टूटी सड़कें, बहते सीवरेज और गन्दगी के ढेर से बदहाल राजस्थान की राजधानी

टूटी सड़कें, बहते सीवरेज और गन्दगी के ढेर से बदहाल राजस्थान की राजधानी 
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राजधानी में दो नगर निगम और छह कांग्रेसी विधायक, जिनमें तीन कैबिनेट मंत्री फिर भी विश्व प्रसिद्ध पिंक सिटी का बुरा हाल ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान की राजधानी जयपुर, जो कि पूरे विश्व में पिंक सिटी के नाम से प्रसिद्ध है। यहां हर साल हजारों पर्यटक देश विदेश से आते हैं। लेकिन इन दिनों यह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। टूटी सड़कों, बहते सीवरेज के गन्दे पानी और कचरे के ढेर की सड़ांध ने राजधानी में रहने वालों और यहां किसी काम से आने वालों का जीना दुभर कर रखा है।


यह स्थिति तब है जब 2020 में विकास के नाम पर अशोक गहलोत सरकार ने राजधानी को दो नगर निगमों में विभाजित कर दिया, ग्रेटर और हैरिटेज। ग्रेटर नगर निगम में भाजपा का राज है और हैरिटेज में कांग्रेस का। ग्रेटर चूंकि अधिकतर न‌ए शहर का क्षेत्र है और हैरिटेज पुराने का। हैरिटेज क्षेत्र का हाल बहुत बुरा है। हर चौराहा और गली गन्दगी की गिरफ्त में है। नया शहर होते हुए ग्रेटर का भी कोई ज्यादा अच्छा हाल नहीं है। शहर की गलियों और काॅलोनियों की सड़कें तो क्या मुख्य सड़कों का भी बुरा हाल है। शहर की मुख्य सड़क मिर्जा इस्माईल (एम‌आई) रोड पर तो एक साल से इतने गड्ढे बने हुए हैं कि उनकी शायद ही कोई गिनती कर सके।


यह सब तब है जब राजधानी के दस विधायकों में छह सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के हैं और चार भाजपा के, दोनों ही पार्टियां विकास का ढिंढोरा पीटने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ती हैं। कांग्रेस के छह विधायकों में तीन कैबिनेट मंत्री हैं डॉक्टर महेश जोशी हवा महल, प्रताप सिंह खाचरियावास सिविल लाइंस और लालचंद कटारिया झोटवाड़ा। तीनों ही बड़े महकमों के ताकतवर मंत्री हैं और इनकी गहलोत शासन में अच्छी चलती भी है। शहर में इनकी मर्ज़ी के बगैर गहलोत सरकार कुछ नहीं कर सकती। 

दो विधायक रफीक खान आदर्श नगर और अमीन कागजी क्रमशः अल्पसंख्यक आयोग और हज कमेटी के चेयरमैन हैं। यानी सभी कांग्रेसी विधायकों के मजे हैं, परेशान है तो जनता। आमेर से विधायक भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर सतीश पूनिया हैं, जो खूब धूमधड़ाका विरोध प्रदर्शन में गहलोत सरकार के खिलाफ करते हैं। लेकिन जयपुर शहर की इस दुर्दशा पर कभी सड़क जाम कर नहीं बैठते हैं, क्योंकि ग्रेटर नगर निगम में उनका भी राज है। राजधानी के पार्षदों, नगर निगम व जेडीए अधिकारियों और सत्ता व विपक्ष के नेताओं इन सबके मजे ही मजे हैं, क्योंकि विकास व स्मार्ट सिटी के नाम की चांदी कूटी जा रही है, यहां तक के कचरा उठवाने में भी लाभ ही लाभ है, बस बदहाल तो इन करम फरमाओं के जरिए जनता है।  
(24/08/2022)
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