एम डी चौपदार बने राजस्थान मदरसा बोर्ड के चैयरमेन

एम डी चौपदार बने राजस्थान मदरसा बोर्ड के चैयरमेन

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आखिर मदरसा बोर्ड को चेयरमैन "मिल ही गया"
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। चार साल के लम्बे इंतजार के बाद आखिर राजस्थान की गहलोत सरकार ने राजस्थान मदरसा बोर्ड में चेयरमैन नियुक्त कर दिया, जिससे यहां के हजारों मदरसों और वहां कार्यरत पैराटीचर्स की समस्याओं की सुनवाई व समाधान एक ठिकाना बन गया है। मदरसा बोर्ड चेयरमैन का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और अगर समय पर चेयरमैन की नियुक्ति हो तो एक सरकार अपने कार्यालय में दो लोगों को चेयरमैन बनाकर ओब्लाइज (सम्मानित) कर सकती है, लेकिन 2003 में जब मदरसा बोर्ड का गठन हुआ तब से लेकर अब तक हर सरकार ने मदरसा बोर्ड चेयरमैन की नियुक्ति में लेटलतीफी ही बरती है। सरकार की इस लेटलतीफी से चेयरमैन कभी भी न तो अपना कार्यकाल पूरा कर पाया है और ना ही मदरसा बोर्ड में कोई विशेष कार्य कर पाया है, क्योंकि वो बेचारा भागता भागता आखरी दौर में नियुक्त होता है और सरकार बदलते ही उसे कुर्सी छोड़नी पड़ती है।


बहरहाल इस लम्बे इंतजार के बाद मदरसा बोर्ड चेयरमैन की जो नियुक्ति हुई है उससे मदरसा तालीम से जुड़े हुए लोगों में एक नई उम्मीद जगी है। नौ महीने बाद दिसम्बर में विधानसभा चुनाव हैं, चाहे सरकार रिपीट हो या नहीं, लेकिन जिसकी भी सरकार बने उसे राजनीतिक नियुक्ति वाले सभी पदों पर नियुक्त लोगों को कार्यकाल पूरा करने का अवसर देना चाहिए, ताकि इन लोगों के साथ सियासी ठगी नहीं हो तथा यह लोग अपने बोर्ड/निगम में कुछ नया कर पाएं और फिर इनके पास यह कहने को हो कि हमने फलां फलां उदाहरणीय कार्य हमारे कार्यालय में किया है, वरना अमूमन इन बेचारों को मजबूर व मायूस होकर लोगों को यह जुमला बोलना पड़ता है कि "अगर पूरा समय मिलता तो मैं बहुत कुछ नया कर सकता था, लेकिन क्या करें नियुक्ति ही आखिर में हुई ?"

राजस्थान मदरसा बोर्ड के नव नियुक्त चेयरमैन एम डी चौपदार हैं, जो क‌ई धुरंधरों को पछाड़ कर इस कुर्सी पर पहुंचे हैं, वो इसलिए कि सियासी गलियारों में इनका नाम दूर दूर तक कहीं नहीं चल रहा था, जोधपुर, टोंक, कोटा, जयपुर आदि क्षेत्रों के आधा दर्जन धुरंधरों ने इस पद के लिए चार साल से शेरवानी सिलाकर रख रखी थी, लेकिन सियासी आका की कृपा किसी पर नहीं हुई और एक न‌ए नाम की नियुक्ति अचानक हो गई, जिससे सभी दावेदारों के चेहरे पर बारह बज ग‌ई। एम डी चौपदार के रूप में मदरसा बोर्ड चेयरमैन की जो नियुक्ति हुई है, वो झकझोर देने वाला नाम जरूर है, लेकिन वो एक मजबूत वर्कर है और मजबूत परिवार का धनी है।

एम डी चौपदार सियासी व समाजी तौर पर झुंझुनूं और आसपास के इलाके में बरसों से सक्रिय हैं। वे कांग्रेस पार्टी के एक मजबूत वर्कर हैं। समाजसेवा के हर काम में वे अगली पंक्ति में खड़े रहते हैं, उनका परिवार कांग्रेस का एक परम्परागत व प्रतिष्ठित परिवार है। एम डी चौपदार झुंझुनूं से विधानसभा व लोकसभा के भी दावेदार रहे हैं और अभी भी हैं। वे समय आने पर कांग्रेस नेतृत्व को अपनी मजबूती का एहसास भी करवा देते हैं। वे एक ऊर्जावान और सेवाभावी स्वभाव के व्यक्ति हैं। यकीनन उनकी काबिलियत से मदरसा तालीम का भला होगा, अगर उन्हें करने दिया गया तो।

27 जनवरी को उन्होंने राजधानी जयपुर स्थित शिक्षा संकुल परिसर के मदरसा बोर्ड भवन में मदरसा बोर्ड के चेयरमैन का कार्यभार ग्रहण किया। सैकड़ों की तादाद में अपने समर्थकों जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ उन्होंने कार्यभार संभाला। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने सबसे पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री मदरसा बोर्ड की समस्याओं को अच्छी तरह जानते हैं। इस बजट में मदरसा बोर्ड के लिए अच्छा ही होगा। उन्होंने मदरसों का पूरी तरह से कम्प्यूटराइज व नवीनीकरण कर वहां आधुनिक शिक्षा देने पर जोर दिया।

इसके बाद उन्होंने अपने कार्यालय में समस्त स्टाफ से मदरसा बोर्ड की कार्यशैली पर विस्तार से चर्चा की। इस चर्चा में जमील अहमद कुरैशी निदेशक अल्पसंख्यक विभाग, सैयद मुकर्रम शाह सचिव राजस्थान मदरसा बोर्ड, जावेद खान निजी सचिव अल्पसंख्यक मामलात मंत्री एवं विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। इस कार्यभार ग्रहण कार्यक्रम में फिल्म स्टार सलीम दीवान, पूर्व जिला कलेक्टर जाकिर हुसैन, झुन्झुनूं नगर परिषद के पूर्व सभापति खालिद हुसैन, शाहीन खान, अय्यूब नागरा, राजा जी नागरा, डॉक्टर अनीस नागरा, मतलूब खां चायल, रियाज फारूकी, मकबूल चेजारा, आजम राठौड़, कैलाश सूरा, प्रवीण कृष्णियां, मोहम्मद अली खोखर, पार्षद शरीफ मनिहार एवं कुलदीप सिंह भाटी सहित अन्य गणमान्य लोग शरीक हुए। सभी ने एम डी चौपदार को चेयरमैन बनने पर मुबारकबाद पेश की।
(09/02/2023)
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