गहलोत सरकार की योजनाएं सराहनीय या आफत ?
गहलोत सरकार की योजनाएं सराहनीय या आफत ?
सरकार को हड़ताली डाक्टरों पर पहले दिन से ही सख्ती दिखानी चाहिए थी, जो डाॅक्टर इलाज नहीं कर रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, प्राइवेट हॉस्पिटल संचालक हड़ताल करके मरीजों को मरने के लिए छोड़ रहे हैं, उनके अस्पतालों को दी गई रियायती भूमि वापस लेने की कार्रवाई शुरू करनी चाहिए थी। डॉक्टरों को भी यह सोचना चाहिए कि आपका पेशा कोई व्यापार नहीं है, सेवा का है। अगर आपका दिल और सोच सेवाभावी नहीं है तो क्यों आए इस प्रोफेशन में ? और भी बहुत काम धंधे है, उन क्षेत्रों में जाते और माल बनाते। आपको मालूम होना चाहिए कि एक इन्सान जितनी दुआएं डॉक्टर को देता है और जितनी तारीफ़ डॉक्टर की करता है उतनी किसी की नहीं करता है।
और डॉक्टर साहब सुनिए, सभी डॉक्टर भी एक जैसे नहीं हैं, बहुत से डॉक्टर सेवाभावी सोच के हैं दिन रात मरीजों की सेवा करते हैं, लेकिन बेचारे यूनियनबाजी के लपेटे में आए हुए हैं, आपके साथ हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं। चर्चा तो यहां तक है कि आन्दोलन के संचालक पूरी तरह से राजनीतिक हो चुके हैं, क्योंकि छह महीने बाद चुनाव हैं। आपको यह भी सोचना चाहिए कि आपको डाॅक्टर बनाने के लिए सरकार का कितना पैसा खर्च हुआ है ? और यह पैसा जनता का दिया हुआ टैक्स है, जिससे आप डाॅक्टर बने हो। और डॉक्टर साहब आपको यह भी पता है कि हड़ताल की आड़ में मरीजों को लुटा भी जा रहा है, चोरी छुपे कई गुणा महंगा इलाज किया जा रहा है।
दूसरा ताजा मामला नए जिले बनाने का है। 17 मार्च को बजट बहस के जवाब में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक साथ 19 नए जिले बनाने की घोषणा कर दी, ऐसा करने वाला भी राजस्थान पहला राज्य बन गया। जनहित की दृष्टि से यह कार्य बहुत ही सराहनीय है कि जनता को जिला मुख्यालय अब नजदीक मिलेगा। लेकिन यह घोषणा पूरी तरह से राजनीतिक है, किसी विधायक को खुश करने के लिए, किसी विधायक या नेता को नीचा दिखाने के लिए। इतने जिले एक साथ बनाए जाएंगे ऐसा तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। हां, छह सात जिले बनाने बहुत जरूरी थे और इनकी मांग भी बरसों से हो रही है।
कुछ जिले तो ऐसे बनाए हैं जिनकी मांग ही नहीं की गई थी और दूदू एक ऐसे कस्बे को जिला बना दिया, जो एक ग्राम पंचायत है। ऐसा भी शायद देश में पहली बार हुआ होगा ? सुजानगढ़, जसवंतगढ़ और लाडनूं (सुजला) क्षेत्र को जिला बनाने की मांग बरसों से चल रही है और इसे जिला बनाना जरूरी भी था, लेकिन नहीं बनाया गया, क्यों मुख्यमंत्री जी ? क्या इसलिए कि सुजला जिला बनाने से आपका सियासी गेम पूरा नहीं हो रहा था ? इसी तरह जयपुर और जोधपुर जिले ही खत्म कर दिए तथा दोनों शहरों के दो दो जिले बना दिए, शहरों को विभाजित कर जिले बनाने की यह मांग आज तक किसी ने नहीं की थी।
मुख्यमंत्री की इस घोषणा से प्रदेश में बवाल मचा हुआ है। बहुत से कस्बे अपने को जिला बनाने की मांग कर रहे हैं, दूसरे जिलों में शामिल नहीं करने की घोषणा कर रहे हैं। गहलोत सरकार की इस योजना का कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता और यहां तक कि मंत्री व विधायक भी विरोध कर रहे हैं। और ज्यों ही प्रदेश का बंटवारा मुकम्मल तौर पर 50 जिलों में होकर जनता के सामने आएगा, विरोध तेज होगा, लोग अपने इलाके को दूसरे जिले में देने का विरोध करेंगे। जिसके राजनीतिक नफे नुकसान होंगे तथा इसी राजनीतिक नफे नुकसान को मद्देनजर रखकर ही तो प्लान तैयार किया गया है।

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