राजस्थान में कांग्रेस 16 लोकसभा सीटें आसानी से जीत सकती है, सवाल सिर्फ रणनीति और नीयत का है ?
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जयपुर (थार न्यूज़-इक़रा पत्रिका)। लोकसभा चुनाव 2024 के अब चंद ही दिन बचे हैं। पूरा चुनावी मैदान मोदी समर्थन और मोदी विरोध पर केन्द्रित हो चुका है, यानी एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थक हैं तो दूसरी तरफ उनके विरोधी, बाकी धरातल पर न कोई पार्टी नजर आ रही है और ना ही कोई विचारधारा। एक तरफ मोदी नेतृत्व में एनडीए है तो दूसरी तरफ मोदी विरोध में इंडिया गठबंधन।
मोटे तौर पर देखा जाए तो पिछले लोकसभा चुनाव 2019 में करीब 60 फीसदी वोट मोदी विरोध में पोल हुआ था, जो बिखरा हुआ था और इस बार यह एकजुट होता जा रहा है। इस विरोधी वोट की इसी एकजुटता से प्रधानमंत्री मोदी और उनके रणनीतिकार घबराए हुए हैं, वे एक एक सीट पर बारीकी से चिन्तन मन्थन कर रहे हैं, जीत के लिए जिताऊ उम्मीदवार दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल कर रहे हैं, छोटी मोटी पार्टियों को अपने साथ जोड़ रहे हैं, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए 370 और 400 पार का नारा लगा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत सबको मालूम है। जमीन से जुड़े हुए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 400 पार तो दूर की बात 272 का आंकड़ा छूना भी इस बार बहुत मुश्किल है।
इस जमीनी सच्चाई के बावजूद विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की कुछ राज्यों में हालत बहुत पतली है, इनमें राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश प्रमुख हैं। इन तीनों राज्यों की कुल 80 सीटों में से 79 सीटें वर्तमान में भाजपा के पास हैं तथा इन तीनों राज्यों में राज भी भाजपा का ही है। इन तीनों राज्यों में प्रमुख विपक्षी दल के तौर पर कांग्रेस का ही होल्ड है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तीनों राज्यों में इस बार भी भाजपा को खुली बढ़त या एकतरफा जीत मिलती हुई स्पष्ट नजर आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का राजस्थान के ताल्लुक से मानना है कि यहां भाजपा को करारी शिकस्त दी जा सकती है। यहां 25 में से 16 सीटें कांग्रेस गठबंधन आसानी से जीत सकता है। वर्तमान में सभी 25 सीटें भाजपा के पास हैं। (एकमात्र नागौर लोकसभा सीट आरएलपी से हनुमान बेनीवाल के पास है, जो गत चुनाव में भाजपा से गठबंधन कर जीती गई थी और अब हनुमान बेनीवाल भाजपा गठबंधन से बाहर हैं)।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस बड़ा दिल दिखाए और सहयोगी दलों से मजबूत गठबंधन कर राजस्थान के चुनावी मैदान में उतरे तो यहां इंडिया गठबंधन को 16 सीटों पर ऐतिहासिक जीत मिल सकती है। इसके लिए जरूरी यह भी है कि कांग्रेस आलाकमान अपने चापलूस व चोर नेताओं के चक्कर में न आकर जमीनी हकीकत को पहचानते हुए ऐसे मजबूत और सक्षम नए चेहरों को उम्मीदवार बनाए जो भाजपा उम्मीदवारों के सामने मजबूती से खम ठोक सकें, जो विचारहीन और भ्रष्ट नहीं हों, जो पार्टी आलाकमान की बजाए किसी बड़े नेता के गुलाम नहीं हों। इन 16 सीटों पर सफलता दीवार पर लिखी हुई सच्चाई की तरह है, लेकिन इस सफलता के लिए सवाल सिर्फ मजबूत रणनीति और नीयत का है, जिस पर कांग्रेस आलाकमान अमल करता है या नहीं। यह कुछ दिनों में मालूम चल जाएगा। अगर अमल नहीं किया तो राजस्थान में तीसरी बार कांग्रेस की नैय्या डूबनी तय है।
(09/03/2024)
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