नवाब कायम ख़ान साहब के 604 वें शहादत दिवस पर आयोजित हुए कई कार्यक्रम

नवाब कायम ख़ान साहब के 604 वें शहादत दिवस पर आयोजित हुए कई कार्यक्रम

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मुख्य कार्यक्रम उनके पीरो मुर्शीद की खानकाह दरगाह चार कुतुब साहब और उनके मकबरे हांसी शरीफ़ में आयोजित किया गया
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हांसी/ददरेवा/चूरू/भीलवाड़ा/सुजानगढ/भादरा/जोधपुर/अजमेर/डीडवाना (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। शुजात, ईमानदारी, वफादारी व वतन प्रेम की मिसाल कायमखानी कौम के प्रथम पुरुष और तत्कालीन हिसार-हांसी (हरियाणा) रियासत के शासक और सुलतान फिरोज शाह तुगलक के वज़ीर व सेनापति नवाब कायम खान साहब का 14 जून (नवाब क़ायम खां डे) को हर साल की तरह शहादत दिवस मनाया गया। इस बार उनका 604 वां शहादत दिवस था। कायमखानी बाहुल्य इलाकों में कई छोटे बड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्य कार्यक्रम उनके पीरो मुर्शीद की खानकाह दरगाह चार कुतुब साहब हांसी शरीफ़ में आयोजित किया गया।


हां कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने यह कार्यक्रम आयोजित किया। दरगाह चार कुतुब साहब के सज्जादानशीन विकारूर्रहमान साहब की सरपरस्ती में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी के साथ नवाब क़ायम खां साहब और तमाम बुजुर्गों के लिए दुआ की गई। साथ ही मुल्क, समाज व पूरी दुनिया में अमन व भाईचारे के लिए भी दुआ की गई। इसके बाद तीसरे और चौथे कुतुब साहब की मजार पर चादर पेश की गई। फिर इसी दरगाह परिसर में दफन नवाब क़ायम खां साहब के बड़े साहबजादे और उनकी शहादत के बाद हिसार-हांसी रियासत के शासक और झुन्झुनूं कायमखानी रियासत के संस्थापक रहे नवाब मोहम्मद खां साहब की कब्र पर भी चादर पेश की गई। नवाब मोहम्मद खां साहब की कब्र पर विशाल मकबरा बना हुआ है।

इसके बाद कुछ लोग नवाब क़ायम खां साहब की कब्र पर ग‌ए। नवाब क़ायम खां साहब की कब्र पर विशाल मकबरा बना हुआ था, जो पूरी तरह से जर्जर होकर गिर चुका है, मुश्किल से उसका 30 फीसदी हिस्सा बचा है। यहां श्रमदान कर कब्र को सही किया गया और चादर पेश की गई। साथ ही उनकी कब्र पर कुतबा भी लगाया गया। दरगाह चार कुतुब साहब के पास नवाब क़ायम खां साहब ने अपने शासनकाल में पेयजल व खेती के लिए एक विशाल झील निर्मित करवाई थी, जो कायमसर झील के नाम से विख्यात है। इस झील के किनारे नवाब क़ायम खां साहब को दफन कर विशाल मकबरा बनाया गया था।


हांसी के कार्यक्रम में जयपुर, झुंझुनूं, सीकर, चूरू, भीलवाड़ा, भादरा आदि से काफी संख्या में लोग शरीक हुए। कायमखानी रियासतों के खात्मे के बाद पिछले करीब 290 साल में नवाब क़ायम खां साहब को याद करने के लिए पहली बार हांसी में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों ने पहुंचकर इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक कार्यक्रम बना दिया। यह कार्यक्रम कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति के अध्यक्ष कप्तान फजरू खां के नेतृत्व में आयोजित किया गया। सभी ने नवाब क़ायम खां साहब को खिराज ए अकीदत पेश करते हुए उनके दोनों भाइयों और दूसरे बुजुर्गों के लिए दुआ की। कार्यक्रम के संचालन की शुरुआत में कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति के सेक्रेटरी फ़ारूक़ ख़ान ने यहां आए क़ौम के सभी मोअज्जिज सरदारों और कायमखानी क़ौम का संक्षिप्त परिचय सज्जादानशीन विकारूर्रहमान साहब को कराया।


इसके बाद हिसार ग‌ए और वहां उस विशाल किले को देखा, जहां नवाब क़ायम खां साहब और उनके खानदान ने राज किया था। यहां स्थित विशाल लाट की मस्जिद भी देखी और दुआ की। यहां हरियाणा सरकार के वक्फ बोर्ड अधिकारी ओबेदुल्लाह खान को एक मांग पत्र हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नाम दिया गया। जिसमें हरियाणा की सभी ऐतिहासिक कायमखानी धरोहरों से अतिक्रमण हटाने और उनकी मरम्मत कराने आदि के मुद्दे शामिल थे।


इसके अलावा नवाब क़ायम खां साहब की जन्म स्थली ददरेवा (जिला चूरू) स्थित नवाब कायम ख़ान मेमोरियल शहीद स्मारक में भी हर बार की तरह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस शहीद स्मारक में 200 से अधिक कायमखानी शहीद सैनिकों की पट्टिकाएं लगी हुई हैं। यह वे भारतीय सैनिक हैं जो विभिन्न युद्धों एवं सैन्य ऑपरेशनों में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे। उल्लेखनीय यह है कि उक्त स्मारक के लिए तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने दो बीघा निशुल्क भूमि आवंटित की थी और इसकी नींव का पत्थर वसुंधरा राजे ने 14 जून 2008 को नवाब कायम ख़ान डे पर भव्य आयोजन के बीच रखा था। इस स्मारक पर सरकार व समाज की तरफ से करीब ढाई करोड़ रूपए अभी तक खर्च हो चुके हैं।

नवाब कायम खान डे पर हर वर्ष की भांति इस बार भी ब्लड डोनेशन कैम्प, वृक्षारोपण, कुरआनख्वानी, फातिहाख्वानी, अस्पतालों में फल वितरण, गौ शालाओं में चारा डालने, पक्षियों के लिए परिन्डे बांधने आदि क‌ई कार्यक्रम हुए। जो चूरू, भादरा, सुजानगढ, लाडनूं , शाहपुरा, भीलवाड़ा, जयपुर, झुन्झुनूं, अजमेर, जोधपुर, चित्तौड़गढ़, महनसर सहित कई गांव कस्बों में आयोजित किए गए।

चित्तौड़गढ़ में राजस्थान कायमखानी महासभा के जिलाध्यक्ष अल्लानूर खां दायमखानी (सेवानिवृत्त लेखाधिकारी) के नेतृत्व में इस बार भी दादा नवाब क़ायम खां साहब के शहादत दिवस पर अलग अलग प्रोग्राम आयोजित किए गए। पहले प्रोग्राम में यहां के कुम्भानगर स्थित मस्जिद में सुबह क़ुरआनख्वानी और फातिहाख्वानी की गई। दूसरे प्रोग्राम में चिकित्सा सेवा समिति चित्तौड़गढ़ के माध्यम से श्री सांवलिया जी राजकीय सामान्य चिकित्सालय परिसर चित्तौड़गढ़ स्थित भोजनशाला में ज़रूरतमंदों को स्पेशल डाइट का सुबह शाम दोनों वक्त का खाना खिलाया गया। इसके बाद जाने माने कर्मचारी नेता मरहूम केसर खान साहब की स्मृति में राजस्थान पेंशनर्स समाज जिला चित्तौड़गढ़ को मीटिंग हॉल के लिए दो सौ कुर्सी सम्मानपूर्वक भेंट की गई। जोधपुर में महाराजा उम्मेद कायमखानी हाॅस्टल में हर बार की तरह नवाब कायम ख़ान डे मनाया गया। इसी तरह अजमेर और डीडवाना में भी नवाब क़ायम खां डे मनाया गया, जहां विभिन्न प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
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