प्रधान जी इस्लाम खां मेघरास के तीसरे यौम ए वफ़ात पर आयोजित हुआ ब्लड डोनेशन कैम्प
प्रधान जी इस्लाम खां मेघरास के तीसरे यौम ए वफ़ात पर आयोजित हुआ ब्लड डोनेशन कैम्प
रक्तदान शिविर में मरहूम प्रधान जी के गांव मेघरास से जमील खान, मुमताज खान, इकबाल खान सोनू चाचा, लाल बापू , आजाद खान, रफीक खान सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर शिविर को सफल बनाया। कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों ने रक्तवीरों को सम्मानित करते हुए उन्हें बधाई दी और प्रधान जी को याद करते हुए उन्हें खिराज ए अकीदत पेश की।
उल्लेखनीय है कि इस्लाम खां जी ग्राम पंचायत मेघरास के सरपंच रहे हैं और बरसों तक इस ग्राम पंचायत में सरपंच इन्हीं के परिवार का सदस्य रहा है। वे दो बार सरपंच, एक बार बनेड़ा पंचायत समिति के उप प्रधान एवं कार्यवाहक प्रधान भी रहे हैं। वे राजस्थान युवा कायमखानी महासभा के प्रदेशाध्यक्ष भी रहे हैं। साथ ही कायमखानी वेलफेयर ट्रस्ट जयपुर के ट्रस्टी, राजस्थान कायमखानी शोध संस्थान जोधपुर के संस्थापक सदस्य और राजस्थान कायमखानी महासभा के संरक्षक सदस्य भी रहे हैं। इसके अलावा वे कायमखानी काॅर्डिनेशन सेवा संस्थान भीलवाड़ा के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे हैं।
इसी कायमखानी काॅर्डिनेशन सेवा संस्थान भीलवाड़ा ने कायमखानी क़ौम में सामूहिक विवाह सम्मेलन करने की शुरुआत की थी। प्रधान जी के नेतृत्व में उनकी टीम ने सात सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किए और कई अन्य छोटे बड़े सामाजिक व शैक्षणिक प्रोग्राम भी किए हैं। यह सामूहिक विवाह सम्मेलन दो वर्ष के अन्तराल पर आयोजित किए जाते हैं, जिनमें काफी संख्या में अमीर व ग़रीब हर कायमखानी परिवार ने अपने बच्चे बच्चियों की शादी की है।
इस्लाम खां जी ने भीलवाड़ा जिले के कायमखानी सरदारों को साथ लेकर करीब एक दशक पहले 2006 में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करने के लिए कायमखानी काॅर्डिनेशन सेवा संस्थान भीलवाड़ा की स्थापना की थी। इस संस्थान ने 23 अप्रेल 2017 को सातवां ऐतिहासिक सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित किया था। शाहपुरा में आयोजित यह सम्मेलन एक आलीशान रिसोर्ट मणीयार काॅटेज होटल एण्ड रिसोर्ट में आयोजित किया गया था। जिसमें मुख्य अतिथि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री यूनुस खान थे। इस सम्मेलन में कौम के प्रतिष्ठित समाजसेवी मोहम्मद खां चित्तौड़गढ़ और डीवायएसपी महमूद खां के पुत्रों की भी शादी हुई थी।
प्रधान जी पूरे प्रदेश में कायमखानी क़ौम के हर छोटे बड़े प्रोग्राम में शरीक होते थे। वे हमेशा अपने भाषण में एक दोहा या शेअर बोलते थे, "बोल सको तो मीठा बोलो, कटु बोलना मत सीखो। लगा सको तो बाग लगाओ, आग लगाना मत सीखो।" यह पंक्तियां उन्होंने आखरी बार अपने इन्तकाल से 20 दिन पहले जयपुर स्थित कायमखानी गेस्ट हाउस में राजस्थान कायमखानी महासभा के पूर्व संयोजक जी ख़ान साहब की दुआ ए मग्फिरत की बैठक में बोली थी। वे इन पंक्तियों को पूरी तरह से अपनी जिन्दगी में ढाले हुए थे। वे कभी किसी से तोड़ कर नहीं रखते थे, बल्कि हर मीठी और कड़वी बात को हंस कर टाल देते थे। इस्लाम खां जी शकरू खां जी हाथीखानी के घर पैदा हुए थे।
शकरू खां जी मेवाड़ इलाके के एक प्रतिष्ठित समाजसेवी व राजनेता रहे हैं। वे 1956 में पहली बार गांव मेघरास के सरपंच बने और छह बार सरपंच रहे। इस्लाम खां जी की मां अशरफ बाई हुसैनखानी भी सरपंच रही हैं। जिनका का 7 जनवरी 2018 को करीब 97 साल की उम्र में इन्तकाल हो गया था। शकरू खां जी का अपने इलाके की सभी कौमों में बड़ा मान सम्मान था, वे सभी कौमों में लोकप्रिय थे, क्योंकि वे सभी कौमों के सुख दुःख में शरीक रहते थे तथा वे गंगा जमुनी तहजीब के एक मजबूत पैरोकार थे। यही कारण था कि उन्हें कई वर्षों तक सरपंच बनने का पंचायतवासियों ने अवसर प्रदान किया। उनकी इसी प्रतिष्ठा के कारण उनके बड़े पुत्र याकूब खां भी मेघरास के सरपंच रहे हैं।
शकरू खां जी की प्रतिष्ठा और मिलनसारिता के कारण इस परिवार को पूरे इलाके में सम्मान की नजर से देखा जाता है तथा इसी वजह से इनकी पुत्रवधु और इस्लाम खां जी की पत्नी भंवर बानो को भी सभी कौमों के सहयोग व समर्थन से एक बार अपनी ग्राम पंचायत का सरपंच और एक बार पंचायत समिति सदस्य (ब्लाॅक मेम्बर) बनने का अवसर मिला था। इनके अलावा एक पोत्र वधु शबनम बानो पत्नी ताज मोहम्मद खान को भी पंचायत समिति सदस्य बनने का मौका मिला था। कुल मिलाकर यह है कि इस परिवार के तीन पुरूषों एवं तीन महिलाओं को क्षेत्र की सेवा करने के लिए जन प्रतिनिधि बनने का मौका जनता ने दिया है।
शकरू खां जी को उनकी ईमानदार, समाजसेवी और इन्साफ पसंद छवि के कारण कायमखानी कौम ने राजस्थान कायमखानी महासभा का अध्यक्ष भी बनाया था। उल्लेखनीय यह भी है कि शकरू खां जी जब राजस्थान कायमखानी महासभा के अध्यक्ष थे, तब उनके जनरल सेक्रेटरी कौम के प्रतिष्ठित सरदार डीडवाना के हैडमास्टर भंवरू खां जी गौराण थे, जो पूरी कौम में हैडमास्टर साहब के नाम से आज भी मशहूर हैं। इस टीम में कोषाध्यक्ष उम्मेद खां जी डीडवाना थे, जो बाद में महासभा के अध्यक्ष भी बने। इस पूरी टीम ने कम संसाधन होते हुए भी प्रदेश भर में कायमखानी इलाकों का दौरा किया और कौम में सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और आर्थिक जागरूकता फैलाने में भरपूर कामयाबी हासिल की।



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