ख़ुदा के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं...

ख़ुदा के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं...

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सीआई फूल मोहम्मद हत्याकांड में डीएसपी सहित 30 लोगों को हुई उम्र कैद की सज़ा
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हत्याकांड के बाद मरहूम जी ख़ान साहब के नेतृत्व में प्रदेश में निकाली थी "शहीद सीआई फूल मोहम्मद न्याय यात्रा"
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जयपुर/सवाई माधोपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। एक कहावत है कि ख़ुदा के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं। अगर प्रयास जारी रहे और तथ्यों के साथ मजबूती से अपना पक्ष रखा जाए, तो एक दिन न्याय जरूर मिलता है। यही कहावत चरितार्थ हुई शहीद सीआई फूल मोहम्मद केस में। करीब 11 साल बाद माननीय न्यायालय ने 18 नवम्बर को तत्कालीन डीएसपी सहित 30 लोगों को उम्र कैद की सज़ा दी है। वहीं 49 लोगों के खिलाफ सबूत नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया।


बात 2011 की है, राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के मानटाउन थाना क्षेत्र के सूरवाल गांव में 17 मार्च को बुजुर्ग महिला दाखा देवी के हत्यारों को गिरफ्तार करने और उनके परिजनों को मुआवजे की मांग को लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान राजेश मीणा व बनवारी लाल मीणा पेट्रोल से भरी बोतलें लेकर वहां स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए व आत्महत्या की धमकी देने लग गए। बनवारी को लोगों ने समझाकर टंकी से नीचे उतार लिया, लेकिन राजेश ने खुद पर पेट्रोल छिड़कर आग लगा ली और टंकी से नीचे कूद गया।


इस घटनाक्रम से वहां मौजूद लोग उग्र हो गए और उन्होंने वहां तैनात मानटाउन थानाधिकारी सीआई फूल मोहम्मद व पुलिस जवानों पर पथराव करना शुरू कर दिया। फूल मोहम्मद ने राजेश को बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने उन पर हमला कर दिया और फिर उनकी जीप पर पेट्रोल छिड़ककर उन्हें ज़िन्दा जला दिया। साथी पुलिस कर्मी उन्हें बचाने की बजाए खुद की जान बचाने के लिए भागखड़े हुए।


इस हत्याकांड के बाद प्रदेश भर में उग्र प्रदर्शन हुए, मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेसी नेताओं ने लीपापोती करने की कोशिश की। लेकिन लोगों का रोष देखकर सरकार ने सीबीआई जांच कराने की घोषणा की। सीबीआई ने मामले में 89 लोगों को आरोपी बनाया, जिनमें से 3 अब भी फरार हैं। पांच की मौत हो चुकी है। वहीं 2 बाल अपचारी निकले।

इस हत्याकांड के बाद प्रदेश भर में जन संगठनों ने आन्दोलन किया। बड़ी बड़ी रैलियां व धरने प्रदर्शन हुए। सीआई फूल मोहम्मद की शहादत के कुछ दिनों बाद आठ दिवसीय "शहीद सीआई फूल मोहम्मद न्याय यात्रा" राजस्थान के 12 जिलों में निकाली गई। जिसके लिए तीन दर्जन से अधिक संगठनों का "एनजीओ महासंघ" नाम से एक संयुक्त प्लेटफॉर्म बनाया गया, जिसका संयोजक रिटायर्ड एडीएम डेवलपमेंट मरहूम जी ख़ान साहब को बनाया गया। उनके नेतृत्व में इस न्याय यात्रा की आठ दिन में राजधानी जयपुर सहित 12 जिलों में 24 सभाएं व रैलियां आयोजित की गई थी। समापन सभा जयपुर के उद्योग मैदान में आयोजित की गई थी, जो शाम तक चली और इस सभा में 46 वक्ताओं ने संबोधित करते हुए गहलोत सरकार को जमकर खरी खोटी सुनाई थी। इस सम्पूर्ण न्याय यात्रा में इक़रा पत्रिका के सम्पादक एम फ़ारूक़ खान और अन्य साथी भी शरीक रहे और जयपुर की समापन सभा का मंच संचालन भी एम फ़ारूक़ खान ने किया था।

इस प्रकरण में कांग्रेस के अधिकतर नेताओं ख़ासकर मुस्लिम नेताओं का रवैया बेहद अफसोसनाक रहा, चद्दर में पोटली की तरह बंधे हुए सीआई फूल मोहम्मद का शव देर रात को जयपुर लाया गया, रात में ही आनन फानन में पोस्टमार्टम किया गया। शव पूरा नहीं था, फिर भी दफन कर दिया गया। दफन भी शासन प्रशासन और कांग्रेसी नेताओं की कारस्तानी से उनके पैतृक गांव खीरवा (सीकर) में तय वक्त से पहले कर दिया गया, ताकि भीड़ नहीं बढ़े। इस वजह से लोगों का रोष और बढ़ा। अगले दिन उनका पंजा मिला, जिसकी कब्र अलग बनी, ऐसा अन्याय पूर्व में शायद ही किसी पुलिस अधिकारी के साथ हुआ हो। तब इस मुद्दे को इक़रा पत्रिका ने पूरी बेबाकी से उठाया था, 2013 में इक़रा पत्रिका के विशेषांक किस्त-2 "गहलोत राज का कम्यूनल चेहरा" में शहीद सीआई फूल मोहम्मद की पूरी दर्दभरी दास्तां प्रकाशित की थी।



खैर, ख़ुदा के घर देर है, लेकिन अंधेर नहीं। न्यायालय के लंबे ट्रायल के बाद 18 नवम्बर को एससी-एसटी स्पेशल कोर्ट ने उन 30 दोषियों को उम्र कैद के लिए सलाखों के पीछे भेज दिया, जिन्होंने फूल मोहम्मद को जिंदा जला दिया, जो उनकी सुरक्षा के लिए पहुंचा था। न्यायधीश पल्लवी शर्मा ने हत्याकांड के आरोपियों पर जुर्माना भी लगाया है। वसूला जाने वाला जुर्माना करीब 40 लाख रुपए फूल मोहम्मद के परिवार को दिया जाएगा।

दोषियों की सूची में सबसे चौकाने वाला नाम तत्कालीन डीएसपी महेंद्र सिंह का, जब फूल मोहम्मद को भीड़ ने सरकारी गाड़ी में जलाया उस वक्त महेंद्र सिंह वहीं मौजूद थे, लेकिन उन्होंने सीआई को बचाने का प्रयास तक नहीं किया। माननीय न्यायालय ने डीएसपी महेंद्र सिंह, राधेश्याम पुत्र ब्रजमोहन माली, परमानंद पुत्र रामनिवास, बबलू पुत्र रामनारायण, पृथ्वीराज, रामचरण, चिरंजीलाल, शेर सिंह, हरजी, रमेश मीणा पुत्र प्रहलाद, कालू पुत्र कोरिया, बजरंगा खटीक, मुरारी मीणा, चतुर्भुज मीणा, बनवारी पुत्र जगन्नाथ, रामकरण पुत्र हजारी, हंसराज उर्फ हंसा पुत्र रामकुमार, शंकर माली पुत्र कन्हैया, बनवारी लाल मीणा, धर्मेंद्र मीणा पुत्र सुरेश कुमार मीणा, योगेंद्र नाथ, बृजेश हनुमान पुत्र कन्हैया, रामजीलाल माखन सिंह, रामभरोसी मीणा, मोहन माली, मुकेश माली और श्यामलाल को उम्र कैद की सजा सुनाकर सलाखों के पीछे भेज दिया।
(22/11/2022)
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