जुनैद और नासिर का दर्दनाक क़त्ल इन्सानों का क़त्ल नहीं था, इसलिए...?
जुनैद और नासिर का दर्दनाक क़त्ल इन्सानों का क़त्ल नहीं था, इसलिए...?
हमने 16 फरवरी से 23 फरवरी तक यह लेख लिखे जाने तक देश व प्रदेश की शासन व्यवस्था के कर्णधारों, विपक्षी नेताओं और उनके कुछ चेलों के फेसबुक और ट्विटर अकाउंट चैक किए, तो देखकर हैरान हो गए कि इन कर्णधारों ने हर छोटे बड़े मुद्दे पर पोस्ट डाल रखी हैं, श्रद्धांजलि और शुभकामना संदेश भी खूब हैं, शादी ब्याह में शिरकत करने और अन्य कार्यक्रमों में शरीक होने का ज़िक्र भी खूब है, लेकिन अधिकतर ने घाटमीका के इन युवाओं के दर्दनाक क़त्ल पर दो शब्द भी नहीं लिखे हैं।
इस आतंकी वारदात पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी महासचिव सुखविंदर सिंह रंधावा, यूपी प्रभारी महासचिव प्रियंका गांधी, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, राजस्थान पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, कैबिनेट मंत्री एवं पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद, पूर्व मंत्री एवं शिव विधायक अमीन खां, वक्फ विकास परिषद के चेयरमैन एवं फतेहपुर विधायक हाकम अली खां, राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन एवं आदर्श नगर विधायक रफीक खान, हज कमेटी चेयरमैन एवं किशनपोल विधायक अमीन कागजी, मुख्यमंत्री सलाहकार एवं सवाई माधोपुर विधायक दानिश अबरार, कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम, कांग्रेस के युवा नेता कन्हैया कुमार, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, राजस्थान के पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता यूनुस खान आदि असंख्य बड़े नेता पूरी तरह से ख़ामोश रहे, इनके फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर इस आतंकवादी वारदात के सन्दर्भ में कुछ भी नहीं मिला।
सबसे पहले बात करें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की। जिन्होंने 2016 में तथाकथित गौ रक्षकों को चेतावनी देते हुए कहा था कि "अधिकतर लोग गौ रक्षा के नाम पर दुकानें चलाते हैं, यह लोग रात को असामाजिक गतिविधियां करते हैं और दिन में गौ रक्षा का स्वांग रचते हैं, ऐसे लोगों का राज्य सरकारों को डोजियर (पूरा लेखा जोखा) तैयार करना चाहिए।" प्रधानमंत्री की यह बात अपने आप में सराहनीय है, लेकिन कार्रवाई आज तक क्या हुई ? उस पर आज भी प्रश्न चिन्ह लगा हुआ है। 140 करोड़ आबादी और 90 करोड़ वोटर वाले विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के प्रधानमंत्री ने गौ रक्षा के नाम पर हुए दो बेगुनाह युवाओं की दर्दनाक हत्या पर दो शब्द निन्दा के भी नहीं कहे, जो बहुत अफसोस की बात है।
भारत जोड़ो और नफ़रत छोड़ो की दुहाई देने वाले कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी, जिनकी पैदल यात्रा के बाद देश को उम्मीद बंधी है, उन्होंने भी इस आतंकी वारदात पर खामोशी का लिबादा ओढ़ लिया। राहुल गांधी ने अपने फेसबुक पेज पर 15 फरवरी 2023 को इस आतंकी वारदात के दिन यूपी के एक अपराध के सन्दर्भ में एक पोस्ट डाली। जो हुबहू निम्न है, उन्होंने लिखा कि "ये तानाशाही का नया मॉडल है, जहां इंसान को जीने का अधिकार नहीं, और उनके शवों तक का भी सम्मान नहीं। पहले हाथरस और अब कानपुर, तरीका वही, प्रशासन की ज़ोर ज़बरदस्ती से, बिना किसी कार्रवाई के मृतकों का दाह संस्कार करवा देना। हमने हाथरस में भी पेट्रोल डालकर बेटी का शव जलते देखा। आख़िर शवों को जलाने की ऐसी क्या जल्दी थी ? प्रशासन और सरकार को किस बात का डर है ? इन्हें डर सच्चाई से लगता है। ‘बुलडोज़र नीति’ के पीछे छिपकर जनता को डराने-धमकाने की उनकी असली मंशा के उजागर होने का भय है। सरकार को जवाब देना पड़ेगा, पीड़ितों को न्याय देना पड़ेगा।"
इसके अगले दिन 16 फरवरी को अपने फेसबुक पेज पर राहुल गांधी ने एक पोस्ट में लिखा कि "19 साल की युवावस्था और दीपू ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। कारण ? अग्निवीर की परीक्षा में असफलता। सोचने वाली बात है कि जिस युवा ने अपनी ज़िंदगी देश के नाम कर देने का प्रण लिया था, वो इतना हताश कैसे हो गया ? 2 सालों से सेना में कोई भर्ती नहीं और अगर अब कोई मौका दिया भी तो मात्र 4 सालों के लिए, बिना रैंक, बिना पेंशन। बेरोज़गारी अपने चरम पर है और नियमित रोज़गार के अवसरों में भी खोट, देश का युवा ऐसी दुर्नीतियों से परेशान हो गया है। युवा साथियों से अपेक्षा है, साहस रखें और देश की सेवा का यह जज़्बा कम न होने दें। नियम भी बदलेंगे, ये वक्त भी बदलेगा और देश के हर युवा के हालात भी।" लेकिन राहुल गांधी ने घाटमीका हत्याकांड पर कुछ भी नहीं लिखा। जो साबित करता है कि वे अपराध व न्याय के मुद्दे पर सेलेक्टिव हैं और अपराध व पीड़ा को भी जाति और धर्म के चश्मे से देखते हैं।
इस मुद्दे पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने फेसबुक पेज पर 17 फरवरी 2023 को एक पोस्ट में लिखा कि "भरतपुर के घाटमीका निवासी दो लोगों की हरियाणा में हत्या निंदनीय है। राजस्थान एवं हरियाणा पुलिस समन्वय बनाकर कार्रवाई कर रही हैं। एक आरोपी को हिरासत में लिया गया है एवं शेष आरोपियों की तलाश जारी है। राजस्थान पुलिस को सख्त कार्रवाई हेतु निर्देशित किया है।" फिर 20 फरवरी को उन्होंने एक और फेसबुक पोस्ट में लिखा कि "भरतपुर के गोपालगढ़ के घाटमीका के दो युवकों की हत्या के संबंध में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से फोन पर बात की। उन्होंने जांच एवं कार्रवाई में हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। राजस्थान पुलिस हरियाणा पुलिस के साथ समन्वय कर कार्रवाई कर रही है एवं पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। डीजी पुलिस, राजस्थान ने स्पष्ट किया है कि हरियाणा में आरोपी के घर में घुसकर राजस्थान पुलिस द्वारा परिजनों से मारपीट की खबरें निराधार हैं। उक्त आरोपी के घर में राजस्थान पुलिस ने प्रवेश ही नहीं किया।" फिर 21 फरवरी को फोटो सहित मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने फेसबुक पेज पर एक और पोस्ट डाली, जिसमें लिखा कि "कुछ दिन पहले मैंने हरियाणा में हिंसा का शिकार होकर जान गंवाने वाले जुनैद एवं नासिर के परिवारों से मुलाकात की। इस जघन्य अपराध के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए राजस्थान पुलिस पूरा प्रयास कर रही है एवं न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।"
राजस्थान की शिक्षा राज्य मंत्री एवं कामां विधायक जाहिदा खान जिनके क्षेत्र में यह घाटमीका गांव आता है, उन्होंने 17 फरवरी को इस गांव का दौरा किया और पीड़ित परिवारों के बीच जाकर ढांढस बंधाया। उन्होंने इस दिन अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि "घाटमीका (कामां) निवासी जुनैद और नासिर की हत्या के बाद उनके परिजनों को राज्य सरकार की ओर से माननीय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी ने 15-15 लाख, राज्य मंत्री जाहिदा खान की ओर से 5-5 लाख, चतुर्थ क्षेणी में नौकरी, निःशुल्क इंदिरा आवास, पहाड़ी पंचायत समिति की ओर से प्रधान साजिद खान ने 50-50 हजार, मृतकों के बच्चों को 12वीं तक निःशुल्क आवासीय शिक्षा, खाद्य सुरक्षा में नाम की घोषणा की गई है। परिजनों के साथ राज्य सरकार खड़ी है। दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी, इंसानियत को शर्मशार करने वाले अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा।"
18 फरवरी को मंत्री जाहिदा खान ने पीड़ितों की तरफ से एक 21 सदस्यीय प्रतिनिधि मण्डल जयपुर बुलाया और मुख्यमंत्री गहलोत से मुलाक़ात करवाई। इस मुलाकात की फोटो सहित सूचना 21 फरवरी को उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट की, जिसमें लिखा कि "जयपुर में मुख्यमंत्री निवास पर मरहूम जुनैद और नासिर के परिजनों और एक प्रतिनिधिमंडल को माननीय मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी से मुलाकात करवाकर अपराधी मोनू मानेसर व उसके साथियों को कड़ी से कड़ी सजा देने के लिए अपनी बात मजबूती से रखी। माननीय मुख्यमंत्री ने जल्द गिरफ्तार कर अपराधियों को कड़ी सजा देने का आश्वासन दिया और कहा न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।"
इस मामले में नगर विधायक वाजिब अली ने 17 फरवरी को अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर इस दर्दनाक हत्याकांड की निन्दा करते हुए हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की सरकार से मांग की। इनके अलावा इस मुद्दे पर मेवात विकास बोर्ड के चेयरमैन एवं पूर्व विधायक रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र ज़ुबैर खान, रामगढ़ विधायक सफिया ज़ुबैर और वक्फ बोर्ड चेयरमैन डॉक्टर खानू खां बुधवाली ने भी अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट डाली और इस अपराध की निन्दा करते हुए शीघ्रता से न्याय की मांग की।
जहां तक बात राजस्थान मदरसा बोर्ड के नव नियुक्त चेयरमैन एमडी चौपदार की करें तो वे लगातार दौरे में मसरूफ रहे। इस हत्याकांड के बाद वे दिल्ली, झुंझुनूं, कोटा, बारां, बून्दी आदि क्षेत्रों के दौरे पर रहे और विभिन्न कार्यक्रमों एवं गाजे बाजे के साथ रंगारंग स्वागत सत्कार में व्यस्त रहे। 21 फरवरी को वे घाटमीका गए और उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि "आज भरतपुर दौरे के दौरान ग्राम घाटमीका के रहने वाले जुनैद और नासिर की कुछ दिनों पहले जलाकर हत्या की गई, जिनके घर आज राज्यसभा सांसद और अल्पसंख्यकों की आवाज भाई इमरान प्रतापगढ़ी जी के साथ पहुंचकर परिवार के लोगों को ढांढस बंधाया और मरहूम के लिए दुआ-ए-मग्फिरत की। मैं जल्द ही माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से मिलकर आग्रह करूंगा कि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिले और आरोपी को पकड़कर सख्त से सख्त सजा दिलवाई जाए।" एमडी चौपदार इस दिन भी मेवात क्षेत्र के कुछ कार्यक्रमों में शामिल हुए और वहां जमकर उनका स्वागत सत्कार हुआ।
राज्यसभा सांसद और कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष इमरान प्रतापगढ़ी ने इस मामले में फेसबुक पेज पर कुछ पोस्ट की हैं और घाटमीका गांव का दौरा भी किया है। उन्होंने पहली पोस्ट 17 फरवरी को डाली है, जिसमें लिखा है कि "हरियाणा के भिवानी में दो युवकों जुनैद और नासिर को गौ आतंकियों द्वारा ज़िंदा जला देने की घटना पर हरियाणा पुलिस की चुप्पी शर्मनाक है। राजस्थान निवासी इन दोनों युवकों के पीड़ित परिवार से सम्पर्क करके इंसाफ़ की लड़ाई में पूरी मदद करूंगा। राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी से भी इस प्रकरण में वार्ता करूंगा और पीड़ित परिवार के लिए यथासंभव प्रयास करूंगा।" उन्होंने अपने दौरे का वीडियो और फोटो शेयर करते हुए 21 फरवरी को फेसबुक पेज पर लिखा कि "आज घाटमीका में जब नासिर और जुनैद के बच्चों से मिला तो लगा कि उन मासूमों को पता ही नहीं कि उनके वालिद को दरिंदों ने ज़िंदा जलाकर मार डाला है, मेरे पास भी उन बच्चों से वादा करने के लिए ज्यादा अल्फ़ाज़ नहीं थे। बस कोशिश करूंगा कि इन्हें इंसाफ़ ज़रूर मिल सके।"
अब बात करें आदर्श नगर विधायक और राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन रफीक खान की। उन्होंने तो अपने फेसबुक पेज पर इस जघन्य अपराध की निन्दा तक नहीं की, जबकि अन्य तमाम श्रद्धांजलि व शुभकामना संदेश डालते रहे। अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन के नाते उनकी यह जिम्मेदारी बनती थी कि वे घाटमीका जाते और पीड़ित परिवारों के आंसू पौंछते, लेकिन यह लेख लिखे जाने तक वे वहां नहीं गए।
अब बात करें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की। जिन्हें खुद घाटमीका जाना चाहिए था और पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाना चाहिए था, जैसे उन्होंने गत वर्ष उदयपुर में कन्हैयालाल टेलर के घर जाकर परिजनों को ढांढस बंधाया था, जिसका आतंकवादी वारदात में क़त्ल किया गया था। कन्हैयालाल के परिवार को मुख्यमंत्री ने 50 लाख रूपए की आर्थिक सहायता और दोनों पुत्रों को सरकारी नौकरी दी थी, ऐसा ही घाटमीका जाकर भी करना चाहिए था। लेकिन नहीं किया और वे लगातार दौरों में व्यस्त रहे। क्या इससे यह साबित नहीं हो रहा है कि अशोक गहलोत जो अपने आपको गांधी का अनुयायी कहते हैं उनके राज में आतंकी वारदात में पीड़ित को धर्म देखकर सरकारी सहायता दी जाती है। यह गांधी के नाम पर ढोंग नहीं तो फिर और क्या है ?
एक और बात यह भी रेखांकित करने लायक है कि 22 फरवरी को कांग्रेस नेता और अलवर के पूर्व सांसद भंवर जितेंद्र सिंह की पुत्री के विवाह समारोह में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे आदि कई बड़े नेता शरीक हुए, लेकिन अलवर से 65 किलोमीटर दूर घाटमीका गांव जाकर पीड़ित परिवारों के आंसू पौंछने के लिए किसी का दिल नहीं पसीजा।

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