तलाक़ की बढ़ती रफ़्तार से तबाह होता समाज

तलाक़ की बढ़ती रफ़्तार से तबाह होता समाज

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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। "तलाक़" एक बहुत ही बुरा लफ्ज़ है। इस लफ्ज़ के अमल (क्रियान्वयन) से बहुत से घर परिवार बरबाद हो चुके हैं और हो रहे हैं। पिछले दो दशक में तो तलाक़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। हर समाज और हर गांव-कस्बे में तलाक़ के मामले आम हो ग‌ए हैं। सवाल यह है कि तलाक़ के बढ़ते मामलों के पीछे प्रमुख कारण क्या हैं ? मेरा यह मानना है कि इसके पीछे दस प्रमुख कारण हैं, हो सकता है कि और कारण भी हों।


पहला कारण आधुनिकता के नाम पर खुदगर्ज़ी, दूसरा वेस्टर्न कल्चर की बढ़ती अय्याश ज़िन्दगी, तीसरा सदियों से चल रहे हमारे सामाजिक व पारिवारिक संस्कारों व बंधनों का तेज़ी से पतन, चौथा कारण दहेज़, गिफ्ट आदि का लेन देन और आवभगत को लेकर बखेड़ा, पांचवां प्यार मुहब्बत से मनमर्जी के किए रिश्ते, छठा कारण होने वाले रिश्तेदार की पृष्ठभूमि व उनके घर परिवार के संस्कार देखने की बजाए उनका धन व पद देखकर किया गया रिश्ता, सातवां संस्कारहीन उच्च शिक्षा, आठवां नशाखोरी, बदतमीजी और शक्लो सूरत (खूबसूरती) व धन का गुरूर, नौवां कारण संयुक्त परिवार व्यवस्था का खात्मा तथा दसवां इंटरनेट, सोशल मीडिया और स्मार्ट फोन।

इन दस कारणों में से कोई भी कारण किसी परिवार में तलाक़ का प्रमुख कारण बनता है और फिर एक हंसता खेलता परिवार बिखर जाता है। तलाक़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे होते हैं, उनका जीवन बरबाद हो जाता है, वे न इधर के रहते हैं और ना ही उधर के। तलाक़ में सबसे ज्यादा बुरी बात यह हो रही है कि इसकी आजकल सौदेबाजी शुरू हो गई, जो लाखों व करोड़ों में हो रही है। इसमें बिचौलिए भी पैदा हो ग‌ए, कुछ मामलों में तो ऐसा सुनने को भी मिलता है कि रिश्ता बच सकता था, लेकिन बिचौलियों के लालच ने परिवार को बरबाद कर दिया।

जहां तक मुस्लिम क़ौम की बात है तो दो दशक पहले तलाक़ न के बराबर हुआ करता था। लेकिन 10-15 साल में तलाक़ के केस बहुत तेज़ी से बढ़े हैं और हमारा यह मानना है कि ऊपरी 10 सामान्य कारणों के अलावा एक कारण और भी है, जो मुस्लिम क़ौम में तलाक़ का जरिया बनता है और वो है गल्फ कल्चर एवं खाड़ी देशों की नौकरी। जहां तक मजहबी बात है तो ख़ुदा को हलाल (जायज़) चीज़ों में सबसे नापसंद चीज़ तलाक़ लगती है, जब कोई तलाक़ होता है तो ख़ुदाई अर्श (ईश्वरीय सिंहासन) हिल जाता है।
(09/02/2023)
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