राजस्थान जीतने के लिए कांग्रेस देगी सहयोगी दलों को आधा दर्जन लोकसभा सीटें ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी पार्टियों ने इंडिया नाम से गठबंधन बना लिया है। जिसकी चार पांच छोटी बड़ी मीटिंग हो चुकी हैं। ज्यादातर विपक्षी दलों की राय है कि भाजपा उम्मीदवारों के सामने विपक्ष की तरफ से इंडिया गठबंधन का एक ही साझा उम्मीदवार मैदान में उतारा जाए, ताकि वोटों का बंटवारा नहीं हो और पूरी सामूहिक ताकत से भाजपा को सत्ता से बेदखल किया जा सके।
इस बीच सियासी गलियारों में चर्चा यह है कि जिस राज्य में जो पार्टी लीड रोल में हैं उसे ज्यादा सीटें दी जाएं और बाकी सहयोगी दलों को भी हर राज्य में कुछ न कुछ सीटें दी जाएं ताकि सामूहिकता स्पष्टता से नजर आए। इन चर्चाओं के बीच राजस्थान के सियासी गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस जो कि यूपी, बिहार, बंगाल, दिल्ली, पंजाब, झारखंड और तमिलनाडु जैसे राज्यों में ज्यादा सीटें लेने की बात कह रही है, जबकि इन राज्यों में कांग्रेस बहुत ही कमजोर है, तो कांग्रेस को भी अपने होल्ड वाले राज्यों में सहयोगी विपक्षी दलों के लिए सम्मानजनक लोकसभा सीटें छोड़नी चाहिए।
राजस्थान के सियासी मैदान में इंडिया गठबंधन से सम्बंधित कम्युनिस्ट पार्टियां, समाजवादी दल और स्थानीय भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) आदि सक्रिय हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विधानसभा चुनाव में इन दलों से गठबंधन कर कांग्रेस चुनाव लड़ती तो भाजपा किसी भी सूरत में सत्ता में नहीं आ पाती। लेकिन अब विधानसभा चुनाव की ग़लती को लोकसभा चुनाव में सुधारा जा सकता है।
राजस्थान में कांग्रेस 2014 में सभी 25 लोकसभा सीटें हार गई थी और यही परिणाम 2019 के लोकसभा चुनाव में भी आया था। अब 2024 के लोकसभा चुनाव से चार महीने पहले राजस्थान का विधानसभा चुनाव कांग्रेस हार गई है, इस हार से लोकसभा चुनाव भी प्रभावित होने तय हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा को टक्कर देने के लिए इंडिया गठबंधन की बड़ी रैली राजस्थान में हो और गठबंधन की सहयोगी पार्टियों के लिए कांग्रेस सम्मानजनक सीटें छोड़े।
इन सीटों में सीकर, चूरू, जयपुर सिटी, अलवर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर और बांसवाडा आदि प्रमुख हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ती है और एकला चालो की नीति राजस्थान में अपनाती है तो उसकी बुरी हार तय है, ऐसे में बेहतर यह है कि वो लगातार हार रही कुछ सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ दे और सभी गठबंधन दल जनहित के मुद्दों को लेकर एकजुटता से मैदान में उतरें तो कांग्रेस गठबंधन राजस्थान में 15 से 20 लोकसभा सीटें जीत सकता है।
(24/12/2023)
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