एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब : जिन्होंने पूरी ज़िन्दगी तालीम को बढ़ावा देने में लगा दी
--------------------------------
वे 27 नवम्बर को इस दुनिया से रूखसत हो गए
*********************
जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। राजस्थान के मशहूरो मारूफ समाजी कारकुन एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब इस दुनिया में नहीं रहे। 27 नवम्बर की सुबह उनका इन्तकाल हो गया और इसी दिन असर की नमाज के वक्त उन्हें घाटगेट कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। उनके जनाजे में जयपुर और जयपुर से बाहर के कई समाजी और मजहबी जिम्मेदार शरीक हुए।
एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब एक बेमिसाल शख्सियत के मालिक थे, उन्होंने ऐसे लोगों की समाजी और सियासी पहचान क़ायम करवाई, जिनको उनके गली मोहल्ले से बाहर कोई जानता तक नहीं था। उनका ताल्लुक जयपुर के रामगंज इलाके और यहां की रहमानी बिरादरी से था। चार दशक पहले इस इलाके व बिरादरी में तालीम की बेहद कमी थी। यहां उन्होंने रहमानी मस्जिद में स्कूल शुरू करवाया और इस स्कूल को सीनियर सेकेंडरी तक स्थापित किया। यहां से बेशुमार बच्चे बच्चियां पढ़कर आज अपनी जिन्दगी संवार चुके हैं। काफी संख्या में आज यहां बच्चे बच्चियां तालीम हासिल कर रहे हैं। मस्जिद में बिना किसी विशेष भवन के यह एक ऐसा स्कूल है जहां विधायक, सांसद, मंत्री और बड़े बड़े विद्वान किसी न किसी कार्यक्रम में शरीक हो चुके हैं। करीब आठ साल पहले इक़रा पत्रिका में इस स्कूल पर एक फुल पेज की विस्तृत स्टोरी भी प्रकाशित की थी।
एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब 1977 की जनता पार्टी सरकार में छोटी सी उम्र में राजस्थान वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे। उन्हें राजस्थान मदरसा बोर्ड का बानी (संस्थापक ) माना जाता है। उन्होंने अपनी टीम के जरिए पूरे राजस्थान के मदरसों का रिकॉर्ड जमा किया और फिर मदरसा बोर्ड नाम से इन सभी को सेंट्रलाइज कर संचालित करने में मदद की। फिर इसी होम वर्क पर अशोक गहलोत सरकार ने 2003 में राजस्थान मदरसा बोर्ड का गठन किया।
एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब ऑल इंडिया मिल्ली काॅन्सिल के फाउंडर मेम्बर और राजस्थान के जनरल सेक्रेटरी थे। उन्होंने टाडा जैसे काले और अत्याचारी कानून को हटवाने के लिए जबरदस्त मुहिम चलाई। उन्होंने सरकार से अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थियों के लिए स्काॅलरशिप दिलाने वाली योजना लागू करने और मदरसों को विभिन्न प्रकार की सरकारी इमदाद दिलाने के लिए भी बड़ी जद्दोजहद की।
उम्र के 81 से ज्यादा ईद देख चुके एडवोकेट अब्दुल कय्यूम अख्तर साहब की शख्सियत कुल हिन्द लेवल की थी, तमाम मिल्ली तंजीमों और सियासी पार्टियों में उनकी एक पहचान थी। उन्होंने इन्सानों की तरक्की, भाईचारे और तालीम को बढ़ावा देने के लिए अपनी पूरी ज़िन्दगी ख़र्च कर दी। वे एक शख्स नहीं बल्कि खुद एक तन्जीम थे। वे बहुत ही शालीन, सभ्य, मिलनसार और अपनायत वाले शख्स थे। उम्र के आखरी पड़ाव में वे बीमारी से पूरी तरह घिर चुके थे, फिर भी जब तक बिस्तर से उठने की हिम्मत रही रोज़ स्कूल और अपने दफ्तर जाते और सारे इंतजाम खुद देखते थे।
(09/12/2023)
------------------------------------
➡️अगर आपको हमारा यह लेख/खबर पसंद आया हो, तो प्लीज इसे शेयर/फॉरवर्ड कीजिए और साथ ही हमारे अखबार की आर्थिक मदद भी कीजिए।
अकाउंट डिटेल्स:- इकरा पत्रिका
IKRA PATRIKA
PNB, MUSLIM SR. SEC. SCHOOL, MOTI DUNGARI ROAD, JAIPUR.
-------------------------------------------
➡️इकरा पत्रिका को सहयोग राशि आप Paytm, Phone Pay और Google Pay से भी भेज सकते हैं। फोन नम्बर 9414361522 पर (अकाउंट Farooq Ali Khan)
--------------------------------------------
©️ Copyright :- इस सम्पूर्ण लेख/खबर को या इसके किसी पैराग्राफ़ को हुबहू या तोड़ मरोड़ कर प्रकाशित करना मना है। अलबत्ता आप चाहें तो लेखक और हमारे अखबार के नाम के साथ इस सम्पूर्ण लेख/खबर को सोशल मीडिया पर शेयर जरूर कर सकते हैं।
---------------------------------------------
-@-एम फारूक़ ख़ान सम्पादक इकरा पत्रिका।
©️ Copyright Thar News & Ikra Patrika.
All Rights Reserved.
Comments
Post a Comment