कायमखानी क़ौम की बुजुर्ग शख्सियत हाजी रणजीत खां जी से एक ख़ास मुलाक़ात

कायमखानी क़ौम की बुजुर्ग शख्सियत हाजी रणजीत खां जी से एक ख़ास मुलाक़ात

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उनकी जद्दोजहद और क़ौम की फलाहो बहबूदी के मुद्दे पर हुई विस्तार से चर्चा
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जोधपुर/जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। कायमखानी क़ौम की मशहूरो मारूफ बुजुर्ग शख्सियत रिटायर्ड सेल्स टैक्स ऑफिसर हाजी रणजीत खां जी पहाड़ान (पहाड़ियान) से 27 अप्रैल 2023 को एक ख़ास मुलाक़ात करने का मौका मिला। उनसे यह मुलाक़ात कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट जयपुर के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद खां चित्तौड़गढ़ और इक़रा पत्रिका के सम्पादक एम फ़ारूक़ ख़ान ने की। इस मुलाकात में उन्होंने अपनी ज़िन्दगी की जद्दोजहद और क़ौम की फिक्रमंदी के बारे में चर्चा की।


हाजी साहब मूल रूप से कायमखानी क़ौम की एक तत्कालीन रियासत "सतावनी (डीडवाना क्षेत्र)" की राजधानी झाड़ौद गांव के निवासी हैं और वर्तमान में बीजेएस काॅलोनी जोधपुर में निवास करते हैं। वे राजस्थान कायमखानी शोध संस्थान के फाउंडर और वर्तमान में अध्यक्ष हैं। क़रीब 80 ईद देख चुके हाजी साहब आज भी पूरी तरह से एक्टिव हैं, इसके बावजूद कि उनकी तबीयत खराब रहती है और घुटने जवाब दे चुके हैं और सुनने के लिए कानों में मशीन लगा रखी है। बेहद मिलनसार, हंसमुख और क़ौम की फ़िक्र रखने वाले हाजी रणजीत खां जी के जीवन संघर्ष और सक्रियता से न‌ई पीढ़ी को विशेष रूप से सीखना चाहिए कि जद्दोजहद कैसे होती है और अपनी जन्मभूमि, खानदान और क़ौम की पहचान के लिए उम्र के इस पड़ाव में भी पूरी लगन से कैसे सक्रिय रहा जाता है ?


हाजी साहब और उनकी टीम क़ौम के सहयोग से शोध संस्थान संचालित करती है, जिसका "कायमदीप" नाम से मासिक अखबार भी प्रकाशित होता है। साथ ही शोध संस्थान के जरिए कायमखानी क़ौम से सम्बंधित क‌ई किताबों का भी प्रकाशन किया गया है। वे अपनी टीम के जरिए हर वर्ष कायमखानी प्रतिभा सम्मान समारोह भी आयोजित करते हैं। जिसमें प्रतिभाशाली बच्चे बच्चियों के अलावा सामाजिक व शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कायमखानियों का भी सम्मान किया जाता है। जिसमें "कायम रत्न" अवार्ड भी शामिल है। खास बात यह है कि 2013 में शुरू किए गए कायम रत्न अवार्ड से पहली बार इक़रा पत्रिका के सम्पादक एम फ़ारूक़ ख़ान को उन्होंने सम्मानित किया था।


इस मुलाकात में उन्होंने कायमखानी क़ौम की सबसे कदीमी (पुरानी) किताब "कायम खां रासा" को प्रकाशित करने के लिए की गई जद्दोजहद के बारे में विस्तार से बताया, जो वाकई उनकी बड़ी जद्दोजहद थी, जिसकी कायमखानी क़ौम हमेशा ऋणी रहेगी। उन्होंने चर्चा में बताया कि कैसे क़ौम को हर क्षेत्र में सफल बनाया जाए, कैसे क़ौम की असली पहचान और राजपूती कल्चर को बचाया जाए। उन्होंने शादी ब्याह की फिजूलखर्ची और डीजे के जरिए की जा रही बेहूदगी पर चिंता जताई और इस समस्या से क़ौम को हो रहे नुकसान से बचाने के लिए सभी को प्रयास करने की जरूरत बताई। उन्होंने भीलवाड़ा इलाके में हो रहे कायमखानी सामूहिक विवाह सम्मेलनों की तारीफ की और इसकी जरूरत अन्य जिलों में भी बताई, साथ ही यह भी ख्वाहिश जाहिर की कि कायमखानी क़ौम का प्रदेश स्तरीय सामूहिक विवाह सम्मेलन भी आयोजित किया जाए, जिससे क़ौम में शादियों के नाम पर समय व पैसे की जो बर्बादी हो रही है उसे रोका जाए।

हाजी साहब शुरू से ही इक़रा पत्रिका से ख़ास लगाव रखते हैं और उनकी सरपरस्ती शुरू से इक़रा पत्रिका पर बनी हुई है। उन्होंने मुझ ख़ाकसार (एम फ़ारूक़ ख़ान सम्पादक इक़रा पत्रिका) की बेबाक लेखनी और हर तरह की सामग्री इक़रा पत्रिका में प्रकाशित करने तथा राजनीतिक व सामाजिक लेखों के जरिए मुल्क व क़ौम को हर वक्त झकझोरते रहने की खुले दिल से प्रशंसा की और दुआएं दी।

(27/04/2023)
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