वक्फ जायदाद, देवस्थान भूमि बनाम गुरूद्वारे और चर्च

वक्फ जायदाद, देवस्थान भूमि बनाम गुरूद्वारे और चर्च

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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। वक्फ जायदाद और देवस्थान भूमि पूरे देश में बड़े पैमाने पर खुर्द बुर्द हो रही हैं, जो धर्म के नाम पर हैं और इन्सानों के कल्याण के लिए हैं। वक्फ जायदाद इस्लाम धर्म से मुताल्लिक हैं और देवस्थान भूमि सनातन धर्म से सम्बन्धित हैं। वक्फ जायदाद की देखरेख मुसलमानों के हाथ में है, यानी इसके पदाधिकारी सभी मुसलमान होते हैं, चाहे वक्फ प्रबंध कमेटी के लोग हों या वक्फ बोर्ड के लोग। देवस्थान भूमि के जिम्मेदार सनातन धर्म को मानने वाले यानी हिन्दू धर्म से सम्बन्धित लोग होते हैं।



धर्म और मानव कल्याण के लिए देशभर में लाखों जायदाद वक्फ और देवस्थान की हैं। लेकिन इनसे मानव कल्याण कम और इनके व्यवस्थापकों के धन में वृद्धि अधिक होती है। वक्फ जायदाद और देवस्थान भूमि की प्रबंध कमेटी बनाने, किरायेदारी करने आदि को लेकर जमकर हेराफेरी की जाती है। हेराफेरी भी व्यवस्थित रूप से होती है। पुराने किरायेदारों को खाली कराने, किराया बढ़ाने, किसी कोर्ट में चल रहे मुकदमे में ढंग से पैरवी नहीं करने आदि हथकंडों से यहां लूट खसोट होती है। सब कुछ धर्म की आड़ में व्यवस्थित अधर्म होता है।

वक्फ जायदाद और देवस्थान भूमि पर भी बहुत ही जगह शिक्षण संस्थान, मुसाफिरखाने, धर्मशालाएं, अस्पताल आदि चलते हैं, जो अच्छी बात है। लेकिन गुरूद्वारों और चर्च से सम्बंधित जितनी भी जायदाद हैं, उनसे जो मानव कल्याण हो रहा है, वैसा मानव कल्याण वक्फ जायदाद और देवस्थान भूमि से नहीं हो रहा है। चर्च ईसाई धर्म से सम्बन्धित हैं और इनसे सम्बंधित असंख्य शिक्षण संस्थाएं संचालित हो रही हैं और दूसरे मानव कल्याण कार्य भी हो रहे हैं। यही हाल गुरूद्वारों से सम्बंधित जायदादों का भी है, वहां भी बेहतरीन प्रबंधन और मानव कल्याण के सभी कार्य होते हैं।

गुरूद्वारों से तो हर मौके पर लंगर और दूसरे कल्याणकारी कार्य होते हैं। रोहिंग्या मुसलमानों की पीड़ा में बांग्लादेश में सिख धर्म और गुरूद्वारों से सम्बंधित संस्थाओं ने लंगर और अन्य कल्याणकारी कार्य किए। ऐसे ही तुर्की में आए भूकम्प पीड़ितों की मदद में भी गुरूद्वारों से सम्बंधित लोग सबसे आगे खड़े मिले।

हमारे देश में सबसे बड़ी आबादी हिन्दू धर्म से सम्बन्धित लोगों की है, दूसरी बड़ी आबादी मुसलमानों की है। सिख व ईसाई बहुत कम हैं। इसके बावजूद सिख व ईसाई अपनी धार्मिक जायदादों की देखरेख और उनसे उत्पन्न आय से मानव कल्याण कार्य बहुत ही सुचारू व व्यवस्थित ढंग से करते हैं। हिन्दुओं और मुसलमानों को सिखों और ईसाइयों से सबक लेना चाहिए।
(24/11/2023)
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