मणिपुर और कश्मीर के हालात तथा ओडिशा का ट्रेन हादसा बहुत कुछ बयान कर रहे हैं, लेकिन सुने कौन ?
मणिपुर और कश्मीर के हालात तथा ओडिशा का ट्रेन हादसा बहुत कुछ बयान कर रहे हैं, लेकिन सुने कौन ?
बात जम्मू-कश्मीर की करें तो वहां भी सब कुछ वैसा नहीं है, जो सरकार बता रही है। आनन फानन में जनता को भरोसे में लिए बगैर अनुच्छेद 370 हटाना, एक पूर्ण राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटना तथा कई महीनों तक सुरक्षा बलों को हर गली चौराहे पर तैनात कर तथा इंटरनेट, फोन, मोबाइल आदि सब कुछ बंद कर पूरे प्रदेश को एक अघोषित जेल बनाकर लोगों से केन्द्र सरकार का फैसला मनवाना सही नहीं था। अगर यह सही था तो चार साल होने को आ गए अभी तक वहां विधानसभा चुनाव क्यों नहीं करवाए गए ? जवाब हो सकता है कि वहां चुनाव के हालात नहीं हैं। यह हालात खराब किसने किए ? जब खराब हालात थे तब भी चुनाव हो रहे थे तो क्या अब पहले से भी ज्यादा खराब हालात हैं ?
जम्मू-कश्मीर हमारे दो दुश्मन देशों चीन व पाकिस्तान से घिरा हुआ है, मणिपुर सहित पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र चीन और चीन की साज़िश से घिर चुका है। पूर्वोत्तर के पड़ौसी देशों बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और म्यांमार में चीन पूरी तरह से अपने पंजे गाड़ चुका है। पाकिस्तान पूरी तरह से चीन का सहयोगी बन चुका है। गुट निरपेक्ष आंदोलन और सार्क जैसे भारत हितैषी अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म जिन्हें भारत की दूरदृष्टी व कूटनीति से खड़ा किया गया था, इन दोनों प्लेटफॉर्म की पिछले दो दशक में हमारी केन्द्रीय सत्ता के कर्णधारों ने पूरी तरह से कब्र खोद दी है।
यूक्रेन युद्ध के कारण रूस एक बड़ी ताक़त बनकर उभर रहा है। चीन, ईरान जैसे कुछ देश खुलकर रूस के साथ खड़े हो गए हैं। खाड़ी के देशों में तेजी से चीन अपनी जगह बना रहा है। अमेरिका और यूरोप घबराया हुआ है तथा वो रूस व चीन के खिलाफ मजबूत लामबंदी करने में लगा हुआ है। ऐसी स्थिति में अगर आज गुट निरपेक्ष आंदोलन और सार्क जैसे प्लेटफॉर्म मजबूत होते तो हमारे देश के साथ पूरे विश्व का हित सुरक्षित होता, विश्व के बहुत से देश भारत की लीडरशिप में खड़े होते, लेकिन हमारे कर्णधारों की स्वार्थी संकीर्ण सोच यानी "खुद की सत्ता ही सब कुछ है" के कारण आज हम अंतरराष्ट्रीय और घरेलू तौर पर एक ख़तरनाक मोड़ पर खड़े हो गए हैं।
अब बात ओडिशा के ट्रेन हादसे की, जिसमें काफी संख्या में लोग मारे गए। तीन ट्रेनों का एक साथ टकराना और आधुनिक टेक्नोलॉजी के बावजूद इतना नुकसान होना अपने आप में सवाल खड़े करता है कि क्या हमारे रेलवे की यह स्थिति है ? इस हादसे की वजह जो भी हो, लेकिन रेल, पुल, सड़क आदि के हादसे पूरी दुनिया में होते हैं, परंतु इन हादसों के पीछे सिस्टम की लापरवाही, घटिया इंजीनियरिंग और कमजोर मैटेरियल हो तो बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है तथा यही प्रश्न चिन्ह ओडिशा रेल हादसे पर खड़ा है। वजह साफ है "भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद।" भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के कारण देश का निर्माण क्षेत्र पूरी तरह से खूबसूरत दिखते हुए भी पैरालिसिस का शिकार है, नतीजा आए दिन के कहीं न कहीं हादसे हैं।

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