राजस्थान लोकसेवा आयोग में मुस्लिम प्रतिनिधित्व क्यों नहीं ?
राजस्थान लोकसेवा आयोग में मुस्लिम प्रतिनिधित्व क्यों नहीं ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान में दिसम्बर 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी। जिसे बने पांचवां वर्ष चल रहा है। मतगणना के दिन राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस अपने सिम्बल पर 100 सीट ही जीत पाई थी, यानी वो हारती हारती बची थी। जीतने वाली 100 सीटों पर मुस्लिम वोट 15 हजार से लेकर एक लाख से ऊपर तक हैं। यानी यह सभी सीटें मुस्लिम वोट की बदौलत कांग्रेस ने जीती थी। जो 100 सीटें हारी थी, उनमें अधिकतर पर मुस्लिम वोट 15 हजार से कम है। कांग्रेस के बहुत से नेता यह बात मानते हैं कि मुसलमानों का एकतरफा और भारी संख्या में वोट कांग्रेस को नहीं मिलता, तो आज कांग्रेस सत्ता में नहीं होती। इसके बावजूद कांग्रेस ने सरकार बनते ही मुसलमानों को पूरी तरह से नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था।
कांग्रेस से जुड़े मुस्लिम इस भेदभाव को लेकर पूरी तरह से पसोपेश में हैं, वो चाय चौपाल चर्चा करते हुए एक दूसरे से पूछते हैं कि आखिर मुसलमानों का गुनाह क्या है, जो कांग्रेस सरकार उनकी अनदेखी कर रही है ? वहीं आम मुसलमान अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा है और वो नया रास्ता तय करने की सोच रहा है, चाहे यह रास्ता ओवैसी ब्रांड सियासत का ही क्यों ना हो। इस लेख में हम बात कर रहे राजस्थान लोकसेवा आयोग (आरपीएससी) की। जिसमें करीब 10 साल से मुस्लिम प्रतिनिधित्व नहीं है, यानी एक भी सदस्य मुस्लिम नहीं है।
आरपीएससी में सामान्य वर्ग, ओबीसी, एससी, एसटी यानी सभी वर्गों को गहलोत सरकार ने प्रतिनिधित्व दिया है, सिवाय मुस्लिम समुदाय के। हालांकि इस समय आरपीएससी में कुल पांच में से तीन पद खाली हैं और सदस्य बाबूलाल कटारा की पेपर लीक मामले में गिरफ्तारी के बाद सम्भावना है कि एक और पद भी खाली होगा, इस तरह कुल चार पद खाली हो जाएंगे। आरपीएससी में चेयरमैन सहित कुल आठ पद होते हैं। मुस्लिम समुदाय के साथ यह भेदभाव उस कांग्रेस ने बरत रखा है, जो अपने आपको सेक्यूलर व 36 कौमों की पार्टी कहती है। यह भेदभाव उस मुख्यमंत्री ने किया है, जो अपने आपको गांधी का अनुयायी कहते हैं।
सवाल यह है कि जब सब समाजों को आरपीएससी में प्रतिनिधित्व दिया गया है, तो फिर मुस्लिम को क्यों नहीं ? यह सवाल पिछले चार साल से पढे लिखे मुसलमानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। मुस्लिम बुद्धिजीवियों का मानना है कि आरपीएससी का चेयरमैन या एक सदस्य तो किसी योग्य मुस्लिम को बनाना ही चाहिए था, ताकि भेदभाव का खात्मा हो तथा लगे कि वाकई कांग्रेस सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी है। राजस्थान में दर्जनों मुस्लिम अधिकारी, प्रोफेसर-लेक्चर्र, एडवोकेट, राजनेता, पत्रकार आदि हैं, जिनको आरपीएससी का चेयरमैन या सदस्य बनाया जा सकता है। लेकिन अभी तक नहीं बनाया गया है, मुस्लिम बुद्धिजीवियों का मानना है कि आरपीएससी के खाली पदों में से कम से कम एक पद मुस्लिम समुदाय के किसी वर्तमान या रिटायर्ड अधिकारी को नियुक्ति देकर शीघ्रता से भरना चाहिए।
मुस्लिम बुद्धिजीवियों का यह भी मानना है कि गहलोत सरकार के ऐसे भेदभावपूर्ण रवैये से मुसलमान तेजी से कांग्रेस से छिटकने की तैयारी कर रहा है, जो कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसलिए बेहतर है कांग्रेस राजस्थान में यह भेदभाव खत्म करे और किसी योग्य मुस्लिम अधिकारी को आरपीएससी में शीघ्रता से नियुक्ति देकर यह सन्देश दे कि कांग्रेस वाकई सभी को साथ लेकर चलती है।
(09/05/2023)
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