राजस्थान में वक्फ जायदाद के साथ हो रही लूट का जिम्मेदार कौन ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। बताया जाता है कि रेलवे के बाद देश में सबसे ज्यादा भूमि वक्फ बोर्ड के पास है। इसके विकास और प्रबंधन के लिए हर राज्य में वक्फ एक्ट 1995 संशोधन 2013 के तहत वक्फ बोर्ड बने हुए हैं। इन वक्फ बोर्डों में ज्यादातर सत्ताधारी दल के लोग नियुक्त होते हैं, जो वक्फ का विकास तो कम और लूट खसोट ज्यादा करते हैं। यही हाल राजस्थान वक्फ बोर्ड का है। राजस्थान में कई वक्फ जायदाद खुर्द बुर्द हो रही हैं और कुछ हो भी गई हैं। लेकिन वक्फ बोर्ड थोड़ा बहुत एक्शन वहीं लेता है जहां की प्रबन्धन कमेटी बोर्ड की हां में हां नहीं मिलाती है। जो वक्फ कमेटी बोर्ड की इच्छा पूरी करती है उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं होता चाहे वो कितनी भी लूटमार करे।

वक्फ जायदाद अल्लाह की मिल्कियत हैं, लेकिन वक्फ बोर्ड और इनके इन्तेज़ाम में लगे ज्यादातर लोग इन्हें मजे से खुर्द बुर्द कर रहे हैं, वक्फ जायदाद के जो एकाध फीसदी जिम्मेदार इन्हें बचाने की कोशिश करते हैं, उनकी वक्फ बोर्ड और वक्फ कमेटियों में ज्यादा चलती नहीं है। पूरे कुएं में भांग घुटी हुई है। जो कोई वक्फ जायदाद के लिए आवाज उठता है उसे वक्फ के लूटेरे टारगेट बनाकर हर तरह से डराने धमकाने की कोशिश करते हैं, यहां तक कि उसके रिश्तेदारों से भी प्रेशर डलवाते हैं और सबसे अफसोस की बात कि इस खेल में मुसलमानों के नामनिहाद रहनुमा भी शामिल हैं।
जयपुर की एमआई रोड पर तीन किलोमीटर के फासले पर दो वक्फ जायदाद हैं। एक पुलिस कमिश्नरेट के सामने बाग नवाब कल्लन खां के नाम से, जो करीब 38 बीघा बताई जाती है, दूसरी घाटगेट के पास कप्तान फ़ैज़ मोहम्मद के नाम से, जो करीब 9 बीघा बताई जाती है। यह दोनों जायदाद अतिक्रमण और खुर्द बुर्द की शिकार हैं। इन पर वक्फ बोर्ड भी एक तरह से ख़ामोश सा है और मुस्लिम रहनुमा भी। ऐसे ही भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, राजसमंद, जोधपुर, नागौर, सीकर, हनुमानगढ़, गंगानगर, चूरू, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, करौली, कोटा, बारां, टोंक, अजमेर यानी राजस्थान का एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां वक्फ जायदाद खुर्द बुर्द नहीं हो रही हैं। सरकार को कितने भी ज्ञापन दो कोई एक्शन नहीं होता है, क्योंकि वक्फ के लूटेरों को सरकार ही तैनात करती और इसमें सत्ताधारी पार्टी के कमोबेश सभी लोगों को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष लाभ भी मिलता है।
वक्फ की इस लूट की कभी सरकार कोई जांच नहीं करवाती है, अगर राजस्थान वक्फ बोर्ड के क्रिया कलापों की पिछले 10-20 साल की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में गठित एसआईटी से हो जाए तो हम दावे से कहते हैं कि वक्फ बोर्ड और वक्फ कमेटियों से जुड़े अधिकतर लोग सलाखों के पीछे होंगे। सबसे हैरानी तो इस बात की है कि बड़े मुस्लिम संगठन और मुस्लिम रहनुमा हर मुद्दे पर अपनी बयानबाज़ी करते हैं, लेकिन वक्फ जायदाद के मुद्दे पर खामोशी का लिबादा ओढ़ लेते हैं, इससे जाहिर होता है कि इन रहनुमाओं की रहनुमाई भी वक्फ के लूटेरों के भरोसे चल रही है। वक्फ जायदाद को बचाने की फ़िक्र रखने वालों को इस ओर भी अपना ध्यान देना चाहिए।
(24/06/2023)
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