। कार ने फर्राटा भर। बात वहीं पंचर। अगले दिन सुबह-सुबह गहलोत सभी प्रोग्राम रद्द कर जयपुर निकल गये। उदयपुर का मोटा तांता जो हो गया था।तो अब? 

तो अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे निजी दौरे पर जोधपुर आई। उनका हेलीकॉप्टर सीधे उम्मेद भवन उतरा। हमेश उम्मेद भवन या अजीत भवन में रात रुकने वाली महारानी साहिब शायद पहली बार सर्किट हाऊस के रुम नम्बर एक में रुकी। सुबह 10 बजे वे नींद से जगी। पब्लिक को पता चला कि मैडम सूरज चढ़ने के बाद जगती है। बहरहाल ! पार्टी के नेता कार्यकर्ताओं से ज्यादा 'भाई लोग' उतावले हुये जा रहे थे कि मैडम मिल ले तो राजधानी तक संदेश पहुंचा दें कि हमने 'पाला' बदल लिया है। 

संदेश था, अशोक गहलोत शायद भभकी में आ जाये। गहलोत के कंधे चढ़े और अब तक अंगुली पकड़े रहे लिस्टेड 'भाई लोगों' ने बच्चू भाई के तांगे से उतर कर 'पल्लू' पकड़ लिया। बोले - ''मैडम कानून व्यवस्था की हालत बहुत खराब है। आपके बिना कुछ नहीं सुधरेगा।'' वसुंधरा राजे घाघ सियासतदां। बुआ ने कई बबुआ देखे हैं। पेट दर्द था सिर दर्द की पूड़ियां पकड़ा दी। अशोक गहलोत या सरकार के बारे में, कानून व्यवस्था या नूपुर शर्मा तक को लेकर किये सवालों पर कोई चोट नहीं की। मजा ही नहीं आया। कुछ सवाल तो टाल गई। उन्हें यहां तक भी याद दिलाया कि अशोक गहलोत आपके शासन को पोपा बाई का राज कहते थे। गजेंद्र सिंह शेखावत और हनुमान बेलीवल क्या क्या नहीं कहते हैं कि - दोनों अन्दरखाने मिले हुये हैं। म्है फैंकूं खुन्सडो, तूं रख जै टैक। मगर राजे तो राजे है। राजनीति की चौसर उनकी खुद की है। ख़ैर ! 

'भाई लोगों' की कोई ज्यादा पार पड़ी नहीं ? तो पत्रकारों ने फोटो खिंचवाने की बात कही। मेडम ने कहा - आज पहले फोटोग्राफर। ये हमेशा फोटो खींचने में ही रहते हैं। दो ढाई लाख कीमत के खुद के कैमरे छोड़ शुरु हो लिये। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बॉडीगार्डस ने मोर्चा पकड़ा। फोटो खिंचते गये और पीएसओ हाथ पकड़-पकड़ कर कमरे से बाहर धकियाते रहे। तुरंत बाद, पत्रकार महारानी साहिबा संग फोटो लिवाने लगे। कई मौकों पर अशोक गहलोत के कंधे चढ़े होने का दम भरने और ऊंची ऊंची फैंकते रहने वालों में से कई उतावले और उत्साही हुये जा रहे थे।मानो नारा था - तूं नहीं और सही, और नहीं और। 

फोटो में मेडम से पर्सनल होना पता नहीं चल रहा था, तो कुछ में सेल्फी खिंचवाने की होड़ लग गई। खाकी के उपर सफारी चढ़ाये मुछमुंडे मुसंडों ने फिर तो साहब सबको ही कमरे से बाहर का रास्ता दिखाया। पर कोई नहीं; धक्के क्या होते हैं ? सेल्फी तो हो गई ना ! 

अशोक गहलोत भी कम 'माया' नहीं है। जिन पत्रकारों पर मुकदमा करवाया उनमें ज्यादातर ब्राह्मण हैं। उन्हें और उनके समाज को साधने के लिये जोधपुर में आरपीएस से प्रमोटी आईपीएस रवि दत्त गौड़ को पुलिस कमीशनर लगा दिया। ईद पर हुये उपद्रव के मुकदमे में कई ब्राह्मण युवक भी फंसें हैं। उन्हें भी तो राजी करना है। चीफ सेक्रटरी उषा शर्मा की ब्राह्मण नेट से भी इस पोस्टिंग को जोड़ा गया। लेकिन, लेकिन रवि दत्त गौड़ ''हटो - बचो'' की तर्ज पर ही काम करते रहे हैं। क्या फायदा देंगे, दूर दूर तक नहीं 'टिप' रहा। 

तो अब से जोधपुर में पुराने स्टाइल की पुलिसिंग होगी। जयपुर में जब पुस्तक मेला हुआ और सलमान रुश्दी उछले तो रवि गौड़ के नाम से लोग रु-ब-रु हुये थे। तब से उनकी वर्किंग स्टाइल ''हटो - बचो'' वाली है। वो टाइम और था। अशोक जी के लिये रवि दत्त गौड़ ब्राह्मण वोट साध देंगे, नहीं लगता और ना ही पत्रकारों वाले मतीरों के भारे को उठा पायें ? कुछ भी हो, आज कई ने पाला बदल लिया, ताकि सनद रहे।
(लेखक जोधपुर के वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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