वसुंधरा राजे को कमान नहीं मिली तो...

वसुंधरा राजे को कमान नहीं मिली तो...

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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव हैं और प्रदेश की राजनीतिक परम्परा के अनुसार हर बार शासन बदलता है, एक बार भाजपा दूसरी बार कांग्रेस तथा यह सिलसिला 1993 से लगातार चल रहा है। अभी कांग्रेस की सरकार है और राजनीतिक परम्परा के अनुसार अगली सरकार भाजपा की बननी चाहिए। लेकिन सियासी समीकरण दोनों पार्टियों के उलट पलट हैं। कांग्रेस जहां वापसी का खुलकर दावा कर रही है और इसके सन्दर्भ में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जनहित की क‌ई घोषणाएं बजट में की हैं, वहीं भाजपा पूरी तरह आश्वस्त है कि दिसम्बर में उसकी सरकार बनना तय है।


इस बीच लगातार चार साल तीन महीने यानी जब से वर्तमान सरकार बनी है कांग्रेस व भाजपा में अंदरूनी जूतम पैजार चल रही है। भाजपा में जहां पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुट बनाम अन्य सियासी अखाड़े में दांवपेंच अजमा रहे हैं, वहीं कांग्रेस में गहलोत बनाम पायलट का अखाड़ा बना हुआ है। सियासी पंडितों का मानना है कि अशोक गहलोत के रहते कांग्रेस की हर बार हार हुई है, जो इस बार भी लग रही है और पायलट को पार्टी नेतृत्व एवं गहलोत गुट ने पूरी तरह से हाशिए पर धकेल दिया है। ऐसे में कांग्रेस का सत्ता में रिपीट होना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। वहीं भाजपा में बहुत कुछ लावा पक रहा है, जिसको समय पर सावधानी से ठंडा नहीं किया गया तो पार्टी का राजस्थान में रंग रूप ही बदल जाएगा।

वसुंधरा राजे लगातार इस कोशिश में हैं कि पार्टी की कमान उन्हें मिले, 2013 में भी उन्होंने जबरदस्त दबाव की राजनीतिक गोटियां चली, जिससे पार्टी नेतृत्व उन्हें कमान सौंपने को मजबूर हुआ था। इस बार भी वे उसी रास्ते पर हैं, पार्टी नेतृत्व ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम के आगे वसुंधरा राजे की तमाम गोटियां फेल हो रही हैं। वसुंधरा राजे ने 4 मार्च को शेखावाटी क्षेत्र के सालासर धाम मंदिर में अपना जन्मदिन मनाया। इस दिन उन्होंने बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। पार्टी के काफी संख्या में सांसद, विधायक, पूर्व विधायक और अन्य बड़े नेताओं के अलावा पार्टी प्रभारी महामंत्री अरूण सिंह भी वहां पहुंचे।

सियासी गलियारों की उच्च चौपालों पर यह चर्चा आम है कि या तो वसुंधरा राजे को भाजपा की कमान सौंपी जाएगी या फिर वे अपना रास्ता खुद तय करेंगी। भाजपा में वसुंधरा राजे के कद का कोई नेता नहीं है और बिना वसुंधरा के चुनाव जीतना भाजपा के लिए दूर की कौड़ी होगी। वसुंधरा राजे की पूरे प्रदेश में पकड़ है और वे अपने बलबूते 200 में से कम से कम एक चौथाई सीटें जीत सकती हैं।

सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अगर दो ढाई महीने में तस्वीर साफ नहीं हुई और भाजपा में अभी चल रहा है ऐसा ही चलता रहा तो वसुंधरा राजे एक विशाल सभा आयोजित कर न‌ई पार्टी की घोषणा करेंगी तथा इस न‌ई पार्टी में बड़ी संख्या में कांग्रेस के बड़े नेता भी शामिल होंगे। इस सभा में भाजपा नेतृत्व ख़ासकर मोदी टीम को खरी खोटी सुनाई जाएगी तथा वसुंधरा समर्थकों और मोदी विरोधी वोटों को लामबंद करने का प्रयास किया जाएगा। ऐसी सूरत में राजस्थान में कांग्रेस, भाजपा और वसुंधरा राजे की पार्टी का मुकाबला होगा तथा इस मुकाबले में कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा और भाजपा विपक्ष में ही बैठी रहेगी।
(09/03/2023)
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