क्या विपक्ष का बिखराव सत्ता परिवर्तन ला सकता है ?

क्या विपक्ष का बिखराव सत्ता परिवर्तन ला सकता है ?

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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। एक साल बाद यानी अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के।‌ 90 करोड़ से ऊपर वोटर इसमें भाग लेंगे। जनता का बड़ा वर्ग वर्तमान केन्द्र सरकार की नीतियों से पीड़ित है, सत्ता परिवर्तन के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाएगा। लेकिन सत्ता किसको देगा ? विपक्ष को। तो अब सवाल यह है कि क्या विपक्ष सत्ता परिवर्तन लाने की हालत में है ? यहां यह भी स्पष्ट कर दें कि बिना विपक्षी पार्टियों के मजबूत गठबन्धन के सत्ता परिवर्तन असम्भव है। विपक्ष की हालत यह है कि सबसे बड़ी पार्टी कही जाने वाली कांग्रेस 543 लोकसभा सीटों में से 200 सीटों पर भी पहले और दूसरे नम्बर पर नहीं है। इसी तरह अन्य क्षेत्रीय दलों का भी बुरा हाल है, वे अपने राज्य के बाहर कोई खास वजूद नहीं रखते। न कांग्रेस सबको साथ लेकर मजबूत गठबन्धन बनाने की नीति पर काम कर रही है और ना ही अन्य विपक्षी पार्टियां गठबंधन को लेकर गम्भीर है।


इस वर्ष कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना आदि राज्यों में विधानसभा चुनाव भी हैं तथा यह चुनाव लोकसभा चुनाव का एक तरह से सेमीफाइनल हैं, अगर इस सेमीफाइनल मुकाबले में विपक्ष जीतता है, तो फिर उसकी फाइनल मुकाबले में जीत आसान हो जाएगी और इस सेमीफाइनल मुकाबले में बिना विपक्षी गठबन्धन के जीत आसान नहीं नजर आ रही है। अगर वोट और पिछले दो लोकसभा चुनावों की बात करें तो जनता ने सत्ताधारी भाजपा को विपक्ष से कम वोट दिया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में करीब 69 प्रतिशत वोट भाजपा के खिलाफ पड़ा, इसी तरह 2019 के चुनाव में करीब 62 प्रतिशत वोट भाजपा के खिलाफ गया। यानी दोनों चुनावों में जनता ने जमकर विपक्ष को वोट किया, लेकिन यह वोट विपक्षी पार्टियों में बंट गया और इसके नतीजे में भाजपा की जीत हुई।

भाजपा का राज कोई वोट की जीत नहीं बल्कि विपक्ष की कमजोरी और बिखराव का परिणाम है। यह भी स्पष्ट है कि केन्द्र सरकार चाहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की हो या भाजपा की हो या फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हो, पूरी तरह से फेल हो चुकी है। जनहित के मुद्दों पर सरकार कत‌ई गम्भीर नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा, संवैधानिक व्यवस्था की सुरक्षा और साम्प्रदायिक सद्भाव को लेकर यह सरकार फ्लॉप हो चुकी है। इतना होने के बावजूद विपक्ष भी गम्भीर नहीं है। विपक्ष कहीं कांग्रेस को हटाकर गठबन्धन बनाने की सोच रहा है तो कहीं कांग्रेस ही गठबन्धन की राह में रोड़ा बन रही है।

कांग्रेस को यह बात भलीभांति समझ लेनी चाहिए कि 80 लोकसभा सीटों के उत्तरप्रदेश, 40 सीटों के बिहार और 42 सीटों के पश्चिम बंगाल में आपका कोई वजूद नहीं है। यही हाल कांग्रेस का ओड़िशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों में है। इसी तरह अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, नीतीश कुमार, केसीआर आदि को भी समझना चाहिए कि खुद के राज्य से बाहर उनका भी कोई वजूद नहीं है। अगर सत्ता परिवर्तन चाहते हो तो बड़ा दिल दिखाते हुए समय पर गठबन्धन कर लीजिए वरना एक और करारी हार को स्वीकार करना पड़ेगा।
(25/03/2023)
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