न‌ई पीढ़ी बनाम संस्कार, सहयोग और सेवा

 

न‌ई पीढ़ी बनाम संस्कार, सहयोग और सेवा
********************
जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका) आधुनिकता की चकाचौंध और बढ़ती भौतिकवादी सोच से बहुत सी चीजें मानव छोड़ता जा रहा है। न‌ई पीढ़ी का अजीब हाल है। वो एक कटी पतंग बनती जा रही है। परिवार, रिश्ते-नाते सब महदूद (सीमित) होते जा रहे हैं, मफाद परस्ती बढ़ती जा रही है। ऐसे में हर इन्सान परेशान है, जिसके पास अथाह सम्पत्ति, रहने के लिए आलीशान बंगला और चलने के लिए लग्जरी गाड़ी है वो भी परेशान है और जिसके पास कुछ भी नहीं है, वो भी परेशान है। सब्र (संतोष) का तो मानो इंतकाल ही हो गया है।


जितने बड़े लोग हैं उतने ही उनके परिवार क्रेश होते जा रहे हैं, जितने बड़े अफसर उतने ही ज्यादा वे अपनों से कटे हुए हैं। इन्सानी रिश्ता सोशल मीडिया तक महदूद होता जा रहा है, गुड मॉर्निंग, गुड नाईट, बधाई, शुभकामना, मुबारकबाद, नमन, दुआ ए मग्फिरत, भावभीनी श्रद्धांजलि जैसे शब्द सोशल मीडिया पर दिन रात इधर से उधर चलते रहते हैं। इंटरनेट व टेक्नोलॉजी ने सम्पर्क बढ़ा दिया, इसने पूरी दुनिया को मुट्ठी में कर दिया, लेकिन बदले में दिलों को भी सिकोड़ दिया है।

हर आदमी आज यह कह रहा है कि पहले ऐसा नहीं होता था, वैसा नहीं होता था, आज का ज़माना बहुत खराब है, पता नहीं आगे क्या क्या देखना पड़ेगा ? संस्कार समाप्त होते जा रहे हैं, वगैरह वगैरह। हर आदमी चाहता है कि उसका घर परिवार अच्छा रहे, उसकी न‌ई पीढ़ी संस्कारवान बने। लेकिन इसमें सफलता कम लोगों को ही मिलती है, असफलता के पीछे मुख्य कारण आधुनिक चकाचौंध और हद दर्जे की खुदगर्जी है, जो सब कुछ तहस नहस करने पर तुली हुई है।

हम लोग दिन रात प्रवचन देते हैं, फिर भी परिणाम सकारात्मक नहीं आ रहे हैं। वजह यह है कि प्रवचन पर हम खुद अमल नहीं करते हैं और अपनी न‌ई पीढ़ी की दोस्ती पर ध्यान नहीं देते हैं। हमें न‌ई पीढ़ी की हर एक्टिविज पर गम्भीरता से फोकस करना चाहिए। उसकी ग़लत आदतों और गैर जिम्मेदार दोस्ती पर उसे टोकना चाहिए। वरना ग़लत दोस्ती और बुरी आदतें एक दिन उसे ले डूबेंगी और फिर सिवाय अफसोस करने के हमारे हाथ कुछ नहीं बचेगा।

हमें हमारी नई पीढ़ी को सेवाभावी बनाने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए उसे जरूरतमंदों की मदद और पूरी ईमानदारी से अपना काम करने की सीख देनी चाहिए। पहले हमें खुद को भी यह काम करना चाहिए ताकि हमारे प्रवचनों का नई पीढ़ी पर असर हो। हमें हमारी जान-पहचान वाले और पड़ौस में रहने वाले ग़रीब बच्चे-बच्चियों की फ़ीस व पाठ्य सामग्री का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए, जिसका असर यकीनन हमारी नई पीढ़ी पर पड़ेगा। यह बहुत बड़ा सवाब (पुण्य) का काम है। इससे रिश्ते व कौमें (मोहल्ला, गांव, कबिला, खानदान, मुल्क वगैरह) मजबूत होते हैं। हम ऐसा करके एक जिम्मेदार और सेवाभावी नई पीढ़ी देश व समाज के लिए छोड़ कर जाएंगे, जो हमारा नाम रोशन करेगी, नहीं तो बहुतों की बरबाद औलाद की कतार में हमारी औलाद भी खड़ी हो जाएगी।
(09/01/2023)
-------------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
IKRA PATRIKA
IFSC:- PUNB 0613900
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
-------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
--------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
---------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।

©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.

Comments

Popular posts from this blog

झुंझुनूं में रीटा चौधरी को कांग्रेस जिलाध्यक्ष बनाने पर जबरदस्त रोष

चित्तौड़गढ़ अन्जुमन स्कूल में किया मुस्लिम शिक्षकों का सम्मान

कुरैशी समाज की नो दहेज, नो गार्डन, नो डिनर मुहिम के तहत सादगी से हुई शादी