राजस्थान कायमखानी महासभा और उसकी AGM के पीछे का षड्यंत्र ?
राजस्थान कायमखानी महासभा और उसकी AGM के पीछे का षड्यंत्र ?
****************************** ****
जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। AGM (असेम्बली ऑफ जनरल मेम्बर/एनुअल जनरल मीटिंग या वार्षिक आम सभा) किसी भी संगठन/संस्था की रीढ़ होती है। संगठन की एक तरह से यही मालिक होती है। संगठन का हर पदाधिकारी एजीएम के प्रति उत्तरदायी होता है। ऐसा ही राजस्थान कायमखानी महासभा में भी है, जो 1979-80 में सोसायटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हुई थी। लेकिन दुर्भाग्य से राजनीतिक षड्यंत्र और कायमखानी क़ौम के प्रबुद्ध सरदारों की लापरवाही, खुदगर्जी या यह कहें कि "तुम मुझे हाजी साहब कहो और मैं तुम्हें काजी साहब कहूंगा" वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए पिछले 20 साल में न कभी एजीएम बुलाई गई और ना ही ईमानदारी से एजीएम बनाई गई। लेकिन इतना जरूर हुआ कि दो तीन बार चुनाव की नौटंकी हुई, चुनाव के नाम पर फसाद व फर्जीवाड़ा हुआ और मामला कोर्ट में पहुंच गया। नीयत में इधर भी खौट था और उधर भी। हाँ, यह कह सकते हो कि एक पक्ष की नीयत में दो आने खौट था और दूसरे पक्ष के चार आने, लेकिन खौट दोनों तरफ था। जो आज भी है, जिसका खामियाजा पूरी कौम भुगत रही है।
कोर्ट कचहरी विवाद, चुनाव के नाम पर एक दशक पहले हुए बिसाऊ के लाठी काण्ड और डीडवाना के मिर्ची काण्ड के बाद क़ौम के कुछ सुलझे हुए फिक्रमंद युवाओं और सरदारों ने अच्छी उम्मीद में कोशिश शुरू की। इक़रा पत्रिका ने भी कई खबरें व लेख इस सन्दर्भ में प्रकाशित किए। साल आया 2015, तत्कालीन संयोजक मरहूम जी ख़ान साहब ने अपने पद से इस्तीफा दिया और कर्नल शौकत साहब को नया संयोजक बनाया गया, हालांकि संयोजक पद महासभा के संविधान में नहीं है। फिर भी अच्छी उम्मीद में लोगों ने सब कुछ स्वीकार किया। दोनों पक्षों की सहमति से 151 लोगों की सलाहकार समिति बनाई गई और काम सौंपा गया हाईकोर्ट मामले को वापस लेकर छह महीने में फ्रेश इलेक्शन करवाने का। आज तक इस सलाहाकार समिति की एक बार भी बैठक नहीं बुलाई गई। इस सलाहाकार समिति के सभी सदस्यों के नाम व घोषणा की खबर तब इक़रा पत्रिका में प्रकाशित की गई थी।
साल आया 2020, जबरदस्त प्रेशर के बाद चुनाव के लिए सदस्यता अभियान की घोषणा की गई, लेकिन कोरोना महामारी की शुरूआत की वजह से इसे रोक दिया गया। फिर साल आया 2021, हाईकोर्ट का मामला वापस लेने के लिए एक 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया और मामला वापस हुआ। फिर तीन लोगों ने मिलकर 21 सदस्यीय चुनाव कमेटी बनाई और सदस्यता अभियान की घोषणा की। यह पूरी तरह से अवैध थी, क्योंकि यह काम एजीएम को करना था, लेकिन एजीएम नहीं बुलाई गई। कोढ़ में खाज वाली कहावत यह चरितार्थ हुई कि इन 21 सदस्यों को बनाते वक्त गुट दो की बजाए तीन हो गए तथा तीनों गुटों के आकाओं ने योग्यता से सिलेक्शन करने की बजाए इसमें भाई भतीजावाद किया और अपने नजदीकी लोगों और रिश्तेदारों की चुनाव कमेटी बना दी। यह कायमखानी क़ौम के साथ सरेआम खिलवाड़ नहीं हुआ तो फिर क्या हुआ ?
चुनाव कमेटी ने संयोजक कर्नल शौकत साहब के नेतृत्व में काम करना शुरू किया और अक्टूबर 2021 से तीन महीने का सदस्यता अभियान चलाना शुरू कर दिया। महासभा के संविधान को ताक में रख कर मनमर्जी की फीस रख दी और मनमर्जी के निर्णय ले लिए। फीस 25 से बढ़ाकर सीधे 500 रूपए कर दी, ताकि आम व गरीब कायमखानी महासभा का सदस्य नहीं बन सके और चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से राजनेताओं और कुछ धन्नासेठों की चौखट की गुलाम बना दी जाए। दिसम्बर तक तीन महीने में मुश्किल से तीन हज़ार मेम्बर बने, क्योंकि फीस ज्यादा थी। लेकिन फिर एक महीना बढा दिया गया और फिर राजनेताओं व धन्नासेठों की एंट्री हुई, धड़ल्ले से मेम्बर बनाए गए, हर तरह की हेराफेरी व अनियमितता बरती गई। हर गुट ने अपने तीन चार हज़ार वोट पुख्ता कर लिए। जिसने भी सवाल उठाए उसको तीनों गुटों ने क़ौम का दुश्मन, गद्दार, असामाजिक तत्व आदि शब्दों से सोशल मीडिया पर ट्रोल किया। इस सारे खेल में अधिकतर बड़े सरदार एक तरह से खामोश तमाशबीन बने बैठे रहे।
विचित्र बात यह भी हुई कि 31 जनवरी 2022 को सदस्यता अभियान समाप्त होने के बावजूद सदस्यता सूची सार्वजनिक नहीं की गई तथा बैक डेट में अपनी मनमर्जी से फरवरी में भी सदस्यता की रसीदें कटती रही तथा बार बार कुछ लोगों द्वारा हाय तौबा करने के बाद मार्च के अन्तिम सप्ताह में जिले वाइज़ किश्तों में सूची जारी करनी शुरू की। जिसमें करीब 32 अन्य जातियों के 1708 लोगों (गैर कायमखानियों) को भी सदस्य बना कर कायमखानी क़ौम की वंशावली ही बदल दी। सवाल करने वालों को लगातार किए जा रहे ट्रोल और कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली को खत्म करने के इस षड्यंत्र के खिलाफ़ कुछ लोग लामबन्द हुए तथा 2 अप्रैल 2022 को "कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति" का गठन किया।
कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति की चार बड़ी मीटिंग, सूचनार्थ नोटिस, लीगल नोटिस और सोशल मीडिया पर की गई तमाम गुजारिश के बावजूद संयोजक महोदय और चुनाव कमेटी ने न किसी बात का जवाब दिया और ना ही कोई सुधार किया तथा इस बीच बार बार यह जरूर सुनने को मिला कि एजीएम बुलाई जाएगी, फिर उसमें तमाम जरूरी फैसले ले लिए जाएंगे। यानी संयोजक महोदय और चुनाव कमेटी ने जो असंवैधानिक निर्णय लिए और कायमखानी क़ौम की विरासत एवं वंशावली के साथ जो खिलवाड़ किया है, उन कर्मकाण्डों पर अब यह लोग एजीएम की मुहर लगवाना चाहते हैं ? एजीएम तो बहुत पहले बुलानी चाहिए थी चुनाव कमेटी गठित होने से भी पहले, क्योंकि चुनाव कमेटी के गठन का अधिकार महासभा के संविधान ने एजीएम को दिया है ना कि किसी पंच पटेल को।
अब क्या किया जाए ?
---------------------------
यकीनन एजीएम बुलाई जाए और उसमें संविधान के मुताबिक 21 लोगों की नई कमेटी गठित की जाए तथा महासभा का सम्पूर्ण रिकाॅर्ड, हिसाब किताब उस नई कमेटी को सौंपा जाए। साथ ही समस्त गैर कायमखानी सदस्यों को सूची से हटाया जाए तथा संविधान की अक्षरशः पालना करते हुए नई कमेटी शीघ्रता से फ्रेश इलेक्शन करवाए।
अगर ऐसा नहीं होता है, तो कौम के फिक्रमंद सरदार जमा हों और एक नई 21 लोगों की कमेटी गठित करें और महासभा का एक कार्यवाहक अध्यक्ष बनाएं तथा महासभा को सुचारू रूप से संचालित करने एवं नए चुनाव कराने का प्रयास करें।
(05-08-2022)
@एम फारूक़ ख़ान
आजीवन सदस्य एवं एजीएम सदस्य
राजस्थान कायमखानी महासभा।
------------------------------ --------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
A/c no. 613900 55000 00252
IKRA PATRIKA
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
------------------------------ -----------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
------------------------------ ------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
------------------------------ ------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
09602992087, 09414361522
©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.

Comments
Post a Comment