11 मुहर्रम : शौहदा ए करबला की शहादत का दूसरा दिन

11 मुहर्रम : शौहदा ए करबला की शहादत का दूसरा दिन

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हज़रत जैनब की नाना हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से दरख़्वास्त
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नाना तेरी उम्मत से जैनब का यह शिकवा है !!
नाना तेरी जैनब को तेरी उम्मत ने रुलाया है !!

नाना तेरे गुलशन को तेरी उम्मत ने लूटा है !!
नाना तेरे हुसैन को उम्मत ने क़त्ल किया है !!

नाना तेरे कुनबे को भूखा-प्यासा शहीद किया है !!
नाना तेरे बच्चों की लाशों को पामाल किया है !!

नाना तेरे लाडले हुसैन की गर्दन को अलग किया है !!
नाना यह सब मंज़र तेरी जैनब ने आंखों से देखा है !!

नाना जिस हुसैन को आप रोज कान्धों पर बैठाते थे !!
नाना उसके सिर को तेरी उम्मत ने नेजे पर चढ़ाया है !!

नाना तेरी उम्मत ने तेरी जैनब का ख़ेमा जलाया है !!
नाना हमें बेपर्दा कर कूफे की गलियों में घुमाया है !!

नाना तेरी उम्मत ने तेरी जैनब की चादर खींची है !!
नाना बीमार सय्यदे सज्जाद पर भी ज़ुल्म ढहाया है !!

नाना तेरी जैनब ने भाई का सिर नेजे पर देखा है !!
नाना यह सब ज़ुल्म तेरी जैनब ने ख़ुद देखा है !!

नाना इस ज़ुल्म की ख़ाक ए करबला गवाह है !!
नाना तेरी लाडली जैनब को जहां कैदी बनाया है !!

नाना तेरी उम्मत ने करबल में तेरा चमन उजाड़ा है !!
नाना तेरी जैनब ने तपते करबल में तुम्हें पुकारा है !!

नाना तेरी जैनब ने हक़ के लिए हक़ अदा किया है !!
नाना तेरे लूटे कुनबे को मैं रोते हुए लेकर चली हूं !!
😭😭😭😭😭

(हज़रत जैनब, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की बहन थीं, जो करबला में मौजूद थीं और उन्होंने अपने पूरे खानदान को ख़ाक ए करबला में शहीद होते हुए देखा था। हज़रत जैनब दुनिया की सबसे बहादुर औरत हैं। उन्होंने बाक़ी ज़िन्दगी में रोज़ आंसू बहाते हुए हुए वाकिया ए करबला के दर्दनाक मंज़र को बयान किया है। करबला के दर्दनाक मंज़र और ज़ालिम यजीदी लश्कर के खूनी कारनामों की ज्यादातर दास्तां दुनिया को हज़रत जैनब ने ही बताया था। हज़रत जैनब की बहादुरी और हिम्मत को सलाम करते हुए मुझ ख़ाकसार ने यह चन्द लाइनें मेरी ज़ुबान में उनको समर्पित करते हुए लिखी हैं।)
(30-07-2023, 11 मुहर्रम 1445 हिजरी)

-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक
थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका।

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