हाजी रणजीत खां का सम्मान कर कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने सौंपा पत्र
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जयपुर/जोधपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान कायमखानी शोध संस्थान जोधपुर के अध्यक्ष हाजी रणजीत खां को 24 अगस्त को कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने सम्मानित कर एक पत्र सौंपा। यह सम्मान जोधपुर स्थित बीजेएस कॉलोनी में हाजी साहब के दौलतखाने पर वंशावली संरक्षण समिति के पदाधिकारियों ने किया। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष कप्तान फजरू खां, सेक्रेटरी एम फ़ारूक़ ख़ान, फाउंडर मेम्बर कप्तान लियाकत खां धनूरी, कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट के महासचिव मोहम्मद खां चित्तौड़गढ़, राजस्थान हाईकोर्ट के एडवोकेट रज़्ज़ाक हैदर और एडवोकेट सरवर खां आदि मौजूद रहे।
हाजी साहब से क़ौम के विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्हें जो पत्र सौंपा गया वो हुबहू निम्न हैं:-
जनाब हाजी रणजीत खां साहब
अध्यक्ष
राजस्थान कायमखानी शोध संस्थान, जोधपुर।
अस्सलामुअलैकुम
मोहतरम हाजी साहब पहले सोशल मीडिया के जरिए और बाद में कायमदीप अखबार के जरिए आप द्वारा राजस्थान कायमखानी महासभा के चुनाव के विवाद के सन्दर्भ में लिखी गई कुछ जानकारी मिली है। आपके द्वारा कायमदीप अखबार के अगस्त 2023 के अंक (07 अगस्त 2023) में अन्तिम पृष्ठ पर एक खुला पत्र कायमखानी क़ौम के नाम लिखा गया है, साथ ही इसी अंक के प्रथम पृष्ठ पर इसी मुद्दे पर एक लेख भी विस्तार से प्रकाशित किया गया है।

जिनमें आपने लिखा है कि राजस्थान कायमखानी महासभा के सदस्यता अभियान में जिन 32 अन्य जातियों के लोगों को संस्था का सदस्य बनाने की बात कही जा रही है उनमें से 20 जातियां ऐसी हैं जो वृहद कायमखानी समाज में शामिल नहीं हैं और इनसे कायमखानियों की आपसी रिश्तेदारियां (वैवाहिक सम्बन्ध) भी प्रमाणित नहीं हैं। यानी 20 अन्य जातियों को सदस्यता दी है जो कायमखानी नहीं हैं, इसका मतलब सीधा सा यह हो गया कि सदस्यता अभियान में बहुत बड़ी गड़बड़ की गई है, जिसे आपने भी पकड़ा है तथा इसी गड़बड़ी के खिलाफ कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति पहले दिन से आवाज उठा रही है। सबसे पहले तो आपको इस गड़बड़ी को उजागर करने और 20 अन्य जातियों के लिए यह मानने कि यह कायमखानी नहीं हैं, उसके लिए तहेदिल से बधाई।

हाजी साहब आपने इन लेखों में विवाद के खात्मे के लिए बातचीत, मध्यस्थता व समझौते की बात भी कही है, जो बहुत ही सराहनीय है। कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने कभी भी बातचीत करने से इन्कार नहीं किया है, पहले दिन से हम विवाद को बातचीत से हल करना चाह रहे हैं, लेकिन राजस्थान कायमखानी महासभा के नाम पर बनी असंवैधानिक 21+1=22 लोगों की कर्नल शौकत साहब की टीम के कुछ लोग नहीं चाहते कि वार्ता हो और गाड़ी पटरी पर चढ़े, क्योंकि यह लोग महासभा के संविधान के अनुसार स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराना ही नहीं चाहते हैं।
मोहतरम हाजी साहब कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति का गठन बाकायदा जयपुर में एक मीटिंग आयोजित कर 02 अप्रैल 2022 को इसलिए किया गया कि महासभा की सदस्यता अभियान में की गई गड़बड़ी के लिए कोई सुनने को तैयार नहीं था। इसके बाद 04 अप्रैल 2022 को एक रजिस्टर्ड पत्र कर्नल शौकत साहब सहित सभी 22 लोगों को भेजा गया, लेकिन इनकी तरफ से समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया। फिर हमारी समिति ने जयपुर में ही 10 अप्रैल 2022 को एक बड़ी मीटिंग रोजा इफ्तार के साथ रखी, जिसमें 100 से अधिक कौम के मोअज्जिज सरदार शरीक हुए, जिनमें से 17 सरदार राजस्थान कायमखानी महासभा के संरक्षक व आजीवन सदस्य हैं।
इसके बाद 08 मई 2022 को झुन्झुनूं में हमने मीटिंग रखी, जिसमें 200 से अधिक मोअज्जिज सरदार शरीक हुए। इन मीटिंग्स की सूचना, एजेंडा और निर्णय हमने समय पर सोशल मीडिया के जरिए पूरी क़ौम के सामने पेश किए। लेकिन महासभा के नाम पर बनी 21+1 लोगों की असंवैधानिक टीम में से कुछ की हठधर्मिता के कारण कोई भी वार्ता नहीं हो सकी। इसके बाद समस्या का समाधान निकालने के लिए हमारी समिति ने एक विस्तृत रजिस्टर्ड पत्र 19 मई 2022 को 21+1 सभी को भेजा, नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।
मोहतरम हाजी साहब इसके बाद कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति ने 29 मई 2022 को सीकर में एक मीटिंग आयोजित की और क़ौम से अपील की। लेकिन मसले का कोई हल नहीं निकला। इस बीच मार्च 2022 के अन्तिम सप्ताह से अप्रैल 2022 के प्रथम सप्ताह तक सोशल मीडिया पर 21+1 टीम की तरफ से बिना हस्ताक्षर के डाली गई टुकड़ों में अनाधिकृत सदस्यता सूचियों के वायरल होने से क़ौम में एक तनाव व फितना फैल गया। इन सूचियों की हमारी समिति ने जांच पड़ताल की तो पाया कि करीब 32 अन्य जातियों के 1700 से अधिक उन लोगों को महासभा का सदस्य बनाया गया है जो कायमखानी नहीं हैं। हमने 04 जून 2022 को एक लीगल नोटिस भी 21+1 टीम को भेजा, उसका भी कोई जवाब नहीं आया। इस बीच 02 जुलाई 2022 को हमारी समिति ने क़ौम के नाम एक पम्पलेट भी प्रकाशित किया, जिसे सभी गांव कस्बों में भेजा गया।
इसके बाद हमारी समिति ने 16 सितम्बर 2022 को एक रजिस्टर्ड पत्र कर्नल शौकत साहब को भेजा, साथ ही इसी दिन क़ौम के प्रबुद्ध सरदारों के नाम भी एक खुला पत्र जारी किया गया, क़ौम के करीब दो दर्जन प्रबुद्ध सरदारों से मुलाक़ात कर उन्हें यह पत्र सौंपा गया, लेकिन मसले का कोई हल नहीं निकाला गया। इस तमाम खतो किताब और सोशल मीडिया पर की गई असंख्य कोशिशों के बावजूद कर्नल शौकत साहब और उनकी टीम ने सकारात्मक ढंग से वार्ता कर मसले का हल निकालने की बजाए हमारी समिति के लोगों को ही हर तरह से जलीलो ख्वार करने की कोशिश की।
इसके बाद कर्नल शौकत साहब ने बिना चुनाव अधिकारी नियुक्त किए और बिना वोटर लिस्ट का प्रकाशन किए संविधान को ताक में रखकर आनन फानन में हनुमानगढ़ जिले की महासभा के चुनाव भादरा में ईद मीलादुन्नबी के पवित्र त्यौहार के दिन 09 अक्टूबर 2022 को अखबार की खबर के जरिए कराने घोषित कर दिए, इससे विवाद और बढ़ गया, मजबूरी में दिल पर पत्थर रखकर हमने 06 अक्टूबर 2022 को जयपुर में कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। माननीय न्यायालय ने 07 अक्टूबर 2022 को विस्तार से मामले की सुनवाई कर राजस्थान कायमखानी महासभा के चुनाव संविधान के अनुसार कराने का अंतरिम आदेश दिया। इस अंतरिम आदेश के खिलाफ कर्नल शौकत साहब ने 07 नवम्बर 2022 को सेशन कोर्ट जयपुर में अपील कर दी, जिसका फैसला भी 31 जुलाई 2023 को हो गया है।
मोहतरम हाजी साहब कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति की शुरू से दो मांग थी और उन्हीं दो मुद्दों को लेकर हमने माननीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पहली मांग संविधान के अनुसार राजस्थान कायमखानी महासभा के स्वतन्त्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं। दूसरी मांग सभी गैर कायमखानियों को महासभा की सदस्यता सूची से हटाया जाए। इन दोनों मुद्दों पर हम कभी भी न तो वार्ता से पीछे हटे हैं और ना ही कभी हटेंगे।
(24 अगस्त 2023)
समस्त पदाधिकारी एवं सदस्य
कायमखानी विरासत एवं वंशावली संरक्षण समिति।
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(27/08/2023)
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