शिक्षाविद और खिलाड़ी उस्मानी साहब नहीं रहे

शिक्षाविद और खिलाड़ी उस्मानी साहब नहीं रहे
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कुचामन सिटी (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। नागौर जिले का कुचामन सिटी कस्बा, जिसका नाम "कूचा ए अमन" (शान्ति की गली या मोहल्ला) से बना है। इस शहर में बहुत कुछ ख़ास है और इसी बहुत कुछ ख़ास की सूची में यहां के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, समाजसेवी और खिलाड़ी रफ़ीक़ अहमद उस्मानी साहब का नाम भी है, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनकी यादें हमेशा जिन्दा रहेंगी। उनका 17 दिसम्बर सनीचर को इंतकाल हो गया था। 

उस्मानी साहब के निधन पर कई गणमान्य लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उस्मानी साहब का जाना एक युग का अंत है। उनके निधन से शहर व इलाके को अपूरणीय क्षति पहुंची है। रफ़ीक़ अहमद उस्मानी साहब ने पहले शिक्षक और बाद में ज़िला शिक्षा अधिकारी पद पर रहते हुए नागौर ज़िले और कुचामन सिटी में शिक्षा के उत्थान के लिए बहुत काम किया। क्षेत्र में नई सरकारी स्कूलें खुलवाने और क्रमोन्नत करवाने में उनका अनुकरणीय योगदान रहा है। 

वे अपने विद्यार्थियों के बीच ‘गणित के जादूगर’ के नाम से मशहूर थे। वे मुश्किल से मुश्किल गणितीय फॉर्मूले को बहुत आसान तरीके से समझा देते थे। इसका फायदा यह हुआ कि विज्ञान और गणित की शिक्षा के रूप में कुचामन सिटी बहुत फला फूला और आज नतीजा यह है कि कुचामन सिटी शिक्षा के फलक पर एक चांद की तरह चमक रहा है। उनके शिष्य पूरी दुनिया में आज हर क्षेत्र में शहर, राज्य और देश का नाम रोशन कर रहे हैं। 

राजकीय सेवा से रिटायर्ड होने के बाद उन्होंने मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफ़ेयर सोसाइटी का गठन किया और इसके संरक्षक के नाते हज़ारों विद्यार्थी उनसे लाभान्वित हुए। उस्मानी साहब बहुत ही मंजे हुए फुटबॉल खिलाड़ी थे। वे राजस्थान फुटबॉल संघ के महासचिव पद पर रहे और अनुभवी रैफ़्री में उनका नाम गिना जाता है। राजस्थान के चंद गिने चुने मान्यता प्राप्त रैफ़्री में उनका का नाम आता है। 

जोधपुर विश्वविद्यालय से पढ़ाई के दौरान वे यूनिवर्सिटी कप्तान रहे और अन्तर विश्वविद्यालयी कई प्रतियोगिताओं में जोधपुर विश्वविद्यालय को उन्होंने जितवाया। राजस्थान की तरफ़ से कई मैच खेले और जीते। राष्ट्रीय फ़ुटबॉल मैच में वे राजस्थान की शान माने जाते थे। वे एक बेहतरीन मिड फ़ील्डर थे और कहा जाता है कि उनके पास बॉल आने के बाद इसे छीनना लगभग नामुमकिन होता था।

एक समाजसेवी के रूप में रफ़ीक़ अहमद उस्मानी साहब ने बहुत कार्य किया। शिक्षा के अतिरिक्त पर्यावरण और साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए उन्होंने इलाके में बहुत कुछ ख़ास किया। कुचामन नगर पालिका की तरफ से शिक्षा के क्षेत्र में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘कुचामन रत्न’ पुरस्कार पाने वाली वह पहली और अब तक की अकेली हस्ती हैं। एक शानदार कवि के नाते उनके लिखे गए कई देशप्रेमी गीतों का कम्पोजिशन आज भी चलन में है। उनकी कविता ‘हिन्दोस्तां, हिन्दोस्तां, फिर बने रश्के जहां’ आज भी लोगों के ज़हन में ताज़ा है।

उस्मानी साहब के कई विद्यार्थी भारतीय और राज्य प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए। केन्द्र, राज्य और सेना की सेवा में उनके बेशुमार विद्यार्थी चयनित हुए। ग़रीब और प्रतिभाशाली बच्चों को निशुल्क शिक्षा उनका सपना था और इस भावना को उन्होंने अंतिम सांस तक निभाया। वे पिछले कई दिनों से बीमार थे। उनका जयपुर में इलाज के दौरान इंतकाल हो गया। उनको उसी दिन कुचामन सिटी में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। क‌ई राजनेताओं, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और खिलाड़ियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी उनके इंतकाल पर परिजनों को शोक संदेश भेजा है।
(24/12/2022)
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