राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जीते बिना 2024 जीतना कांग्रेस के लिए असम्भव होगा

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जीते बिना 2024 जीतना कांग्रेस के लिए असम्भव होगा
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और राजस्थान में अशोक गहलोत के रहते करारी हार तय है, पिछले 20 साल के विधानसभा और लोकसभा चुनाव इस दावे के गवाह हैं।
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राहुल गांधी कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जो कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक की पैदल भारत जोड़ो यात्रा पर निकले हुए हैं। यह यात्रा निकालना उनका बहुत ही सराहनीय फैसला है। उनकी इस यात्रा से कांग्रेस की बासी कढ़ी में उबाल आ चुका है। जो मायूसी कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं में पिछले आठ साल से दिलो दिमाग में घर कर चुकी थी, वो इस यात्रा से कम हुई है और बेहतर तो यह हो कि लोकसभा चुनाव 2024 तक यह यात्रा जारी रहे और उन सभी लोकसभा क्षेत्रों में भी जाए, जहां अभी तक यह यात्रा नहीं पहुंची है।


कांग्रेस के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव जीतना बहुत जरूरी है और यह तभी सम्भव है जब विपक्ष का मजबूत गठबंधन हो और कांग्रेस के घर में ढंग से भारा-झाड़ी (साफ सफाई) हो, यानी गैर जरूरी और कुर्सी चिपकू नेताओं को पदों से हटाकर सिर्फ एक काम सौंपा जाए और वो है पार्टी के लिए तन, मन और धन लगाकर उसे चुनाव जिताएं। किसी किस्म की गुटबाजी और खुद के चेहरे व परिवार को प्रोत्साहन देने वाले नेताओं को स्पष्टता से ख़ामोश कर दिया जाए।

मल्लिकार्जुन खड़गे को कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना भी कांग्रेस लीडरशिप का सराहनीय फैसला है, वे दक्षिण भारत से हैं, दलित समुदाय से हैं, एक सुलझे हुए स्पष्टवादी व्यक्तित्व के मालिक हैं। हिन्दी पर भी उनकी अच्छी पकड़ है, एक अनुभवी और जाना पहचाना चेहरा हैं। नेहरू गांधी परिवार को उन्हें कागजी अध्यक्ष बनाकर रखने की बजाए फ्री हैंड देना चाहिए, ताकि पार्टी मजबूत हो। एक बात नेहरू गांधी परिवार को यह जान लेनी चाहिए कि आप कांग्रेस के मालिक और सिरमौर हो, मजबूत कांग्रेस की आपको जरूरत है या नहीं है, लेकिन देश और यहां की संवैधानिक व्यवस्था को मजबूत कांग्रेस की जरूरत है तथा मजबूत कांग्रेस तभी सम्भव है, जब उसे 50 साल पहले की कांग्रेस बनाकर चलाया जाए।

2024 का लोकसभा चुनाव जीतना कांग्रेस के लिए जरूरी है, चाहे यह जीत 2004 जितनी ही हो। लेकिन यह तब सम्भव होगा, जब लोकसभा चुनाव से चार महीने पहले दिसम्बर 2023 में राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव कांग्रेस जीते। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सियासी हालात सही लग रहे हैं और थोड़ा सम्भलकर व मजबूत रणनीति से चुनाव लड़ा जाए तो जीत निश्चित है। लेकिन राजस्थान के हालात सही नहीं हैं। राजस्थान तभी जीता जा सकता है, जब अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाए और एक नया व सक्षम चेहरा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया जाए।

यह इसलिए जरूरी है कि अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस कभी चुनाव नहीं जीत पाई है। पिछले 20 साल में राजस्थान के विधानसभा और लोकसभा चुनाव का परिणाम देखें तो यह स्पष्ट है कि अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की बुरी हार हुई है, कांग्रेस ने जो चुनाव जीता है, वो किसी और के नाम व नेतृत्व में जीता है तथा सत्ता जरूर तिकड़म या भाग्य से गहलोत को मिली है। 2013 का विधानसभा चुनाव जिसमें कांग्रेस को गहलोत के नेतृत्व में सिर्फ 21 सीटें मिली, ऐसी हार कांग्रेस की राजस्थान में कभी नहीं हुई, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में तो कांग्रेस का ऐतिहासिक सफाया हो गया, सभी 25 सीटें कांग्रेस हार ग‌ई थी।

इसके अलावा राजस्थान में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए वर्तमान विधायकों के भी बड़ी संख्या में टिकट काटने पड़ेंगे, जिस तरह गुजरात में भाजपा ने काटे हैं। न‌ए लोगों को मौका देकर पार्टी एंटी इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी भावना) से बच सकती है। अगर यह दोनों कार्य नहीं किए तो कांग्रेस का चुनाव जीतना तो दूर की बात वो 50 का आंकड़ा भी शायद ही छू पाए। फिर चार महीने बाद लोकसभा चुनाव में परिणाम कैसा होगा, वो सबको मालूम है।
(24/12/2022)
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