नफ़रत और ध्रुवीकरण से राजस्थान को फतह करने की तैयारी ?
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भाजपा का तो शुरुआत से यह एजेंडा रहा है, लेकिन कांग्रेस के नेता भी इस एजेंडे के खिलाफ मुंह खोलना अपना सियासी सुसाइड मान रहे हैं। ताज़ा मामला राजधानी जयपुर का है जहां एक मुस्लिम युवक की पीट पीट कर सरेआम हत्या करने के बाद हुए उग्र माहौल की आग में भाजपा ने सियासी बाटी सेकने की कोशिश की, वहीं कांग्रेसी नेताओं ने खामोशी की चादर ओढ़ ली। कांग्रेसी नेताओं का यह रवैया कहीं आत्मघाती गोल साबित नहीं हो जाए ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। भारतीय जनता पार्टी जिसका मुख्य एजेंडा है कि हिन्दू मुस्लिम मुद्दों को हवा देकर वोटों का ध्रुवीकरण किया जाए और फिर सत्ता के मजे लिए जाएं। इस एजेंडे पर भाजपा शुरू से ही चल रही है और उसके पास इस एजेंडे के अलावा कोई सामान भी नहीं है, अगर भाजपा इस एजेंडे को छोड़कर रोटी रोजगार के मुद्दों पर बात करने लग जाए तो उसकी सियासी दुकान का पूरी तरह से शटर डाउन हो जाए, क्योंकि उसने सत्ता में आने के बाद रोटी रोजगार देने के काम कम किए हैं और छीनने के ज्यादा किए हैं। इसलिए वो ध्रुवीकरण के मुद्दे पर ही ज्यादा फोकस करती है, लेकिन यह मुद्दा किसी के हित में नहीं है, अगर भाजपा समर्थक हिन्दू भाई बहन यह समझते हैं कि इस साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से उन्हें कोई लाभ मिल जाएगा, तो जान लें बिल्कुल नहीं मिलेगा, पूरे देश का इससे नुक़सान होगा, हर भारतीय का नुक़सान होगा और आज हो भी रहा है।
अगर हमारी इस बात पर यकीन नहीं है तो हर उस हिन्दू भाई बहन को जो भाजपा समर्थित है खुद से पूछना चाहिए कि भाजपा के शासन में उसे क्या लाभ मिला ? कितने रोजगार बढ़े ? सरकारी वैकेंसी जो लाखों में खाली पड़ी हैं वो क्यों नहीं भरी गई ? निजीकरण के बढ़ावे और सरकारी नौकरियों में संविदा आधारित बंधुआ मजदूरी ने कैसे योग्य युवक-युवतियों का जीवन नर्क बना दिया है ? नोटबंदी और जीएसटी जैसे मनमर्ज़ी के बिना तैयारी किए निर्णयों ने छोटे व्यापारियों की पूरी तरह से कमर तोड़ दी है। कुछ लोगों के पास अथाह सम्पत्ति आ गई है और बहुत से लोग रोटी रोजगार और आर्थिक रूप से तबाहो बरबाद हो गए हैं। बेरोज़गारी से पारिवारिक झगड़े और अपराध बढ़ गए हैं। दीवार पर लिखी सच्चाई यह है कि आज भी करोड़ों हिन्दू भाई बहन गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने को मजबूर हैं, क्यों ? जबकि देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। लेकिन समस्या एक ही है कि देश की बड़ी संख्या जनहित के मुद्दों की बजाए हिन्दू मुस्लिम ध्रुवीकरण पर वोट दे रही है।
पिछले दिनों राजस्थान की राजधानी जयपुर में नफ़रत की आग लगाने और उस आग में सियासी बाटियां सेकने की जो कोशिश भाजपा ने की वो बहुत ही निन्दनीय है। जयपुर की गंगा जमुनी तहज़ीब का यहां की हिन्दू मुस्लिम अवाम ने झंडा बुलंद करके सबको बताया कि जयपुर में नफ़रत नहीं बल्कि आपसी भाईचारा परवान चढ़ेगा। घटनाक्रम यूं हुआ कि 29 सितम्बर की रात को यहां के गंगापोल इलाके में मोटरसाइकिल टकराने के मुद्दे पर एक झगड़ा हुआ, जिसमें कुछ युवकों ने एक युवक को लाठी डंडों से पीट पीट कर मार डाला। घटनाक्रम की सच्चाई क्या है यह एक जांच का विषय है। लेकिन मरने वाला युवक मुस्लिम समुदाय से था और मारने वाले हिन्दू समुदाय से, इस मुद्दे को लेकर माहौल उग्र हो गया। अगले दिन 30 सितम्बर को रामगंज इलाके में उग्र प्रदर्शन हुआ, जो मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है और मृतक युवक भी इसी इलाके का रहने वाला था। उग्र माहौल को पुलिस और मुस्लिम रहनुमाओं ने बड़ी जद्दोजहद के बाद शांत किया। इसके लिए जयपुर पुलिस और मुस्लिम रहनुमा बधाई के पात्र हैं।
इस उग्र प्रदर्शन के विरोध में जयपुर व्यापार संघ और कुछ हिन्दू संगठनों ने 4 अक्टूबर को बड़ी चौपड़ पर विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा के नेता भी शरीक हुए। यहां जमकर नफरती नारे और भाषणबाजी हुई। पुलिस ने बड़ी मुश्किल से माहौल शांत किया, एक पुलिस स्टेशन में थानाधिकारी के साथ प्रदर्शकारियों ने अभद्र व्यवहार भी किया।
पहली बात तो यह है कि 30 सितम्बर को जो उग्र प्रदर्शन किया गया वो ग़लत था, जज़्बात में आकर इस कदर कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश करना और दूसरों को दहशत में डालना कतई उचित नहीं है। दूसरी बात यह है कि उग्र माहौल को और उग्र बनाने तथा उसकी आग में सियासी बाटियां सेकने के लिए 4 अक्टूबर को किया गया विरोध प्रदर्शन भी कतई उचित नहीं है। जिन्होंने भी कानून हाथ में लिया, किसी को जान माल का नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की, भड़काऊ भाषणबाजी से दो समुदायों में नफ़रत फैलाकर फसाद कराने की कोशिश की उन सब पर पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए चाहे वो कोई भी हो।
तीसरी बात यह है मुस्लिम समुदाय को अपने युवाओं को नियंत्रण में रखने और उन्हें कानून कायदे का सम्मान करने की नसीहत देने का अभियान चलाना चाहिए। गली मोहल्लों में देर रात तक आवारागर्दी करते घूमते युवाओं को अगर नियंत्रण में नहीं किया तो यह पूरी क़ौम के लिए आफ़त बन जाएंगे। हर मुस्लिम सामाजिक रहनुमा, मजहबी रहनुमा, सियासी रहनुमा की यह जिम्मेदारी बनती है कि वो मुस्लिम युवाओं को सही रास्ता दिखाने का गम्भीरता से प्रयास करें। हर परिवार की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वो अपनी नई पीढ़ी को आवारा माहौल से बचाए। चौथी बात यह है कि हिन्दू समुदाय को भी अपने भड़काऊ और ध्रुवीकरण के जरिए सियासी एजेंडा चलाने वाले तथाकथित संतों और नेताओं को यह बात समझानी चाहिए कि आप क्यों देश व समाज को तबाह करने पर तुले हुए हैं ? क्यों भड़काकर के युवाओं के दिमाग में नफ़रती जहर भर कर उन्हें बरबाद कर रहे हैं ?
पांचवी बात राजसमंद सांसद दीया कुमारी के लिए। आप भाजपा की नेता बाद में हैं और जयपुर राजघराने की बेटी पहले हैं। आपके पुरखों की पहचान गंगा जमुनी तहज़ीब रही है, आपके दादा (तत्कालीन महाराजा मान सिंह जी जयपुर रियासत) ने 1947 में देश के खूनी विभाजन में भी जयपुर रियासत में नफ़रत नहीं फैलने दी और पूरी रियासत में कहीं भी दंगा फसाद नहीं होने दिया था, आप उस राजघराने की बेटी होकर 4 अक्टूबर के नफरती विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गई ?
छठी बात कांग्रेस के नेताओं के लिए, जयपुर में फैले इस उग्र माहौल को शांत करने के लिए विधायक अमीन कागजी और रफीक खान ही मैदान में दिन रात क्यों लगे रहे ? क्या यह जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री महेश जोशी, प्रताप सिंह खाचरियावास, लालचंद कटारिया और गंगादेवी, सीताराम अग्रवाल, अर्चना शर्मा, प्रशान्त शर्मा, शहर अध्यक्ष आर आर तिवाड़ी आदि नेताओं की नहीं थी ? सभी को उग्र माहौल में शहर के बीच होना चाहिए था। अगर कांग्रेस के नेता यह सोच कर मुंह नहीं खोलते हैं कि हमारे वोट खराब हो जाएंगे, तो जान लीजिए फिर आपकी इस सोच पर भी प्रश्न चिन्ह लगेगा और आपकी यह सोच कहीं आत्मघाती गोल साबित नहीं हो जाए ?
(09/10/2023)
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